वाराणसी: पूर्वी उत्तर प्रदेश के दिल, धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी में आजकल मौसम का मिजाज कुछ ऐसा बना हुआ है कि धूप और उमस के बीच सांस लेना भी भारी पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से आसमान में बादलों की आवाजाही तो दिख रही है, लेकिन वो सिर्फ उम्मीदें जगाकर बिना बरसे ही लौट जाते हैं। ऐसे में गंगा घाटों से लेकर गलियों तक, हर कोई बेचैन निगाहों से बस एक ही चीज़ का इंतज़ार कर रहा है – मानसून की जोरदार एंट्री का। हालांकि, आज तापमान में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन उमस का असर जस का तस बना हुआ है, मानो आसमान ने ठान लिया हो कि राहत देगा तो पूरी, वरना नहीं।
मौसम विभाग से मिली ताज़ा जानकारी बताती है कि अब यह इंतज़ार बहुत लंबा नहीं चलेगा। यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र ने साफ कर दिया है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर, यानी बहुत जल्द ही, मानसून पूर्वी उत्तर प्रदेश के दरवाज़े खटखटाने वाला है।
लेकिन ये भी सच है कि पिछले तीन-चार दिनों से मानसून की चाल कुछ धीमी पड़ी हुई है। वो बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर आकर अटक सा गया है, जैसे किसी महत्वपूर्ण फैसले से पहले ठहर गया हो।
इसी ठहराव का नतीजा है कि वाराणसी और इसके आस-पास के ज़िलों में लोग उमस भरी गर्मी से बुरी तरह परेशान हैं। ये वो चिपचिपी गर्मी है, जो दिनभर आपको पसीने से तर-बतर रखती है और रात में पंखे-कूलर भी बेअसर से लगते हैं।
मौसम की मौजूदा चाल और वाराणसी का हाल
आज की बात करें तो वाराणसी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले दिनों के मुकाबले ये बेशक 7 डिग्री सेल्सियस कम है, जो थोड़ी राहत की बात लग सकती है।
लेकिन आंकड़े सिर्फ तापमान नहीं बताते, उसके साथ जुड़ी नमी और हवा की चाल भी बताती है कि असल में कितना आराम मिला है। हवा की रफ्तार आज महज़ 5 किलोमीटर प्रति घंटा रही और हवा में नमी 58 प्रतिशत तक बनी हुई थी।
यही 58 प्रतिशत नमी है जो पूरे माहौल को उमस भरा और चिपचिपा बना रही है। बादल आते-जाते रहे, लेकिन बारिश की एक बूँद तक नहीं गिरी, जिसने लोगों की बेचैनी और बढ़ा दी है।
लोग सोच रहे हैं कि जब तापमान कम हुआ तो फिर गर्मी क्यों नहीं गई? इसकी वजह साफ है – तेज़ हवा न होने और नमी ज़्यादा होने से पसीना सूखता नहीं, और इसी वजह से राहत नहीं मिल पाती।
इस प्रचंड गर्मी और उमस के बावजूद, काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों पर पर्यटकों की भीड़ कम नहीं हुई है। दूर-दूर से आए पर्यटक, बनारस के रंग में रंगने की चाह में, सुबह की आरती से लेकर शाम की गंगा आरती तक का अनुभव ले रहे हैं।
हालांकि, उन्हें भी इस उमस से जूझना पड़ रहा है, लेकिन बनारस का जादू इतना गहरा है कि थोड़ी-बहुत गर्मी उनकी खुशी कम नहीं कर पा रही। कई लोग तो उम्मीद कर रहे हैं कि उनके रुकने के दौरान ही शायद मानसून की बारिश हो जाए, और उन्हें गंगा किनारे बारिश का अद्भुत नज़ारा देखने को मिले।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान: ऑरेंज और येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए जो अलर्ट जारी किए हैं, वो लोगों को थोड़ी सावधानी बरतने के लिए भी आगाह कर रहे हैं। 30 जून से 2 जुलाई तक, यानी लगातार तीन दिनों के लिए, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में भारी से अति भारी बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है।
इसके लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। इसका मतलब है कि सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि तेज़ हवाएं भी चलेंगी, जिनकी रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इसके साथ ही, कई जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की भी चेतावनी दी गई है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वो बेवजह घरों से बाहर न निकलें, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर रहें, और सुरक्षित जगहों पर ही रहें।
ऑरेंज अलर्ट के बाद, 3 से 5 जुलाई तक के लिए 'येलो अलर्ट' प्रभावी रहेगा। इस अवधि में मध्यम बारिश होने का अनुमान है और हवाओं की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है।
यह बारिश भले ही उतनी तेज़ न हो, लेकिन लगातार होने से निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिससे आवागमन प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग की इन चेतावनियों को गंभीरता से लेना ज़रूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
किसानों की उम्मीदें और चिंताएं
इस मानसून की देरी से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वालों में हमारे अन्नदाता किसान भी शामिल हैं। लखनऊ के कृषि विशेषज्ञ डॉ.
सत्येंद्र कुमार सिंह का कहना है कि जून के शुरुआती दिनों में होने वाली बारिश खरीफ सीज़न की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वो समय होता है जब किसान अपनी ज़मीन तैयार करके बुवाई शुरू करते हैं।
यदि मानसून समय पर सक्रिय नहीं होता है, तो इसका सीधा असर कई प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ता है।
- सब्ज़ियों पर असर: लौकी, करेला, तोरई, भिंडी, ग्वार फली जैसी सब्ज़ियां, जिनकी खेती खरीफ सीज़न में बड़े पैमाने पर होती है, उनकी बुवाई प्रभावित हो सकती है। अगर बुवाई में देरी हुई तो पैदावार भी कम हो सकती है, जिसका असर बाज़ार में उनकी कीमतों पर भी दिखेगा।
- प्रमुख फसलों पर असर: अरहर, मक्का और बाजरा जैसी प्रमुख खरीफ फसलें भी मानसून पर ही निर्भर करती हैं। समय पर पानी न मिलने से इनकी बुवाई अटक जाती है, और देरी से बुवाई करने पर फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- उत्पादन पर खतरा: डॉ. सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून और विलंब से पहुंचता है, तो खरीफ फसलों के कुल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल, वाराणसी और पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही झमाझम बारिश होगी, जो न केवल गर्मी से राहत दिलाएगी बल्कि धरती की प्यास भी बुझाएगी और किसानों के चेहरों पर खुशी लाएगी।
अब बस अगले 24-48 घंटों का इंतजार है, जब मानसून आखिरकार अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा और इस तपिश भरे माहौल को ठंडक में बदल देगा।

