मेरठ: रविवार का दिन था और चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (CCSU) के मुख्य गेट पर अचानक शोर बढ़ गया। हाथों में तख्तियां, बुलंद आवाजें और चेहरे पर गुस्सा—ये मेरठ के उन युवाओं की भीड़ थी जो अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। मौका था कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान का, जिसके तहत एक विशाल 'छात्र आक्रोश मार्च' निकाला गया। इस मार्च का मकसद सिर्फ चलना नहीं था, बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को सड़क पर उतारना था।
इस पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व अभियान के शहर संयोजक अवनीश काजला और महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा कर रहे थे। मार्च की शुरुआत विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से हुई, जहाँ से युवा तेजगढ़ी की ओर बढ़े और फिर वापस यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचे।
पूरे रास्ते सिर्फ एक ही गूंज थी—केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध। छात्र इस बात से नाराज थे कि जिस उम्र में उन्हें करियर बनाना चाहिए, उस समय वे पेपर लीक और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
नारेबाजी के दौरान माहौल काफी गरमाया हुआ था। प्रदर्शनकारियों की मांग सीधी और स्पष्ट थी—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
छात्रों का कहना था कि जब तक पेपर लीक जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता और युवाओं को रोजगार नहीं मिलता, उनका यह विरोध जारी रहेगा। 'शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ' के नारों के साथ युवाओं ने अपनी पीड़ा को शब्दों में पिरोकर सरकार के सामने रखा।
शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी पर सवाल
मार्च के बाद जब अवनीश काजला ने छात्रों को संबोधित किया, तो उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर कड़े सवाल उठाए। काजला ने कहा कि आज का युवा मानसिक तनाव में है क्योंकि मेहनत के बाद भी पेपर लीक हो जाते हैं और अवसर छीन लिए जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने में पूरी तरह विफल रही है। उनके मुताबिक, 'छात्रों की गूंज' अभियान कोई राजनीतिक रैलियां मात्र नहीं है, बल्कि यह उन हजारों छात्रों की आवाज है जिन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है।
अवनीश काजला ने इस अभियान की सफलता का दावा करते हुए बताया कि मेरठ में युवाओं का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक करीब सात हजार छात्र इस अभियान से जुड़ चुके हैं।
उनका लक्ष्य बड़ा है; उन्हें भरोसा है कि 9 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान के दौरान जिले के लाखों छात्र-युवा इस लड़ाई का हिस्सा बनेंगे और अपने हक के लिए आवाज उठाएंगे।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे
इस आक्रोश मार्च में सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के कई दिग्गज कार्यकर्ता भी नजर आए। भीड़ में जाहिद अंसारी, धूम सिंह गुर्जर, हेमंत प्रधान, अल्तमस त्यागी, सुमित विकल, सहरयाब मुखिया और संजय कटारिया जैसे लोग शामिल थे।
इनके अलावा राज केशरी, विनोद सोनकर, रवि कुमार, रीना शर्मा और मुस्ताजब चौधरी ने भी युवाओं का साथ दिया।
मार्च में अजीम प्रधान, सरताज चौधरी, राहत चौहान, यूसुफ अंसारी, इकराम चौधरी, दिनेश उपाध्याय, राजेंद्र जाटव, शिवकुमार शर्मा, विकास शर्मा, सोनम रानी, बबली देवी, अनिल प्रेमी, नसीम राजपूत, निशांत तोमर, शहबाज अली, इकरामुद्दीन अंसारी, हिमांशु शर्मा, जितेंद्र भारद्वाज, प्रवीण कुमार, अवधेश सक्सेना, मुजाहिद और यासिर सैफी समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी का एक ही मकसद था कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार करे।




































