कैमूर: बिहार के कैमूर जिले में दुर्गावती थाना, जो शांत स्वभाव के लिए नहीं बल्कि अपनी सीमाई पहचान के लिए जाना जाता है, अचानक खबरों में आ गया। वजह? खुद जिले के पुलिस कप्तान यानी एसपी शिखर चौधरी का एक ‘सरप्राइज विजिट’। जैसे ही एसपी साहब की गाड़ी थाने के गेट पर रुकी, पुलिस महकमे में मानों करंट दौड़ गया। लेकिन जो हकीकत सामने आई, वो थाने की दीवारों के पीछे सालों से जमी धूल से भी ज़्यादा गहरी और चिंताजनक थी। पता चला कि यहां जितने नए मामले दर्ज होते हैं, उनसे दस गुना ज़्यादा केस सालों से लंबित पड़े हैं। ये सुनकर आप सोचिए, आम जनता को न्याय के लिए कितना इंतजार करना पड़ रहा होगा!
एसपी शिखर चौधरी का यह औचक निरीक्षण सिर्फ रुटीन चेकअप नहीं था, बल्कि एक तरह से थाने की नब्ज टटोलने जैसा था। जब उन्होंने फाइलों का ढेर देखा और आंकड़ों पर नज़र डाली, तो उनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही थीं।
इतने बड़े पैमाने पर केसों का लंबित होना न सिर्फ पुलिस के काम पर सवाल उठाता है, बल्कि उन फरियादियों की उम्मीदों को भी तोड़ता है, जो न्याय की आस में थाने तक पहुंचते हैं। एक मामला दर्ज हुआ, तो दस पुराने मामले न्याय का इंतजार कर रहे थे – ये स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं मानी जा सकती।
पुलिस कप्तान ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाई और थानाध्यक्ष को सीधे-सीधे निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले छह महीने के अंदर लंबित मामलों की संख्या को कम करके सिर्फ तीन से चार गुना तक लाना होगा।
ये लक्ष्य आसान नहीं था, लेकिन एसपी की सख्ती बता रही थी कि वे किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त करने वाले नहीं थे। इसका मतलब था कि पुलिसकर्मियों को अपनी पुरानी फाइलों को खंगालना होगा, जांच में तेजी लानी होगी और ऐसे मामलों का निपटारा करना होगा, जो अब तक धूल फांक रहे थे।
सीमा पार शराब और बेसुध वायरलेस सिस्टम
निरीक्षण के दौरान सिर्फ केसों की पेंडेंसी ही इकलौती समस्या नहीं थी। कैमूर का दुर्गावती थाना उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है।
ऐसे सीमावर्ती इलाकों में आमतौर पर शराब तस्करी के मामले खूब सामने आते हैं, क्योंकि एक राज्य से दूसरे राज्य में आसानी से शराब की आवाजाही होती रहती है। बिहार में जहां शराबबंदी लागू है, वहां ऐसे थाना क्षेत्रों से अवैध शराब की बरामदगी की उम्मीद ज़्यादा होती है।
लेकिन एसपी साहब ने पाया कि दुर्गावती थाने में शराब की बरामदगी उम्मीद से काफी कम थी। इस पर भी उन्होंने थानाध्यक्ष को खूब खरी-खोटी सुनाई।
उनका साफ कहना था कि सीमा पर होने के बावजूद शराब की कम रिकवरी का मतलब है कि या तो तस्करी हो रही है और पुलिस इसे पकड़ नहीं पा रही, या फिर जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है, जो और भी गंभीर बात है।
इतना ही नहीं, थाने की वायरलेस व्यवस्था का हाल भी बेहाल मिला। पुलिस के लिए वायरलेस सिस्टम एक लाइफलाइन होता है, खासकर ऐसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में, जहां किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना का आदान-प्रदान बेहद ज़रूरी होता है।
वायरलेस व्यवस्था में लापरवाही का मतलब है कि पुलिस की ऑपरेशनल क्षमता पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे न सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिक्कत आती है, बल्कि किसी बड़ी घटना के वक्त त्वरित कार्रवाई करना भी मुश्किल हो जाता है। एसपी ने इस गंभीर चूक पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
जनता की शिकायतें और आगंतुक पंजी का हाल
एक पुलिस स्टेशन का सबसे महत्वपूर्ण काम होता है जनता की शिकायतों को सुनना और उन पर कार्रवाई करना। लेकिन दुर्गावती थाने में यह भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा।
एसपी ने पाया कि जनता द्वारा दिए गए आवेदनों और शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई, इसका कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड ही नहीं था। ये स्थिति सीधे-सीधे जनता के प्रति जवाबदेही की कमी दर्शाती है।
जब किसी शिकायत का रिकॉर्ड ही नहीं होगा, तो यह कैसे पता चलेगा कि उस पर कोई एक्शन लिया गया या नहीं? इससे आम आदमी का पुलिस पर से भरोसा उठना स्वाभाविक है।
इसके अलावा, आगंतुक पंजी यानी विजिटर रजिस्टर भी दुरुस्त नहीं पाया गया। विजिटर रजिस्टर थाने में आने वाले हर व्यक्ति का लेखा-जोखा रखता है, जिससे पता चलता है कि कौन कब और किस काम से आया।
इसका सही न होना दर्शाता है कि थाने में अनुशासन की कमी है और आने-जाने वालों पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही है, जो सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों के लिहाज़ से चिंताजनक है। एसपी शिखर चौधरी ने इस पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की और चेतावनी दी कि ऐसी लापरवाही आगे बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर भविष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाई गई, तो चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह चेतावनी पूरे जिले के पुलिस महकमे के लिए एक सख्त संदेश था।
दुर्गावती थाने के इस औचक निरीक्षण और एसपी की इस सख्त कार्रवाई के बाद कैमूर जिले के बाकी सभी थानों में भी हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि एसपी के इन कड़े निर्देशों का कितना असर होता है और कब तक दुर्गावती थाना लंबित केसों के बोझ से मुक्त हो पाता है और एक बेहतर पुलिसिंग की मिसाल कायम करता है।

