वाराणसी: देर रात जब शहर गहरी नींद में सो रहा था और पिंडरा बाजार की सड़कें सन्नाटे में डूबी थीं, तभी एक ट्रैक्टर ने इस शांति को चीरते हुए एक पुरानी और प्रतिष्ठित दुकान पर हमला बोल दिया। यह कोई चोरी या डकैती नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित तोड़फोड़ थी जिसने पूरे बाजार को हिलाकर रख दिया। सोमवार की रात करीब सवा दो बजे का वक्त था, जब एक युवक ने ट्रैक्टर के साथ मिलकर चौधरी बुक डिपो को मिनटों में तहस-नहस कर दिया। उसके साथ बाइक पर आए दो और लोग भी थे, जिनके चेहरे गमछे से ढके थे। इस घटना ने सिर्फ दुकान मालिक को नहीं, बल्कि पूरे वाराणसी के व्यापारियों को झकझोर दिया है, और अब पूरा पिंडरा बाजार आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बंद पड़ा है।
पिंडरा बाजार का चौधरी बुक डिपो, जो सिर्फ एक स्टेशनरी की दुकान नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों की मेहनत और भरोसे का प्रतीक है, उस पर हुए इस हमले ने व्यापारियों के मन में डर और गुस्सा भर दिया है। सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई तस्वीरें विचलित करने वाली हैं।
रात के अंधेरे में एक अकेला ट्रैक्टर, जिसके पीछे एक अज्ञात शख्स बैठा है, दुकान के सामने आता है। फिर जो होता है, वो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता।
यह घटना वाराणसी में सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। आखिर कैसे कोई इतनी बेखौफ होकर बाजार के ठीक बीचोंबीच इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती?
रात के सन्नाटे में बेरहमी से हमला: सीसीटीवी फुटेज का खुलासा
मामले की गंभीरता को तब समझा जा सकता है, जब सीसीटीवी फुटेज की परतें खुलती हैं। फुटेज बताता है कि यह घटना मंगलवार की सुबह से ठीक पहले, सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 2 बजकर 25 मिनट पर हुई।
एक युवक, जो बाद में इस पूरी साजिश का मुख्य चेहरा प्रतीत होता है, एक ट्रैक्टर लेकर चौधरी बुक डिपो के सामने पहुंचता है। उसकी मंशा साफ थी — तबाही मचाना।
उसने बिना किसी झिझक के ट्रैक्टर से दुकान के मुख्य शटर पर जोरदार टक्कर मारी। लोहे का मजबूत शटर गड़गड़ा कर टूट जाता है, मानो वह कागज का बना हो।
एक बार शटर टूट जाने के बाद, युवक और भी ज्यादा बेखौफ हो जाता है। वह ट्रैक्टर को दुकान के अंदर तक ले जाने की कोशिश करता है और अंदर रखे फर्नीचर, रैक और किताबों को रौंदता चला जाता है।
किताबों के ढेर, कॉपी-किताबें, बच्चों के खिलौने – सब कुछ ट्रैक्टर के भारी-भरकम पहियों के नीचे कुचला जा रहा था। इस पूरी घटना के दौरान, दो और युवक एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां पहुंचते हैं।
उन्होंने अपने चेहरे गमछे से ढके हुए थे, ताकि उनकी पहचान न हो सके। ये दोनों भी इस तोड़फोड़ में शामिल दिखते हैं, या कम से कम वारदात को अंजाम देने वाले को कवर दे रहे थे।
कुछ मिनटों में ही उन्होंने दुकान को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर मौका-ए-वारदात से फरार हो गए, रात के अंधेरे में गायब हो गए, जैसे कभी आए ही न हों। पीछे छोड़ गए एक बर्बाद दुकान, हजारों का नुकसान और व्यापारियों के दिल में डर का सैलाब।
व्यापारियों का आक्रोश: बंद हुआ पूरा पिंडरा बाजार
सुबह जब लोगों को इस वारदात का पता चला, तो पूरे पिंडरा बाजार में मातम और गुस्से का माहौल छा गया। दुकान मालिक त्रिलोकी नाथ चौरसिया ने जब अपनी दुकान की यह हालत देखी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के व्यापारी भी जमा हो गए। सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
व्यापारियों ने तुरंत फैसला लिया कि वे इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे। मंगलवार को पिंडरा बाजार की 500 से ज्यादा दुकानें बंद कर दी गईं।
बाजार पूरी तरह से बंद रहा, सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन यह सन्नाटा खामोशी का नहीं, बल्कि विरोध और आक्रोश का था।
व्यापार मंडल के पदाधिकारी पिंटू जायसवाल ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे "शर्मनाक" बताया। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जायसवाल ने सीधे-सीधे चेतावनी भी दी। उनका कहना था, "यदि आरोपी पकड़े नहीं जाते हैं, तो व्यापारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
" यह सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि व्यापारियों के सामूहिक रोष का प्रदर्शन था। उनका साफ कहना था कि अगर अपराधियों पर लगाम नहीं कसी गई, तो वे अपनी दुकानें और अपना जीवन कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे? यह सिर्फ चौधरी बुक डिपो पर हमला नहीं था, बल्कि पूरे व्यापारिक समुदाय की सुरक्षा पर हमला था।
पीढ़ियों की विरासत पर हमला: एक परिवार का दर्द
चौधरी बुक डिपो सिर्फ एक दुकान नहीं है, यह एक चलती-फिरती विरासत है। दुकान के वर्तमान संचालक, त्रिलोकी नाथ चौरसिया, ने बताया कि यह दुकान उनके दादा चौधरी चौरसिया ने शुरू की थी।
सोचिए, एक ऐसी दुकान जो आपके दादा ने अपने खून-पसीने से बनाई हो, फिर आपके पिता हरि लाल चौरसिया ने उसे आगे बढ़ाया हो, और अब आप उसे चला रहे हों – ऐसी दुकान जब मिनटों में बर्बाद हो जाए, तो दिल पर क्या गुजरती होगी। त्रिलोकी नाथ चौरसिया रोज की तरह सोमवार रात को अपनी दुकान बंद कर घर चले गए थे, इस उम्मीद में कि सुबह सब ठीक मिलेगा।
लेकिन सुबह उनके सामने जो मंजर था, वह किसी बुरे सपने से कम नहीं था।
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति या एक परिवार का नुकसान नहीं है, यह पूरे बाजार और उसकी ऐतिहासिक पहचान पर एक चोट है। चौधरी बुक डिपो दशकों से पिंडरा बाजार का एक जाना-पहचाना नाम रहा है।
कई पीढ़ियों के बच्चों ने यहां से अपनी किताबें और स्टेशनरी खरीदी है। इस दुकान का टूटना, इस बाजार के एक हिस्से का टूटना है।
पुलिस की रात्रि गश्त पर गंभीर सवाल
इस पूरी वारदात ने पुलिस की रात्रि गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों का साफ कहना है कि बाजार के ठीक बीचोंबीच, जहां इतनी चहल-पहल रहती है, वहां देर रात ऐसी बड़ी घटना हो जाना पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है।
अगर रात में पुलिस गश्त सही तरीके से हो रही होती, तो इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना शायद मुमकिन न हो पाता। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। पिंडरा बाजार के व्यापारी अब पुलिस प्रशासन से जवाब और कार्रवाई दोनों चाहते हैं।
उनका यह भी कहना है कि जब तक आरोपी पकड़े नहीं जाते, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है। यह देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है, क्योंकि इस घटना ने सिर्फ एक दुकान को नहीं तोड़ा, बल्कि व्यापारियों के विश्वास को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।

