उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक ऐसी आग सुलग रही है, जिसका धुआं सिर्फ शराब की भट्टियों से नहीं, बल्कि गांव वालों के गुस्से और चिंता से उठ रहा है। गंगाघाट थाना क्षेत्र का पिंडोखा गांव इन दिनों खौफ और प्रतिरोध के दोराहे पर खड़ा है। मामला एक शराब ठेके का है, जो गांव के ठीक बीचों-बीच, मुख्य मार्ग पर आकर बस गया है। इस ठेके को लेकर गांव में जबरदस्त उबाल है। बुधवार को दो दर्जन से ज़्यादा ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सीधे जिलाधिकारी कार्यालय का रुख किया और सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह को एक ज्ञापन सौंपकर इस ठेके को गांव से हटाने की पुरज़ोर मांग की है। गांव वाले कह रहे हैं कि अगर यह ठेका नहीं हटा, तो उनकी ज़िंदगी दांव पर लग जाएगी, क्योंकि यह सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि उनके सामाजिक ताने-बाने पर हमला है।
गांव वालों का आरोप है कि शराब का यह ठेका जिस जगह खोला गया है, वो कोई सुनसान कोना नहीं, बल्कि पूरे गांव का दिल है। सोचिए, एक तरफ़ मंदिर की पवित्र घंटियां बज रही हैं, दूसरी ओर बच्चों का भविष्य संवारने वाला विद्यालय खड़ा है और उसी के ठीक बगल में, घनी आबादी के बीच, ये ठेका खोल दिया गया है।
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में साफ-साफ बताया कि इस ठेके के खुलने से गांव का माहौल दूषित हो रहा है और शराब पीने वालों की भीड़ यहां लगने लगी है, जिससे एक अलग तरह का डर और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
मंदिर, स्कूल और आबादी के बीच शराब का ठेका: ग्रामीणों का गुस्सा क्यों जायज है?
पिंडोखा गांव के लोगों की चिंताएं सिर्फ शराबियों की भीड़ तक सीमित नहीं हैं। उनकी सबसे बड़ी फिक्र उनके घर की लक्ष्मी यानी महिलाओं और छोटे बच्चों को लेकर है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह वही रास्ता है, जिससे हर दिन छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं, महिलाएं अपने दैनिक कामों के लिए बाहर निकलती हैं और गांव की बेटियां अपनी पढ़ाई और सपनों को पूरा करने के लिए गुज़रती हैं। ऐसे में, शराब के नशे में धुत लोगों द्वारा अभद्र व्यवहार का खतरा हर पल उनके सिर पर मंडरा रहा है।
इस माहौल में गांव की सुरक्षा व्यवस्था और उसका सामाजिक वातावरण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने सिटी मजिस्ट्रेट को बताया कि यह केवल उनका डर नहीं, बल्कि एक हकीकत बनने की कगार पर है।
बात सिर्फ सामाजिक सुरक्षा तक ही नहीं रुकती। ग्रामीणों ने ज्ञापन में एक और गंभीर बात का ज़िक्र किया।
उनका कहना था कि जिस जगह पर यह शराब ठेका खोला गया है, उस स्थान पर पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। यह रास्ता अपने आप में संवेदनशील और दुर्घटना संभावित है।
अब ऐसे में, शराब का ठेका संचालित होने से हादसों की आशंका कई गुना बढ़ गई है। शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले, या सड़क पर ही उत्पात मचाने वाले लोगों से दुर्घटनाओं का जोखिम और भी गंभीर हो सकता है।
गांव वालों का तर्क है कि प्रशासन को जनहित में इस शराब ठेके को आबादी से दूर किसी सुरक्षित और उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करना चाहिए, ताकि गांव वालों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों की चेतावनी: "अगर ठेका नहीं हटा, तो आंदोलन करेंगे"
पिंडोखा के ग्रामीणों ने सिर्फ अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराई, बल्कि एक ठोस चेतावनी भी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर प्रशासन ने समय रहते उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया और इस शराब ठेके को गांव से नहीं हटाया, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
यह कोई खोखली धमकी नहीं, बल्कि अपने बच्चों और अपने गांव के भविष्य को बचाने के लिए उठाई गई एक आवाज़ है। गांव वाले कहते हैं कि वे किसी भी कीमत पर अपने गांव के माहौल को खराब नहीं होने देंगे और इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
उनकी एकजुटता और दृढ़ संकल्प इस बात का गवाह है कि यह मामला उनके लिए कितना गंभीर और संवेदनशील है।
उधर, गांव वालों की शिकायत सुनने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह ने उन्हें तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराएंगे और ग्रामीणों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन की ओर से यह प्रतिक्रिया गांव वालों के लिए थोड़ी राहत की बात तो है, लेकिन वे पूरी तरह से आश्वस्त तब तक नहीं होंगे, जब तक ठेका वास्तव में हटा नहीं दिया जाता।
ग्रामीणों ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मकसद किसी भी व्यवस्था का विरोध करना नहीं है, न ही वे विकास या व्यापार के खिलाफ हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य अपने गांव के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखना, महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपने सामाजिक माहौल को शराब के दुष्प्रभावों से बचाना है।
उन्होंने प्रशासन से इस संवेदनशील मामले में जल्द से जल्द कोई ठोस और निर्णायक फैसला लेने की अपील की है, ताकि गांव में शांति और सुरक्षा का माहौल बना रहे। यह सिर्फ पिंडोखा की कहानी नहीं, बल्कि देश के कई ऐसे ग्रामीण इलाकों की आवाज है, जहां शराब के ठेके आबादी के बीच आकर लोगों की जिंदगी में जहर घोलने का काम कर रहे हैं।
प्रशासन को इन आवाजों पर ध्यान देना ही होगा।

