लुधियाना: अक्सर कहा जाता है कि मातम की पहचान खामोशी होती है, लेकिन पंजाब के लुधियाना में मुहर्रम के मौके पर जो कुछ हुआ, उसे देखकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं। इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मनाए जाने वाले इस शोक के दिन पर, लुधियाना की सड़कों पर एक अलग ही मंजर देखने को मिला। मुस्लिम युवा हाथों में तलवारें, लाठियां और डंडे लहरा रहे थे, डीजे पर 'मियां-मियां भाई' जैसे गाने बज रहे थे और इन सब पर युवा झूमकर डांस कर रहे थे। एक वीडियो वायरल हुआ तो पूरे पंजाब में ये चर्चा का विषय बन गया कि आखिर ये मुहर्रम है या कोई जश्न?
ये वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। इसमें साफ दिख रहा था कि कैसे कुछ लोग, जिन्हें मुहर्रम के पवित्र मौके पर शोक मनाना चाहिए था, वो फिल्मी गानों पर थिरक रहे थे और अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे।
इस नजारे ने पूरे मुस्लिम समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। इस घटना के बाद, पंजाब के शाही इमाम मोहम्मद उस्मान उर रहमानी लुधियानवी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने इस हरकत को 'हुड़दंग' और 'बेअदबी' करार दिया और खुलेआम कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
शोक के दिन जश्न का वीडियो वायरल
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे लुधियाना की सड़कों पर मुस्लिम युवकों का एक समूह इकट्ठा हुआ है। उनके हाथों में नुकीली तलवारें, मोटे डंडे और लाठियां हैं।
सड़क किनारे डीजे लगा है और उस पर तेजी से गाने बज रहे हैं। इनमें से एक गाना 'मियां-मियां भाई' भी था।
युवा इन्हीं गानों की धुन पर जमकर नाच रहे थे, हंस रहे थे और एक-दूसरे को जोश दिला रहे थे। इस पूरी घटना को देखकर लग रहा था जैसे कोई शादी या त्योहार का जश्न मनाया जा रहा हो, जबकि यह दिन कर्बला के शहीदों के बलिदान को याद करने और शोक मनाने का होता है।
यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और लोगों ने इसपर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई लोगों ने इसे मुहर्रम की मर्यादा का उल्लंघन बताया, तो कुछ ने इसे पूरी कौम के लिए शर्मनाक करार दिया।
शाही इमाम का कड़ा रुख: 'शर्म की बात है!'
इस पूरे मामले पर पंजाब के शाही इमाम मोहम्मद उस्मान उर रहमानी लुधियानवी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर इस घटना की निंदा की।
शाही इमाम ने साफ शब्दों में कहा, "मुहर्रम पर इस तरह का हुड़दंग व बेअदबी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
" उनकी नाराजगी यहीं नहीं थमी। उन्होंने तो देशभर के मुस्लिम नेताओं और उलेमाओं से अपील की है कि जहां-जहां मुहर्रम पर ऐसी घटनाएं हुई हैं, वहां के आयोजकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करवाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक हरकतें दोबारा न हों।
शाही इमाम मोहम्मद उस्मान उर रहमानी ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "मुस्लिमों के लिए यह शर्म की बात है। शोक वाले दिन पर जश्न मनाया जा रहा है।
शराब पी रहे हैं, सरे आम लाठियां, डंडे व तलवारें लहरा रहे हैं।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर हम अपनी ही कौम के लोगों को सही राह पर नहीं चला पाएंगे, तो गैर-मुस्लिमों को क्या जवाब देंगे? यह सवाल सिर्फ लुधियाना के मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
उलेमा की जिम्मेदारी और बेकाबू भीड़
शाही इमाम ने देश के सभी तबकों के उलेमाओं (इस्लामी विद्वानों) को संबोधित करते हुए उनकी जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुहर्रम का दिन निकल चुका है और सबने अपने-अपने तरीके से शहीदों को याद किया।
लेकिन अब मुहर्रम मनाने वालों पर किसी की निगरानी या कंट्रोल नहीं दिख रहा है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कही, "मैं मानता हूँ कि बहुत सी चीजें शरियत में लिखित रूप में नहीं होतीं।
जैसे अगर कोई जलसा होता है, तो यह शरियत में नहीं लिखा कि गेट पर कौन खड़ा होगा या मेहमानों को कौन रिसीव करेगा—यह एक प्रशासनिक व्यवस्था होती है जो हमें खुद बनानी पड़ती है।" उन्होंने सवाल उठाया कि उलेमा और जिम्मेदार लोग अपनी इस जिम्मेदारी से कैसे भाग सकते हैं? शाही इमाम के इस बयान से यह साफ होता है कि वे इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों की निष्क्रियता को भी दोषी ठहरा रहे हैं।
लुधियाना की जमीनी हकीकत बयां करते हुए शाही इमाम ने कहा कि मुहर्रम के मौके पर बहुत से लोग बेतरतीब तरीके से लाठी, डंडे और तलवारें लेकर सड़कों पर निकले। डीजे लगाकर गाने बजाए जा रहे थे, औरतें बेपर्दा गुजर रही थीं और सबसे ज्यादा शर्म की बात यह थी कि शराब के ठेकों पर ऐसे हुड़दंगियों की भीड़ लगी हुई थी।
उन्होंने इस दृश्य को 'शर्मनाक' बताते हुए कहा कि यह सब देखकर उनके सिर शर्म से झुक गए।
गैर-मुस्लिमों को क्या मुंह दिखाएंगे?
शाही इमाम ने एक भावुक अपील करते हुए कहा कि हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि जब गैर-मुस्लिम लोग हमसे पूछते हैं कि आज मुहर्रम का कौन सा दिन है, तो हम उन्हें क्या बताएं? क्या हम उन्हें यह बताएं कि आज हमारे धर्म में शहादत का दिन है, आज के दिन पैगंबर के बड़े घराने ने मानवता के लिए कुर्बानी दी थी? उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि एक तरफ यह इज्जत और शालीनता का दिन है, और दूसरी तरफ सड़कों पर यह तमाशा हो रहा है। शाही इमाम की यह बात समाज के हर उस वर्ग को झकझोरने वाली है, जो अपने त्योहारों और परंपराओं की गरिमा को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन की बात नहीं, बल्कि एक समुदाय की पहचान और सम्मान का भी सवाल है।
गलत काम करने वाले का हाथ पहले हम पकड़ेंगे
शाही इमाम मोहम्मद उस्मान उर रहमानी ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी साफ कर दिया कि अगर कोई मुसलमान गलत काम करेगा, तो उसका हाथ सबसे पहले हम ही पकड़ेंगे, कोई और नहीं पकड़ेगा। उन्होंने उन लोगों को चेतावनी दी जिन्होंने मुहर्रम के नाम पर 'पीपीणियां बजाईं, लाठियां भांजीं, नाचे-गाए और शराब पीकर मर्यादा तार-तार की', कि उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने देशभर के मुसलमानों से अपील की है कि जिन भी कमेटियों या लोगों ने इन कार्यक्रमों के लिए सरकारी परमिशन ली थी और ऐसी गतिविधियों को अंजाम दिया, उन सभी आयोजकों और हुड़दंगियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। शाही इमाम ने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक पर्व की मर्यादा का उल्लंघन न कर सके।
उनकी यह मांग यह दर्शाती है कि समाज के अंदर से ही ऐसे कुकृत्यों के खिलाफ आवाज उठनी चाहिए और उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

