मिडिल ईस्ट: सन्नाटा तो अभी दो महीने पहले ही पसरा था, लेकिन अब उस खामोशी को चीरते हुए फिर से जंग के बादल गहरा गए हैं। मिडिल ईस्ट की धरती पर एक बार फिर तबाही का वो मंजर लौट आया है, जिससे पूरी दुनिया सहम गई है। बात हो रही है अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से शुरू हुए तनाव की, जिसने महज कुछ घंटों में ही क्षेत्र में आग लगा दी है।
जी हां, आपने ठीक सुना! अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और भीषण सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। अमेरिका ने ईरान के कई तटीय शहरों पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए, जिसकी गूंज पूरे इलाके में सुनाई दी।
इस अमेरिकी बमबारी से ईरान का सबसे बड़ा पोर्ट सिटी, बंदर अब्बास, पूरी तरह से दहल उठा और कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। मंजर ऐसा था, जैसे कोई कयामत आ गई हो।
कहते हैं, वार का जवाब पलटवार से ही मिलता है। ठीक यही ईरान ने भी किया।
अमेरिका के इस बड़े अटैक से बौखलाए ईरान ने भी तुरंत अपनी मिसाइलों के मुंह खोल दिए। ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों वाले दो पड़ोसी देशों कुवैत और बहरीन पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों से भीषण हमला बोल दिया।
इस ताजा टकराव के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। तेल बाजार में भूचाल आ गया और कच्चे तेल की कीमतें तो रॉकेट की तरह आसमान छूने लगीं।
क्या यह एक नए महायुद्ध की शुरुआत है? ये सवाल हर किसी के मन में घूम रहा है।
अमेरिका ने कहाँ-कहाँ की बमबारी, मकसद क्या था?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले पर अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
मतलब साफ है, अमेरिका ने समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने का हवाला दिया है। अमेरिकी फाइटर जेट्स और मिसाइलों ने ईरान के दक्षिणी तट से लेकर ओमान की खाड़ी तक भारी तबाही मचाई।
अब जरा एक-एक करके उन जगहों पर नज़र डालते हैं, जो इस हमले का शिकार बनीं:
- बंदर अब्बास: ये ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह है। साथ ही, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का मुख्य नेवी बेस भी यहीं है। अमेरिकी हमले में ये शहर बुरी तरह दहल गया। कल्पना कीजिए, एक पोर्ट सिटी, जो अपनी रफ्तार के लिए जाना जाता है, पल भर में कैसे ठप्प पड़ गया होगा।
- चाबहार और कोनारक: भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट के पास भी अमेरिकी बम गिरे हैं। इस हमले में यहाँ मरीन ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर को निशाना बनाया गया, जिसके बाद पूरे शहर की बत्ती गुल हो गई। इस पोर्ट का भारत के व्यापारिक और सामरिक हितों से सीधा संबंध है, ऐसे में यहाँ हमला होना चिंता का विषय है।
- उत्तरी ईरान तक हमला: अमेरिका ने सिर्फ दक्षिणी ईरान को ही नहीं निशाना बनाया। उत्तरी ईरान के अक्काला शहर में एक रेलवे ब्रिज को भी बमबारी कर उड़ा दिया गया। यह बताता है कि अमेरिकी हमले की रेंज काफी व्यापक थी और ईरान के अलग-अलग हिस्सों को टारगेट किया गया।
ईरान ने पलटवार में किन देशों को बनाया निशाना?
अब बात ईरान के जवाब की। अमेरिका की इस भीषण बमबारी के जवाब में ईरान ने भी अपनी आक्रामक रणनीति अपनाई।
उसने अपनी मिसाइलों का रुख कुवैत और बहरीन की तरफ मोड़ दिया। क्यों? क्योंकि इन दोनों देशों में अमेरिका के बड़े मिलिट्री बेस मौजूद हैं।
ईरान का सीधा संदेश था, जहां से तुम हमें मारोगे, हम वहीं पर वार करेंगे।
कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम लगातार ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को आसमान में ही इंटरसेप्ट कर रहे थे।
सोचिए, एक रात में कितने मिसाइलें दागी गई होंगी और कैसे डिफेंस सिस्टम ने उन्हें नाकाम किया होगा! इसी गोलाबारी को देखते हुए पड़ोसी देश कतर ने भी कुछ समय के लिए देश में 'एलिवेटेड सिक्योरिटी थ्रेट' (बढ़े हुए सुरक्षा खतरे) की घोषणा कर दी थी। पूरा इलाका हाई अलर्ट पर आ गया था।
ट्रंप की सीधी धमकी: 'अंजाम बहुत बदतर होगा!'
इस महातबाही के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में मोर्चा संभाला। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है।
ट्रंप ने साफ-साफ लिखा, "यह ईरान द्वारा कल हमारे जहाजों पर किए गए हमले का करारा बदला है। अगर ईरान ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो अंजाम इससे भी कहीं ज्यादा बदतर और भयानक होगा!"
ट्रंप का यह बयान अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है। यह दिखाता है कि अमेरिका अपने "जैसे को तैसा" वाले रवैये पर कायम है और ईरान को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है।
नाटो समिट में भी ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते (MOU) को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी, जिसे उन्होंने अब पूरी तरह से खत्म कर दिया है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में तनाव फिर चरम पर है। कच्चे तेल के दाम चढ़ रहे हैं, बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और दुनिया एक बार फिर दो बड़ी शक्तियों के सीधे टकराव को देख रही है।
देखना होगा कि यह आग और कितनी दूर तक फैलती है और क्या इसके परिणाम सिर्फ क्षेत्र तक सीमित रहेंगे या फिर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेंगे?




































