उन्नाव: बुधवार की अलसुबह, जब दुनिया सो रही थी, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर एक परिवार का सपना और भविष्य, दोनों ही एक पल में चकनाचूर हो गए। वृंदावन घूमने निकले एक हंसते-खेलते परिवार के पांच लोगों को क्या पता था कि उनकी यात्रा का अंत इतना भयावह होगा। सुबह करीब 4:30 बजे, बांगरमऊ इलाके में एक तेज रफ्तार स्लीपर बस ने उनकी अर्टिगा कार को इतनी जोर से टक्कर मारी कि सड़क पर चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते जिंदगी की डोर टूट गई। यह हादसा सिर्फ एक टक्कर नहीं, बल्कि एक चलती-फिरती कहानी का दुखद अंत था, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
टकराव इतना भयानक था कि अर्टिगा कार के तो परखच्चे उड़ गए। लोहे के ढेर में बदल चुकी कार करीब 20 फीट तक सड़क पर घिसटती चली गई।
यह मंजर किसी की भी रूह कंपाने के लिए काफी था। बस भी बेकाबू होकर एक्सप्रेस-वे की रेलिंग तोड़ते हुए नीचे खाई में जा गिरी और पलट गई।
हादसे वाली जगह पर हर तरफ कांच के टुकड़े, गाड़ियों का मलबा और लोगों की चीखें ही चीखें थीं। राहगीरों की सूचना पर आनन-फानन में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
बस की खिड़कियों के शीशे तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला जाने लगा और घायलों को बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया गया।
सफर जो बन गया मौत का कारण: आर्यन की आपबीती
इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों ने अपनी जान गंवा दी। मृतकों में विनोद (45), उनकी बेटी दिव्या (13), विनोद की साली अंजू (40), साली की बेटी अमृता (6) और विनोद के ससुर भुनभुन (60) शामिल हैं।
ये सभी मौके पर ही दम तोड़ चुके थे। कार में कुल 9 लोग सवार थे, जबकि बस में 70 यात्री थे।
हादसे में कार सवार 4 और बस सवार 4 यात्री घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया गया। घायलों में 16 साल का आर्यन भी है, जिसने अपनी आंखों के सामने अपने पूरे परिवार को बिखरते देखा।
आर्यन ने बिलखते हुए बताया, “हम संत कबीरनगर के बढ़या बाबू गांव के रहने वाले हैं। मंगलवार रात करीब 8 बजे हम अपने दोस्त की कार लेकर वृंदावन घूमने निकले थे।
लखनऊ में थोड़ी देर रुकने के बाद हम आगरा एक्सप्रेस-वे पर चढ़े। पापा विनोद कार चला रहे थे।
सुबह अचानक एक बस ने पीछे से हमारी कार को टक्कर मार दी, सब खत्म हो गया।” इस छोटे से बच्चे की बातों में वो दर्द साफ झलक रहा था, जो अब जिंदगी भर उसके साथ रहने वाला है।
हादसे में घायल होने वालों में आर्यन की मां प्रिया (40), बहन अपराजिता (10) और मौसेरी बहन रिदा (5) भी शामिल हैं। वहीं, बस में सवार यात्रियों में बिहार के बोध नगर, नालंदा की अन्नू देवी (78), सूरज (18), पवन कुमार (15), आनंदी (15), प्रमोद (25), शंकर माझी (25), खुशबू (14) और हरियाणा के फरीदाबाद से मोहित (34) भी शामिल हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
ड्राइवर की लापरवाही और पुलिस की कार्रवाई
बांगरमऊ के क्षेत्राधिकारी (CO) हर्ष मोदी ने बताया कि यह भीषण हादसा जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर बांगरमऊ इलाके में हुआ। वहीं, बांगरमऊ इंस्पेक्टर अखिलेश पांडेय ने इस दर्दनाक घटना की शुरुआती जांच के आधार पर बताया कि यात्रियों के शुरुआती बयानों से पता चला है कि बस का चालक शायद शराब के नशे में था और उसे झपकी आ गई थी, जिसके कारण ये भीषण टक्कर हुई।
यह बात अगर सच साबित होती है तो यह ड्राइवर की घोर लापरवाही का एक भयावह उदाहरण होगा। पुलिस के मुताबिक, बाबा ट्रैवलर की ये स्लीपर बस हरियाणा के झज्जर से बिहार के नालंदा जा रही थी, जिसका नंबर BR 06 PF 1024 था।
वहीं, संत कबीरनगर की अर्टिगा कार का नंबर UP 58 AK 3461 था। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि बस की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटा के करीब थी, जो रात के अंधेरे और संभावित नशे की हालत में और भी खतरनाक साबित हुई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) घनश्याम मीना और पुलिस अधीक्षक (SP) जय प्रकाश सिंह खुद मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन और घायलों के इलाज की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
पुलिस ने मृतकों के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लंबी यात्राओं पर ड्राइवर्स की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसका जवाब ढूंढना बेहद जरूरी है।


