देशभर: ज़रा सोचिए, कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में आग लगाए हुए है, उसकी कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन हमारे देश के तेल और गैस स्टॉक्स (शेयर) धड़ल्ले से ऊपर चढ़ रहे हैं। ये सुनकर थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन बीते गुरुवार को यही हुआ। एक तरफ दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाज़ार में तेल और गैस कंपनियों के शेयरों में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला।
इस उछाल का आलम ये था कि निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स करीब 1% ऊपर चढ़ गया। ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, क्योंकि आमतौर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर दबाव आता है, लेकिन यहाँ कहानी कुछ और ही दिख रही थी।
किस-किस शेयर ने मचाया धमाल?
गुरुवार को अगर आप निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स को देखें, तो कई बड़े खिलाड़ी मैदान में उतरे और खूब रन बटोरे। टॉप पर रहा महानगर गैस, जिसने अकेले करीब 3% की तेज़ी दिखाई।
यानी, निवेशकों ने इस कंपनी पर खूब भरोसा जताया।
महानगर गैस के बाद एक लंबी लिस्ट है, जिसमें पेट्रोनेट LNG, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंद्रप्रस्थ गैस, GAIL (इंडिया), अडानी टोटल गैस, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन सभी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 1% से ज़्यादा का उछाल देखने को मिला।
ये अपने आप में बताता है कि बाज़ार में इन कंपनियों को लेकर एक पॉजिटिव माहौल बना हुआ था।
कच्चा तेल क्यों उबाल मार रहा है?
अब सवाल ये उठता है कि जब तेल और गैस शेयरों में तेज़ी आई, तो कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं? दरअसल, इसकी वजह है अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और कुछ तनाव भरे हालात। यूएस ने ईरान पर फिर से हमले किए हैं, जिसके बाद होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह से फिर से खुलने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं।
ये होर्मुज स्ट्रेट क्या बला है? ये एक बेहद ज़रूरी समुद्री रास्ता है, जिसके ज़रिए दुनिया भर में करीब पाँचवाँ हिस्सा तेल सप्लाई होता है। आप समझ सकते हैं कि अगर ये रास्ता बाधित होता है या इसमें कोई भी रुकावट आती है, तो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है।
इसी डर से कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज़ी आई।
ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.15% बढ़कर 78.92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गए। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स भी 1.22% की तेज़ी के साथ 74.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे थे।
ये कीमतें साफ़ बताती हैं कि ग्लोबल मार्केट में एनर्जी को लेकर कितना तनाव है।
आगे क्या होगा? कंपनियों का हाल कैसा रहेगा?
यूएस और ईरान के बीच चल रहे इस तनाव ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार ऊंची और अस्थिर बनी हुई हैं।
ऐसे में, तेल और गैस कंपनियों के लिए आने वाली तिमाही यानी FY27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे मिले-जुले रहने की उम्मीद है। कुछ कंपनियों को फायदा होगा, तो कुछ को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
मिंट की एक खबर के मुताबिक, अप्रैल और मई में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को इन्वेंट्री और मार्केटिंग में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर उनके Q1 नतीजों पर दिखेगा।
क्योंकि जब वे महंगा तेल खरीदती हैं और उसे बाज़ार में एक निश्चित दाम पर बेचती हैं, तो उनके मुनाफे पर चोट पड़ती है।
लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है। एनालिस्ट्स का मानना है कि जो अपस्ट्रीम कंपनियाँ हैं, यानी जो कच्चा तेल और नैचुरल गैस निकालती हैं, उन्हें ऊंची कीमतों से फ़ायदा होने वाला है।
उनके लिए "मज़बूत रियलाइजेशन" मिलेगा, जिससे तिमाही के दौरान उनके EBITDA (अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन) में साल-दर-साल अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
किस कंपनी पर क्या है ब्रोकरेज फर्म की राय?
अब बात करते हैं कि ब्रोकरेज फर्म्स इस पूरे खेल को कैसे देख रही हैं और उनकी क्या राय है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ (Kotak Institutional Equities) ने अपनी रिपोर्ट में कई कंपनियों के भविष्य को लेकर कुछ अनुमान लगाए हैं।
कोटक को उम्मीद है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का कंसोलिडेटेड EBITDA (कुल मुनाफा) सालाना आधार पर 8.4% और पिछली तिमाही के मुकाबले 5.4% बढ़ेगा। इसकी मुख्य वजह उनका O2C (ऑयल टू केमिकल) बिजनेस होगा, जिसने अच्छा प्रदर्शन किया है।
इसके अलावा, ब्रोकरेज फर्म को GAIL इंडिया के लिए भी अच्छे नतीजों की उम्मीद है। GAIL गैस पाइपलाइन और डिस्ट्रीब्यूशन के बिजनेस में है, और माना जा रहा है कि उसका प्रदर्शन शानदार रहेगा।
वहीं, पेट्रोनेट LNG के लिए उम्मीद है कि वह होर्मुज स्ट्रेट की रुकावट के बावजूद ज़्यादा स्पॉट वॉल्यूम से कुछ भरपाई कर पाएगी।
हालांकि, सभी कंपनियों के लिए तस्वीर एक जैसी नहीं है। कोटक का अनुमान है कि इंद्रप्रस्थ गैस और महानगर गैस के लिए Q1 के नतीजे थोड़े कमज़ोर रह सकते हैं।
इसकी वजह यह है कि Q1 में कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा असर शायद अभी तक इन कंपनियों के नतीजों में नहीं दिखा है।
कुल मिलाकर, तेल और गैस सेक्टर इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू बाज़ार की डिमांड, ये सब मिलकर इस सेक्टर का भविष्य तय करेंगे।
निवेशकों की नज़रें इन सभी घटनाक्रमों पर बनी हुई हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है।


































