उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में सोमवार की रात एक परिवार के लिए कहर बनकर आई। सफ़ीपुर कोतवाली क्षेत्र के माथर गांव के 45 साल के नरेश, जो घर पर ही किराना की दुकान चलाकर अपने परिवार का पेट पालते थे, गंगादासपुर गांव से अपना रोज़ का काम निपटाकर देर रात करीब आठ बजे बाइक से घर लौट रहे थे। उन्हें क्या पता था कि रास्ते में मौत घात लगाए बैठी है। उन्नाव के फ़तेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) के पास एक तेज़ रफ़्तार अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में ऐसी ज़ोरदार टक्कर मारी कि वो सड़क पर ही ढेर हो गए। ये टक्कर इतनी भीषण थी कि नरेश को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उनके जीवन की डोर वहीं टूट गई। सड़क पर पड़े नरेश को जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत की खबर सुनते ही पूरे परिवार में मातम छा गया।
नरेश अपने गांव में छोटी सी किराना की दुकान चलाते थे। इसी दुकान की कमाई से उनकी पत्नी सविता और दो बच्चे, 19 साल का बेटा अमन और 17 साल की बेटी खुशी, का गुज़ारा होता था।
नरेश अपने परिवार के लिए एक सहारा थे, एक मज़बूत कंधा जिस पर उनके पूरे परिवार का भविष्य टिका हुआ था। हर दिन की तरह, उस सोमवार को भी वह अपने काम से निकले थे, शायद कुछ ज़रूरी सामान लेने या किसी ग्राहक से मिलने।
रात ढल रही थी और वह घर पहुंचने की जल्दी में थे, जहां उनकी पत्नी और बच्चे उनका इंतज़ार कर रहे होंगे। लेकिन उनकी यह यात्रा अंतिम यात्रा बन गई।
घर वापसी का सफर बन गया अंतिम पड़ाव
रात के अंधेरे में, फ़तेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के करीब, नरेश की बाइक एक तेज़ रफ़्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आ गई। जिसने भी यह हादसा देखा, उसकी रूह काँप उठी।
टक्कर इतनी भयानक थी कि नरेश बाइक समेत सड़क पर जा गिरे और उन्हें गंभीर चोटें आईं। टक्कर मारने वाला वाहन चालक रुकने की बजाय, मौके से तेज़ी से फ़रार हो गया।
सड़क पर नरेश को बेसुध पड़ा देख आसपास के राहगीर तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने फौरन पुलिस को सूचना दी और जितनी जल्दी हो सका, घायल नरेश को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सर और शरीर पर लगी गहरी चोटों के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
ये ख़बर जब माथर गांव पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसर गया। नरेश की पत्नी सविता को जब ये पता चला कि उनके पति अब इस दुनिया में नहीं रहे, तो मानो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
बेटा अमन और बेटी खुशी अपने पिता के जाने की ख़बर सुनकर बेसुध हो गए। उनकी चीख़-पुकार से पूरा गांव गमगीन हो गया।
बच्चों को अभी तक यकीन नहीं हो रहा था कि जिस पिता ने उनके भविष्य के लिए इतने सपने देखे थे, वो अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। उनकी आवाज़ सुनकर हर आंख नम हो गई।
परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। अब उनके सामने सवाल था कि कौन उनका सहारा बनेगा, कौन उनके रोज़मर्रा के ख़र्चों को उठाएगा।
पुलिस की कार्रवाई और अज्ञात वाहन की तलाश
हादसे की सूचना मिलने पर फ़तेहपुर चौरासी थाने से पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का मुआयना किया और राहगीरों से जानकारी जुटाई।
बाद में, पुलिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर भी पहुंची, जहां उन्होंने नरेश के शव को कब्जे में लिया। कानूनी प्रक्रिया के तहत, पुलिस ने पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी की और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से चोटों की सही जानकारी मिलेगी और पुलिस को जांच में मदद मिलेगी।
पुलिस ने इस मामले में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस फ़रार वाहन चालक को ढूंढ निकालना है जिसने नरेश की जान ले ली और मौके से भाग निकला।
पुलिस टीम ने आसपास के क्षेत्रों से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इसके साथ ही, दुर्घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
उम्मीद है कि इन फुटेज से टक्कर मारने वाले वाहन की पहचान हो सकेगी और आरोपी को पकड़ा जा सकेगा। पुलिस का कहना है कि वे हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि इस जघन्य अपराध के दोषी को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके और नरेश के परिवार को न्याय मिल सके।
यह सिर्फ़ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों का टूटना है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। अब सभी को बस इस बात का इंतज़ार है कि पुलिस कब उस अज्ञात वाहन और उसके चालक तक पहुंच पाती है।

