मेरठ: भैया, घर में बिजली फिटिंग करवा रहे हो या कोई नया तार डालना है, तो सबसे पहले क्या देखते हो? यही न कि तार अच्छी कंपनी का हो, मजबूत हो और सबसे ज़रूरी, बिजली के खतरे से बचाए। लेकिन सोचिए, जिस कंपनी के भरोसे आप मोटी रकम खर्च कर रहे हैं, अगर उसी के नाम पर आपको घटिया, जानलेवा नकली तार चिपका दिए जाएं तो? मेरठ में कुछ ऐसा ही बड़ा खेल सामने आया है। मुंबई से आई एक प्राइवेट जासूस एजेंसी और पुलिस की टीम ने मिलकर ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बेचे जा रहे 12 लाख रुपये से ज़्यादा के नकली बिजली के तार पकड़े हैं। ये तार इतने शातिर तरीके से पैक किए गए थे कि आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना लगभग नामुमकिन था। इस गोरखधंधे में एक शख्स को मौके से दबोचा गया है, जिसके खिलाफ कॉपीराइट एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
मंगलवार की सुबह मेरठ के ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में अचानक हड़कंप मच गया जब पुलिस की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा। यहां ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर धड़ल्ले से नकली तारों का कारोबार चल रहा था।
टीम ने पांच बोरों में भरे कुल 351 बंडल बरामद किए, जिनमें पॉलीकैब, वी-गार्ड, क्रॉम्पटन, गोल्ड मेडल और एंकर जैसी बड़ी कंपनियों के नाम वाले नकली तार भरे थे। ये तार न सिर्फ ग्राहकों के साथ धोखा थे, बल्कि इनकी गुणवत्ता इतनी खराब थी कि ये कभी भी शॉर्ट सर्किट या आग का कारण बन सकते थे।
अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है ताकि इस तरह के जानलेवा कारोबार पर लगाम लगाई जा सके।
कैसे मुंबई की एजेंसी ने खोली नकली तारों की पोल?
इस पूरे मामले की शुरुआत मुंबई से हुई। दरअसल, मुंबई में आईपी इन्वेस्टिगेशन एंड डिटेक्टिव सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक जासूस एजेंसी है, जिसका काम ही बड़ी-बड़ी इलेक्ट्रिकल कंपनियों के नकली उत्पादों का पता लगाना है।
पैनासोनिक, वी-गार्ड, पॉलीकैब, क्रॉम्पटन, गोल्ड मेडल जैसी नामी कंपनियां इनकी क्लाइंट हैं। एजेंसी के फील्ड मैनेजर ललित कुमार बताते हैं कि उन्हें लगातार सूचना मिल रही थी कि मेरठ में इन ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली बिजली के तार बेचे जा रहे हैं।
ये जानकारी मिलते ही उनकी एजेंसी ने अपनी पड़ताल शुरू कर दी।
एजेंसी ने मेरठ में कई दिनों तक रेकी की और पुख्ता सबूत जुटाए। जब उन्हें यकीन हो गया कि यहां नकली तारों का एक बड़ा ठिकाना है, तो उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी टीपीनगर पुलिस को दी।
मंगलवार की सुबह पुलिस और एजेंसी की संयुक्त टीम ने ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में घेराबंदी की। छापा मारा गया और एक युवक बिजली के तारों के बंडलों के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
यह युवक कोई और नहीं, सरधना के खेड़ा गांव का रहने वाला मोहित शर्मा था, जो इस नकली तारों के खेल का एक अहम मोहरा था।
मोहित शर्मा: दिल्ली से मेरठ तक का खेल
पुलिस की पूछताछ में मोहित शर्मा ने जो कहानी बताई, वो चौंकाने वाली थी और दिखाती थी कि कैसे ये नकली सामान का कारोबार परवान चढ़ता है। मोहित के पास से कुल पांच बोरे बरामद हुए थे, जिनमें 351 बंडल नकली तार भरे थे।
इन बंडलों में गोल्ड मेडल के 69, वी-गार्ड के 71, पॉलीकैब के 74, क्रॉम्पटन के 66 और एंकर के 71 बंडल शामिल थे। ललित कुमार ने बताया कि इन तारों की पैकिंग बिल्कुल असली कंपनियों जैसी थी।
अगर आप ध्यान से न देखें, तो पहचान करना मुश्किल था कि ये नकली हैं।
मोहित ने पुलिस को बताया कि वह यह सारा नकली माल दिल्ली से खरीद कर लाता था। दिल्ली में उसे एक बंडल करीब 700 रुपए में पड़ता था।
वहीं से वह कंपनियों जैसे दिखने वाले खाली डिब्बे भी खरीद लेता था। इसके बाद यह सारा सामान मेरठ आता था, जहां इन्हीं खाली डिब्बों में नकली तारों की पैकिंग की जाती थी।
एक बार पैकिंग हो जाने के बाद, ये तार असली जैसे दिखने लगते थे। मोहित इन्हें अपने परिचित दुकानदारों को 1000 से 1200 रुपए प्रति बंडल में बेचता था।
और फिर ये दुकानदार भोले-भाले ग्राहकों को 2200 से 2300 रुपए तक में इन्हें चिपका देते थे। यानी, एक नकली बंडल पर ग्राहक से लगभग तीन गुना दाम वसूले जा रहे थे।
आईपी इन्वेस्टिगेशन एंड डिटेक्टिव सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की शिकायत के आधार पर, टीपीनगर थाने में मोहित शर्मा के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने बरामद सभी बोरों की सैंपलिंग की है और उन्हें सील करके अपने कब्जे में ले लिया है।
अब आगे की जांच चल रही है ताकि इस रैकेट के पीछे छिपे बड़े खिलाड़ियों को पकड़ा जा सके।
इसी इलाके से पहले भी पकड़ा गया था नकली सामान
ललित कुमार ने एक और हैरान कर देने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रांसपोर्ट नगर इलाके से नकली सामान पकड़ा गया हो।
अगस्त 2025 में भी इसी इलाके से ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली मिक्सर-ग्राइंडर बरामद किए गए थे। एक ही इलाके से बार-बार नकली सामान मिलने से यह साफ होता है कि यह जगह नकली उत्पादों के कारोबार का एक बड़ा केंद्र बनती जा रही है।
एजेंसी ने इस घटना के बाद आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। ललित कुमार का कहना है कि लोग कोई भी इलेक्ट्रिकल सामान खरीदते समय सावधानी बरतें।
दुकानदार से पक्का बिल लें और पैकिंग को ध्यान से देखें। कई बार नकली पैकिंग में मामूली अंतर होते हैं जो ध्यान देने पर पकड़ में आ सकते हैं।
नकली तारों का इस्तेमाल न सिर्फ पैसे की बर्बादी है, बल्कि ये घर में आग लगने या शॉर्ट सर्किट का बड़ा कारण भी बन सकते हैं, जिससे जान-माल दोनों का खतरा रहता है। पुलिस और जासूस एजेंसी की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि इस तरह के धोखेबाजों पर अंकुश लगेगा, लेकिन ग्राहकों को भी अपनी तरफ से पूरी तरह जागरूक रहना होगा।

