वाराणसी: काशी, वो शहर जिसका नाम सुनते ही धर्म, संस्कृति और गंगा किनारे की आध्यात्मिकता मन में उतर आती है। लेकिन इसी ऐतिहासिक शहर के वार्ड-59 रमरेपुर के लोगों के लिए आज विकास के मायने सिर्फ टूटी सड़कें, कीड़े वाला पानी और उफनते सीवर तक सिमट गए हैं। यहां के रहवासियों का आरोप है कि 'विकास' शब्द बस चुनाव के पर्चों और भाषणों तक ही सीमित रह गया है, हकीकत में तो नगर निगम ने जहां पानी तक नहीं दिया, वहां भी टैक्स के बिल थमा दिए हैं।
हमारे संवाददाता जब वार्ड-59 की 'वार्ड परिक्रमा' के दौरान वहां पहुंचे, तो जो तस्वीरें सामने आईं, वो हैरान करने वाली थीं। एक तरफ कुबेर नगर और रमरेपुर के लोग सीवर लाइन बिछाने के नाम पर महीनों से खुदी पड़ी सड़कों से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ छोटा लालपुर में नल से गंदा और कीड़े वाला पानी आ रहा है।
रात में जोशी जी का बगीचा जैसी कई कॉलोनियां स्ट्रीट लाइट के अभाव में अंधेरे में डूबी रहती हैं, जिससे महिलाएं और बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं। लोगों का कहना है कि समस्या नई नहीं है, लेकिन समाधान की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा।
खुदी सड़कें, उफनते सीवर: विकास की राह में रोड़ा
रमरेपुर मोहल्ले में अगर आप निकलेंगे, तो आपको लगेगा जैसे कोई बड़ा कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है, लेकिन हकीकत में ये काम तीन महीने पहले शुरू हुआ था, और तब से सड़कें खोदकर यूं ही छोड़ दी गई हैं। सीवर लाइन डालने के लिए जो सड़कें खोदी गईं, वो आज तक बनी नहीं हैं।
बारिश से पहले यहां के लोगों के लिए ये मुसीबत का सबब बन चुका है। पैदल चलना तो दूर, गाड़ियों का निकलना भी दूभर है।
कई घरों में तो सीवर का पानी बैक मारकर अंदर तक घुसने लगा है, जिससे बदबू और बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। इन बड़े-बड़े गड्ढों की वजह से आए दिन छोटे-मोटे हादसे होते रहते हैं, और लोग अब बारिश के आने से पहले ही डरे हुए हैं कि पता नहीं हालात और कितने बिगड़ेंगे।
साफ पानी का सपना, टैक्स का बिल सच
सोचिए, आपको पानी न मिले और फिर भी उसका टैक्स चुकाना पड़े? वार्ड-59 के कुबेर नगर और जोशी जी का बगीचा जैसी कई कॉलोनियों में नगर निगम की पेयजल लाइन आज तक नहीं पहुंची है। यानी यहां के लोगों को सरकार की तरफ से साफ पानी नसीब नहीं है।
बावजूद इसके, उनके घरों में धड़ाधड़ वाटर टैक्स के बिल भेजे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तो सरासर नाइंसाफी है।
मिथलेश्वरी दुबे नाम की एक निवासी ने बताया, "हमारी कॉलोनी दस साल पुरानी हो चुकी है, न स्ट्रीट लाइट है और न पेयजल लाइन। लेकिन टैक्स का बिल हर महीने आ जाता है।
" कई लोगों को तो नगर निगम के चक्कर काटकर आपत्ति दर्ज करानी पड़ी, तब जाकर उनका टैक्स हटवाया जा सका, लेकिन यह कितनी लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है, यह वही जानते हैं जो इससे गुजरे हैं।
और जहां पानी आता भी है, वहां की कहानी और भी डरावनी है। छोटा लालपुर समेत वार्ड के कई इलाकों में नल से जो पानी आता है, वो बदबूदार, गंदा और कीड़ेयुक्त होता है।
अनीता देवी ने बताया, "दस साल में कुछ विकास तो हुआ, लेकिन पेयजल की समस्या आज भी वैसी ही है।" मजबूरी में लोग आरओ लगवाकर, सबमर्सिबल का इस्तेमाल करके या फिर पैसे खर्च करके पानी खरीदकर पी रहे हैं।
ऐसे में बीमारियों का खतरा तो बना ही रहता है। डॉक्टर भी चेतावनी देते हैं कि ऐसा पानी पीने से पेट की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन इस तरफ आंखें मूंदे बैठा है।
अंधेरे में डूबे मोहल्ले: स्ट्रीट लाइट का इंतजार
रात के समय वार्ड-59 के जोशी जी का बगीचा और कुबेर नगर जैसी कॉलोनियों में अंधेरा गहरा जाता है। यहां स्ट्रीट लाइट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
इक्का-दुक्का जो लाइटें लगी भी हैं, वो अक्सर खराब रहती हैं या फिर उनकी रोशनी इतनी कम है कि उनसे कोई फायदा नहीं होता। लोगों ने बताया कि शाम ढलते ही यहां अंधेरा हो जाता है, जिससे महिलाओं और बच्चों को घर से बाहर निकलने में डर लगता है।
चोरी-चकारी का खतरा भी बना रहता है और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। अंधेरे के कारण सड़कों पर बने गड्ढे और भी खतरनाक हो जाते हैं, जिससे गिरने-पड़ने का डर लगा रहता है।
इस सुरक्षा के अभाव में जीना यहां के लोगों की नियति बन गई है।
पार्षद की गैर-मौजूदगी: शिकायतों का अंबार
वार्ड-59 के निवासियों की सबसे बड़ी शिकायत अपने चुने हुए पार्षद से है। लोगों का कहना है कि जब से चुनाव जीते हैं, पार्षद साहब कभी मोहल्ले का हाल जानने नहीं आते।
शिकायतें लेकर जाएं तो कोई सुनवाई नहीं होती। लोगों का आरोप है कि पार्षद के घर और उनके आसपास की सड़कें भले ही चमचमा रही हों, लेकिन बाकी वार्ड की हालत बद से बदतर है।
मिथिलेश्वरी दुबे ने सीधे आरोप लगाया, "पार्षद कभी मोहल्ले में नहीं आते।" अनीता देवी ने भी यही बात दोहराई।
उनकी गैर-मौजूदगी में समस्याओं का अंबार लगता जा रहा है और लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन न तो समस्याओं का कोई स्थायी समाधान निकला और न ही पार्षद ने उनकी सुध ली।
यह स्थिति वार्ड के लोगों के लिए बेहद निराशाजनक है, जो हर चुनाव में विकास के सपने देखते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है।

