गोंडा ट्रक हादसा; सरिया लदा ट्रक पलटा; तीन मजदूरों की मौत; दो सगे भाई
सारांश
गोंडा में सरिया लदा ट्रक पलटने से भीषण हादसा। तीन मजदूरों की मौत, जिनमें दो सगे भाई थे। चार ने कूदकर बचाई जान। कैसे हुआ यह दिल दहला देने वाला हादसा, पढ़ें पूरी खबर।

गोंडा में सरिया लदा ट्रक पलटने से भीषण हादसा। तीन मजदूरों की मौत, जिनमें दो सगे भाई थे। चार ने कूदकर बचाई जान। कैसे हुआ यह दिल दहला देने वाला हादसा, पढ़ें पूरी खबर।

गोंडा: गोंडा जिले की सुबह हर दिन की तरह थी। मजदूर अपने काम पर निकले थे, पेट पालने की जद्दोजहद में। लेकिन वीरसिंहपुर में टेढ़ी नदी पर बन रहे पुल के लिए सरिये ले जा रहे एक ट्रक ने गुरुवार की सुबह करीब 9:30 बजे कई जिंदगियां पलट दीं। देहात कोतवाली इलाके के माधवपुर गांव के पास एक भयावह हादसा हुआ, जिसने तीन हंसती-खेलती जिंदगियों को पल भर में छीन लिया। ये सिर्फ एक ट्रक पलटने की खबर नहीं है, ये उन मजदूर परिवारों की चीख है, जिनका सहारा अचानक टूट गया। चार मजदूरों ने मौत को करीब से देखा और ट्रक से कूदकर अपनी जान बचाई, लेकिन तीन बदनसीब अपनी नियति से नहीं बच पाए।
गोंडा-बेलसर मार्ग पर सरिये से लदा ट्रक तेजी से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा था। ट्रक में सिर्फ लोहा ही नहीं था, कुछ मजदूर भी सवार थे।
शायद वे भी पुल निर्माण में ही लगे थे, या फिर काम की तलाश में उसी दिशा में जा रहे थे। सुबह का वक्त था, हल्की बारिश ने सड़क को और चिकना बना दिया था।
माधवपुर गांव के पास पहुंचते ही अचानक ट्रक चालक ने स्टीयरिंग से अपना नियंत्रण खो दिया। कोई समझ पाता, इससे पहले ही भारी-भरकम ट्रक सड़क की पटरी से नीचे उतर गया।
बारिश की वजह से मिट्टी गीली थी और ट्रक का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। एक चीख गूंजी और फिर जबरदस्त धमाका।
लोहे की सरिया से लदा ट्रक धड़ाम से पलट गया, खेत में जा गिरा।
माधवपुर गांव के लोगों ने जब अचानक ये शोर सुना, तो दौड़कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि लोहे की भारी सरियों के नीचे एक ट्रक बुरी तरह पलटा हुआ था।
कुछ लोग ट्रक से छलांग लगाते हुए दूर भाग रहे थे, उनके चेहरों पर खौफ साफ दिख रहा था। ये वो चार मजदूर थे जिन्होंने मौत को मात दी थी।
लेकिन कुछ लोग सरियों के मलबे में फंस चुके थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत देहात कोतवाली पुलिस को सूचना दी और एम्बुलेंस बुलाई गई।
पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया गया। पलटे हुए ट्रक और बिखरी सरियों के बीच फंसे लोगों को निकालना किसी चुनौती से कम नहीं था।
जब तक फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीन मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था।
पुलिस ने तुरंत तीनों मृत मजदूरों को गोंडा के अंबेडकर कॉलेज पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल का माहौल गमगीन था। वो मजदूर जो चंद घंटे पहले अपने घरों से निकले थे, अब बेजान पड़े थे।
यह हादसा सिर्फ एक घटना नहीं था, यह ग्रामीण इलाकों में दिहाड़ी मजदूरों के जीवन की कठोर सच्चाई को भी दर्शाता है। अक्सर काम की तलाश में या काम पर जाते हुए ऐसे असुरक्षित साधनों का सहारा लेना उनकी मजबूरी बन जाती है।
जिन तीन मजदूरों की इस भयानक हादसे में जान गई, उनमें रविंद्र पासवान (उम्र 31 साल), राजेंद्र पासवान (उम्र 42 साल) और रामगुलाम पासवान (उम्र 30 साल) शामिल थे। ये तीनों ही तरबगंज थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव के रहने वाले थे।
लेकिन इस खबर का सबसे दर्दनाक पहलू ये है कि रविंद्र और राजेंद्र पासवान दोनों सगे भाई थे। एक ही परिवार के दो बेटों का यूं एक साथ काल के गाल में समा जाना पूरे चांदपुर गांव के लिए एक असहनीय वज्रपात था।
उनके परिवार का क्या हाल होगा, ये सोचकर भी दिल दहल उठता है। वे सुबह गोंडा से ट्रक पर सरिया लादकर वीरसिंहपुर में बन रहे पुल के लिए जा रहे थे।
उनकी उम्मीदें उस पुल की तरह मजबूत होंगी, जिसके लिए वे सरिया ढो रहे थे, लेकिन नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।
गांव से निकलकर काम पर जाना और फिर कभी वापस न लौटना, ये उन अनगिनत मजदूरों की कहानी है जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर याद दिलाया है कि सड़कों पर सुरक्षा कितनी अहम है और कैसे एक छोटी सी चूक या लापरवाही कई परिवारों को तबाह कर सकती है।
स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच पड़ताल जारी है। चालक के बारे में अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है कि वो मौके से फरार हुआ या उसे हिरासत में लिया गया।
घायल मजदूरों के बारे में भी फिलहाल अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिन्होंने कूदकर अपनी जान बचाई।
यह घटना गोंडा ही नहीं, बल्कि आस-पास के पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। लोग इस दर्दनाक हादसे पर दुख व्यक्त कर रहे हैं।
जिस पुल के लिए ये सरिया ले जा रहे थे, वो शायद एक दिन बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन उन तीन जिंदगियों की कहानी हमेशा अधूरी रहेगी, जो इसे बनाने के सफर में ही थम गईं। बारिश में फिसली सड़क, बेकाबू स्टीयरिंग और एक ट्रक का पलट जाना.
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इसने तीन परिवारों की दुनिया को पलट कर रख दिया है।
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