गोंडा राशन कार्ड जांच: 7340 निरस्त कार्डों की पड़ताल; लखनऊ से पहुंची टीम
सारांश
गोंडा में खाद्य एवं रसद विभाग की 10 सदस्यीय टीम ने 7340 निरस्त राशन कार्डों की जांच शुरू की है; जानें किन जिलों के अधिकारी शामिल हैं और क्या है पूरा मामला।

गोंडा में खाद्य एवं रसद विभाग की 10 सदस्यीय टीम ने 7340 निरस्त राशन कार्डों की जांच शुरू की है; जानें किन जिलों के अधिकारी शामिल हैं और क्या है पूरा मामला।

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा में इस वक्त एक ऐसी जांच चल रही है, जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा रखा है। कहानी है हजारों राशन कार्डों की, जिनके निरस्त होने और फिर कुछ के दोबारा जारी होने की। बात इतनी बढ़ गई कि अब लखनऊ और अयोध्या से बड़े-बड़े अधिकारी गोंडा पहुंच चुके हैं, एक-एक कागज को खंगाल रहे हैं और पूछताछ का दौर चल रहा है। समझिए, मामला सिर्फ कागज पर कलम चलाने का नहीं, बल्कि सीधे आम आदमी के पेट से जुड़ा है, और जब इसमें गड़बड़ी की बू आती है, तो सरकार से लेकर जनता तक सब चौकन्ने हो जाते हैं।
पता चला है कि खाद्य एवं रसद विभाग की एक दस सदस्यीय टीम चुपचाप नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ बुधवार सुबह 11 बजे गोंडा पहुंची। सीधे देवीपाटन मंडल के उपायुक्त खाद्य कार्यालय में डेरा डाला और फिर शुरू हो गया आंकड़ों का महाभारत।
मामला करीब 7340 राशन कार्डों के आवेदनों का है, जिन्हें पिछले साल सितंबर से नवंबर के बीच जिला पूर्ति अधिकारी के पोर्टल से 'निरस्त' कर दिया गया था। अब ये जांचने के लिए टीम आई है कि भैया, ये कार्ड सही में निरस्त हुए थे या फिर नियमों को ताक पर रखकर कोई खेल चल रहा था?
इस पूरी जांच की जड़ में दो बड़ी बातें हैं। पहली तो यही कि आखिर इतने सारे राशन कार्ड क्यों निरस्त किए गए? क्या यह कानूनी रूप से सही था? और क्या सारे नियम-कायदों का पालन किया गया था या नहीं? अक्सर राशन कार्ड गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का सबसे जरूरी जरिया होता है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में कार्डों का निरस्त होना कई सवाल खड़े करता है।
दूसरी और शायद ज्यादा गंभीर बात ये है कि जांच टीम उन परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही है, जिनके तहत कुछ 'निरस्त' किए गए राशन कार्ड फिर से जारी हो गए। ये अपने आप में एक बड़ा पेंच है, जो सीधे-सीधे गड़बड़ी की तरफ इशारा करता है।
यानी, पहले किसी वजह से कार्ड रद्द हुए, फिर वही कार्ड दोबारा एक्टिव कैसे हो गए? इस पूरे खेल की परतें उधेड़ने के लिए लखनऊ और अयोध्या मंडल के संयुक्त खाद्य आयुक्त और उपायुक्त खाद्य जैसे बड़े अधिकारियों को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
गोंडा में पहुंची ये 10 सदस्यीय टीम कोई छोटी-मोटी मंडली नहीं है, बल्कि इसे पांच अलग-अलग कमेटियों में बांटा गया है। हर कमेटी में दो अधिकारी हैं और ये अधिकारी भी सिर्फ गोंडा के नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से बुलाए गए हैं ताकि जांच में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
इन टीमों में कौन-कौन शामिल हैं, जरा ये भी जान लीजिए:
इन सभी टीमों का गठन उपायुक्त अयोध्या मंडल नीरज कनौजिया और संयुक्त आयुक्त खाद्य लखनऊ मंडल पार्थ अच्युत ने मिलकर किया है। ये टीम गोंडा जिला पूर्ति अधिकारी कुंवर दिनेश प्रताप सिंह और अन्य पूर्ति निरीक्षकों से लगातार पूछताछ कर रही है, दस्तावेजों की जांच कर रही है और हर उस पहलू को समझने की कोशिश कर रही है, जहां गड़बड़ी की जरा भी गुंजाइश हो सकती है।
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका संज्ञान सीधे शासन स्तर से लिया गया है। यानी, राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरी जांच के आदेश दिए हैं।
आम तौर पर ऐसे छोटे-मोटे मामलों में इतनी बड़ी जांच टीम का आना और शासन स्तर से निगरानी होना ये बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली होने का शक है।
गोंडा के जिला पूर्ति अधिकारी कुंवर दिनेश प्रताप सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और विभाग द्वारा की गई सभी कार्रवाई नियमानुसार थी।
अब ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि उनकी बात में कितना दम है और इन 7340 राशन कार्डों के निरस्तीकरण और पुनः जारी होने के पीछे क्या कहानी छिपी है। देखना होगा कि ये जांच कितनी गहरी जाती है और इसकी आंच किस-किस तक पहुंचती है।
फिलहाल, गोंडा में हर तरफ इसी जांच की चर्चा है और लोग बड़ी बेसब्री से इसके नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
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