मेरठ: कल्पना कीजिए कि जेल की कड़ी सुरक्षा, ऊँची दीवारें और चारों तरफ तैनात गार्ड्स के बीच एक बंदी की गर्दन पर नुकीले हथियार से हमला कर दिया जाता है। यह कोई फिल्म का सीन नहीं, बल्कि मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार की हकीकत है। रविवार को जेल के अंदर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब दो बंदियों के गुटों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात खून-खराबे तक पहुँच गई।
घटना उस समय की है जब जेल प्रशासन की निगरानी में कुछ बंदी परिसर के खेतों में काम कर रहे थे। काम के दौरान ही दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई।
बहस इतनी बढ़ी कि मामला हाथापाई तक पहुँच गया। इसी खींचतान के बीच एक बंदी ने दूसरे बंदी, जिसका नाम मोजा है, की गर्दन पर किसी नुकीली वस्तु से जोरदार वार कर दिया।
हमला इतना घातक था कि मोजा की गर्दन की नस कट गई और मौके पर ही काफी खून बह गया।
विवाद और हमले का घटनाक्रम
जैसे ही हमला हुआ, वहां मौजूद अन्य बंदी चिल्लाने लगे और शोर सुनकर जेलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर दोनों गुटों को अलग किया और घायल बंदी को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए जेल के अस्पताल ले जाया गया।
लेकिन गर्दन की नस कटने की वजह से खून का बहाव नहीं रुक रहा था और हालत बिगड़ती जा रही थी।
जेल अस्पताल के डॉक्टरों ने जब देखा कि स्थिति गंभीर है, तो आनन-फानन में मोजा को मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। फिलहाल वह डॉक्टरों की निगरानी में है और उसका इलाज चल रहा है।
इस पूरी घटना ने जेल के अंदर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जेल के अंदर नुकीली वस्तु पहुंची कैसे? जिला कारागार जैसे संवेदनशील इलाके में जहां हर बंदी की तलाशी ली जाती है और नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं, वहां एक घातक हथियार का होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है।
सूत्रों की मानें तो इस घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। आनन-फानन में संबंधित बैरकों की सघन तलाशी शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि और भी ऐसी कोई प्रतिबंधित वस्तु अंदर तो नहीं है।
प्रशासन अब उस नुकीली वस्तु की तलाश कर रहा है जिससे हमला किया गया।
जेल प्रशासन की ओर से अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विवाद की असली वजह क्या थी और सुरक्षा में चूक कहां हुई।
फिलहाल, घायल बंदी के इलाज के साथ-साथ जेल के अंदर तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।




































