गोंडा: उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला। मंगलवार की शाम 7 बजे का वक्त। अचानक एक सरकारी चकमार्ग पर बुलडोजर की गड़गड़ाहट गूंज उठी। धूल का गुबार उठा और देखते ही देखते कई सालों से अवैध रूप से बने एक निर्माण को जमींदोज कर दिया गया। ये कोई मामूली अवैध कब्जा नहीं था, बल्कि नारायणपुर मर्दन ग्राम पंचायत के तिलक पुरवा में सरकारी रास्ते पर बनाई गई एक 'व्यास गद्दी' थी। सोचिए, जिस रास्ते से गांववालों को गुजरना होता है, वहां किसी ने धार्मिक बहाने से ही सही, लेकिन अपना अतिक्रमण जमा रखा था।
आप कहेंगे, इसमें नया क्या है? बुलडोजर तो चलते रहते हैं। लेकिन इस कार्रवाई के पीछे एक लंबी कहानी है, गांववालों की कई साल की परेशानी और प्रशासन की धैर्य की भी।
यह सिर्फ एक निर्माण को ढहाना नहीं था, बल्कि उन दर्जनों शिकायतों और कई बार दिए गए निर्देशों की भी प्रतिक्रिया थी, जिन्हें हवा में उड़ाया जा रहा था। जब प्रशासन का सब्र जवाब दे गया, तो फिर कानून का डंडा चला, और बुलडोजर ने अपना काम कर दिया।
गांववालों के लिए ये सिर्फ एक रास्ता नहीं था, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था, जिस पर "मेवा लाल सहित कुछ अन्य लोगों" ने अवैध कब्ज़ा जमा रखा था। इस कब्जे के चलते लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कत हो रही थी।
बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी, बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचने में अड़चन, और किसानों को अपने खेत तक जाने के लिए लंबा घूमकर जाना पड़ता था। यह सब सरकारी चकमार्ग पर कब्जा होने के कारण हो रहा था।
क्या था पूरा मामला और क्यों चली कार्रवाई?
मामला कर्नलगंज तहसील क्षेत्र का है, जहां नारायणपुर मर्दन ग्राम पंचायत के तिलक पुरवा में एक सरकारी चकमार्ग पर सालों से कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा था। इस पर एक 'व्यास गद्दी' बना ली गई थी।
अब आप पूछेंगे कि 'व्यास गद्दी' क्या होती है? आमतौर पर यह वह स्थान होता है जहां कोई विद्वान या संत बैठकर धार्मिक कथा सुनाते हैं या प्रवचन देते हैं। लेकिन यहां इसे सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से स्थापित किया गया था, जिससे साफ था कि इसका मकसद आस्था से ज्यादा जमीन पर कब्जा जमाना था।
इस अवैध कब्जे के कारण चकमार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया था और लोगों के लिए निकलना मुश्किल हो गया था।
गांव के निवासी राजेश कश्यप जैसे कई लोगों ने इस समस्या को लेकर लगातार अपनी आवाज उठाई। वे अपनी शिकायतों को लेकर कर्नलगंज तहसील दिवस में पहुंचे, अधिकारियों से मिले और अन्य माध्यमों से भी अपनी गुहार लगाते रहे।
उनकी मुख्य मांग यही थी कि सरकारी जमीन को खाली कराकर आम रास्ता बहाल किया जाए ताकि गांववालों को आने-जाने में सुविधा हो सके। इन शिकायतों का लगातार बढ़ता अंबार प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बन गया था।
शिकायतों का अंबार और प्रशासनिक चेतावनी
ऐसा नहीं है कि प्रशासन ने तुरंत ही बुलडोजर चला दिया। कर्नलगंज तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग ने पहले तो अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार निर्देश जारी किए।
मौखिक चेतावनियां दी गईं, फिर बाकायदा नोटिस भी भेजे गए। इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अगर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन अफसोस, इन सभी निर्देशों और चेतावनियों को अतिक्रमणकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्हें शायद लगा कि प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई कर रहा है और असल में कुछ करेगा नहीं।
उनकी यह गलतफहमी मंगलवार की शाम 7 बजे दूर हो गई, जब कार्रवाई करने के लिए बुलडोजर खुद मौके पर पहुंच गया।
अतिक्रमण हटाने के पीछे की मुख्य वजह यह भी थी कि यह रास्ता सिर्फ एक मोहल्ले के लोगों का नहीं था, बल्कि कई गांवों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण चकमार्ग था। ऐसे में इस पर कब्जा होने से व्यापक जनहित प्रभावित हो रहा था।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करना था कि सार्वजनिक संपत्ति पर किसी का निजी कब्जा न हो और आम जनता के अधिकार सुरक्षित रहें। इसीलिए इस मामले को इतनी गंभीरता से लिया गया और कई महीनों की मशक्कत के बाद आखिर ये कार्रवाई करनी पड़ी।
एसडीएम नेहा मिश्रा का सख्त रुख
कर्नलगंज की उपजिलाधिकारी (एसडीएम) नेहा मिश्रा ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि "सरकारी चकमार्ग की भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
" एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, "कई बार नोटिस देने के बावजूद जब कब्जा नहीं हटाया गया, तो बुलडोजर के माध्यम से कार्रवाई कर चकमार्ग को खाली कराया गया है।
"
एसडीएम नेहा मिश्रा ने भविष्य के लिए भी एक सख्त संदेश दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि "सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
" उनका यह बयान यह दर्शाता है कि गोंडा जिले में प्रशासन सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों को लेकर गंभीर है और आने वाले समय में भी ऐसी कार्रवाई जारी रह सकती है। यह उन सभी लोगों के लिए एक सीधी चेतावनी है जो सोचते हैं कि वे सरकारी जमीन पर कब्जा करके बच निकलेंगे।
अब नारायणपुर मर्दन के तिलक पुरवा में चकमार्ग साफ है, और गांववाले अपनी राह पर बिना किसी रुकावट के चल सकते हैं।


