लुधियाना: सियासी गलियारों में अक्सर ये कहा जाता है कि घर की लड़ाई सड़कों पर नहीं आनी चाहिए. लेकिन जब ये लड़ाई अंदरूनी बैठकों से निकलकर वायरल वीडियो का हिस्सा बन जाए, तब फिर बात कुछ और हो जाती है. पंजाब के लुधियाना में कांग्रेस पार्टी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. यहां फिरोजपुर रोड स्थित एक होटल में बुलाई गई कांग्रेस की एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो नेताओं के बीच जुबानी जंग इतनी तेज हो गई कि बात कहासुनी से बढ़कर गुस्से और नाराजगी तक पहुंच गई. एक ब्लॉक प्रधान तो भड़ककर मीटिंग छोड़कर बाहर निकल गए और संगठन की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने एक बार फिर जिला कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को सबके सामने ला दिया है.
मामला बीते दिन का है, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन संदीप संधू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का मकसद नीट परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को आ रही समस्याओं पर बात करना था.
मीटिंग में जिला और ब्लॉक स्तर के कई बड़े और छोटे नेता पहुंचे थे. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक माहौल में गर्माहट तब आ गई, जब हलका सेंट्रल के ब्लॉक प्रधान विपन अरोड़ा और जिला प्रधान संजय तलवाड़ के दफ्तर इंचार्ज बोबी के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई.
देखते ही देखते ये बहस तीखी होती चली गई और वहां मौजूद दूसरे नेताओं के लिए भी हालात संभालने मुश्किल हो गए.
क्यों शुरू हुआ हंगामा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस वैसे तो छात्रों के भविष्य से जुड़े एक गंभीर मुद्दे पर बुलाई गई थी, लेकिन नेताओं की अंदरूनी खींचतान ने इसे एक अलग ही मोड़ दे दिया. कैप्टन संदीप संधू के नेतृत्व में बुलाई गई इस बैठक में कांग्रेस के कई अहम चेहरे मौजूद थे.
अचानक हुए इस हंगामे ने सभी को चौंका दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बहस इतनी बढ़ गई कि माहौल में तनाव साफ महसूस किया जा सकता था.
विपन अरोड़ा ने बोबी को खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी. उनकी नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने सबके सामने ही बोबी से कहा, “आपसे एक ब्लॉक प्रधान नहीं संभाला जा रहा.
” यह कहकर उन्होंने संगठन के कामकाज पर सीधे सवाल उठा दिए.
इसके बाद मीटिंग में मौजूद अन्य कांग्रेस नेताओं ने बीच-बचाव करने की कोशिश की. उन्होंने दोनों पक्षों को शांत कराने और स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया.
हालांकि, विपन अरोड़ा का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वह कुछ ही देर में मीटिंग हॉल से बाहर निकल गए. बाहर खड़े पत्रकारों ने जब उनसे उनकी नाराजगी का कारण पूछा, तो विपन अरोड़ा ने बिना लाग-लपेट के अपनी भड़ास निकाली.
वायरल वीडियो और अरोड़ा का आरोप
जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें विपन अरोड़ा की नाराजगी साफ दिख रही है. वीडियो में उन्हें बोबी से तीखी बहस करते हुए देखा जा सकता है.
मीटिंग से बाहर आने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जिला नेतृत्व की ओर से कई बार कार्यक्रमों और बैठकों की जानकारी तक नहीं दी जाती. उनके मुताबिक, उन्हें कम से कम एक फोन करके तो बताया ही जाना चाहिए कि कोई मीटिंग या कार्यक्रम रखा गया है.
उनके इस बयान से यह बात साफ हो गई कि कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में समन्वय की कमी और आपसी मतभेद चरम पर हैं.
विपन अरोड़ा के इस बयान ने जिला कांग्रेस में चल रही आंतरिक कलह को फिर से हवा दे दी है. यह कोई पहली बार नहीं है, जब लुधियाना कांग्रेस में इस तरह की अंदरूनी खींचतान सामने आई हो.
अक्सर छोटे-मोटे कार्यक्रमों और बैठकों में नेताओं के बीच इस तरह की बहसबाजी या नाराजगी देखने को मिलती रहती है. लेकिन इस बार मामला प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसी सार्वजनिक जगह पर हुआ और ऊपर से इसका वीडियो भी वायरल हो गया, जिसने पूरे घटनाक्रम को एक अलग ही रंग दे दिया.
कांग्रेस में अंदरूनी कलह का पुराना किस्सा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं किसी भी पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं होतीं, खासकर तब जब पार्टी विपक्ष में हो और जनता के मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत हो. कांग्रेस पंजाब में अभी विपक्ष की भूमिका में है और उसे सरकार को घेरने के लिए मजबूती से सामने आना चाहिए.
लेकिन अगर पार्टी के भीतर ही नेताओं में तालमेल की कमी और आपसी गुटबाजी हावी रहेगी, तो जनता के बीच उसका संदेश कमजोर पड़ सकता है.
विपन अरोड़ा ने जो आरोप लगाए हैं कि उन्हें बैठकों की सूचना नहीं दी जाती, वे सीधे तौर पर पार्टी के सांगठनिक ढांचे पर सवाल खड़ा करते हैं. यह दर्शाता है कि जिला स्तर पर नेताओं के बीच संवादहीनता है और शायद कुछ नेता खुद को दूसरों से ज्यादा महत्वपूर्ण समझने लगे हैं.
यह स्थिति पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच भी गलत संदेश देती है.
फिलहाल, इस पूरे मामले पर लुधियाना कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता या जिला अध्यक्ष संजय तलवाड़ की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वीडियो वायरल होने और ब्लॉक प्रधान के सार्वजनिक बयान के बाद अब देखने वाली बात होगी कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस अंदरूनी कलह को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लग पाती है या नहीं.
यह घटना एक बार फिर यही दिखाती है कि कांग्रेस को न सिर्फ बाहरी चुनौतियों से निपटना है, बल्कि अपने घर को भी एकजुट रखना बड़ी चुनौती है.

