वाराणसी: सुबह के साढ़े सात बज रहे थे। शहर की दालमंडी में एक हलचल मची हुई थी, लेकिन ये रोज़ की नहीं थी। यहां की गलियों में हथौड़ों की ठक-ठक गूँज रही थी और लगभग 200 मजदूर पाँच मस्जिदों के चिह्नित हिस्सों को ढहाने में जुटे थे। ये कोई छोटी-मोटी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक बड़े सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट का हिस्सा थी, जिसके लिए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। गलियों में बैरिकेडिंग, टीन शेड लगाकर रास्ते बंद, और हर तरफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान, कुल 1860 जवान चौकस खड़े थे। यह सब उस दालमंडी में हो रहा था, जो अपनी पुरानी इमारतों और संकरी गलियों के लिए जानी जाती है, और जहां अब बदलाव का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है।
काशी की इस दालमंडी में करीब 181 मकानों और 6 मस्जिदों पर चौड़ीकरण परियोजना की तलवार लटक रही थी। सालों से चली आ रही इस परियोजना को अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि यह शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और विकास को गति देने के लिए जरूरी है। अब तक 162 मकानों पर कार्रवाई हो चुकी है, जिनमें से 80 को तो पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया है।
बुधवार को, मोहर्रम समाप्त होने के बाद, उन पांच मस्जिदों के हिस्सों को हटाने का काम शुरू किया गया, जिनके प्रबंधन ने पहले ही सहमति दे दी थी। सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम थे कि मीडिया तक को वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करने से रोक दिया गया, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और शांति व्यवस्था बनी रहे।
परियोजना का मकसद और प्रभावित इमारतें
वाराणसी की दालमंडी, जो अपने भीड़-भाड़ वाले बाजारों और ऐतिहासिक इमारतों के लिए जानी जाती है, लंबे समय से यातायात की समस्या से जूझ रही है। इसी समस्या का हल निकालने के लिए दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना शुरू की गई है।
इस परियोजना के तहत 181 मकानों और कुल 6 मस्जिदों को सड़क चौड़ीकरण के लिए चिह्नित किया गया था। यह एक बड़ी और संवेदनशील कार्रवाई है, जिसमें न सिर्फ आवासीय और व्यावसायिक इमारतें हटाई जा रही हैं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक संरचनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
प्रशासन का दावा है कि इस परियोजना से शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी।
ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और मस्जिदों की सहमति
कुल छह मस्जिदें इस चौड़ीकरण परियोजना की जद में थीं। इनमें लंगड़े हाफिज मस्जिद, निसारन की मस्जिद, रंगीले शाह मस्जिद, अली रजा मस्जिद, संगमरमर मस्जिद और मस्जिद मिर्जा करीमुल्लाह बेग शामिल हैं।
इनमें से पांच मस्जिदों के प्रबंधन ने प्रशासन के साथ बातचीत के बाद ध्वस्तीकरण के लिए अपनी सहमति दे दी थी। यह एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने प्रशासन के लिए आगे बढ़ने का रास्ता साफ किया।
हालांकि, लंगड़े हाफिज मस्जिद को लेकर अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। मोहर्रम से पहले इन सभी चिह्नित हिस्सों का सीमांकन और नाप-जोख पूरी कर ली गई थी, और मोहर्रम समाप्त होते ही प्रशासन ने बुधवार को उन पांच मस्जिदों के चिह्नित हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुबह करीब 7:30 बजे शुरू हुई। मौके पर करीब 200 मजदूर हथौड़ों के साथ जुटे थे, जो चिह्नित ढांचों को तोड़ने का काम कर रहे थे।
पूरी कार्रवाई की निगरानी डीआईजी शिव हरि मीणा खुद कर रहे थे, जो सुबह करीब 7 बजे ही प्रशासनिक टीम के साथ दालमंडी पहुंच गए थे। यह दिखाता है कि प्रशासन इस कार्रवाई को कितनी गंभीरता से ले रहा है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को टालने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
मौके पर सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त
दालमंडी में बुधवार का माहौल किसी छावनी जैसा था। सुरक्षा के लिए 1860 जवानों की फौज तैनात की गई थी।
इसमें पीएसी की 7 कंपनियां, सीआरपीएफ की एक बटालियन, आरपीएफ की एक बटालियन और स्थानीय पुलिस बल के जवान शामिल थे। दालमंडी जाने वाले सभी रास्तों को टीन शेड लगाकर बंद कर दिया गया था, ताकि किसी भी बाहरी व्यक्ति या मीडिया कर्मी को कार्रवाई स्थल तक पहुंचने से रोका जा सके।
मीडिया को वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करने की सख्त मनाही थी। आम लोगों की आवाजाही पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी।
हर नुक्कड़ पर, हर गली में पुलिस बल तैनात था और पूरे इलाके की चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही थी। प्रशासन का एकमात्र लक्ष्य था कि यह पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
ऐतिहासिक रंगीले शाह मस्जिद भी निशाने पर
ध्वस्त की जा रही पांच मस्जिदों में एक रंगीले शाह मस्जिद भी है, जिसे औरंगजेब के जमाने का बताया जाता है। यह मस्जिद अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती है।
हालांकि, चौड़ीकरण परियोजना की जद में आने के कारण इसके चिह्नित हिस्सों को भी हटाने का काम चल रहा है। इस मस्जिद के अलावा, लंगड़े हाफिज मस्जिद भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें चांद कमेटी का कार्यालय है और एक बार में 5 हजार से ज्यादा नमाजी यहां इबादत करते हैं।
फिलहाल लंगड़े हाफिज मस्जिद पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है क्योंकि उसके प्रबंधन से सहमति नहीं बनी है। यह स्थिति दिखाती है कि प्रशासन सिर्फ सहमतियों पर ही आगे बढ़ रहा है और विरोध वाले मामलों में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
सबसे पहले मिर्ज़ा करीमुल्लाह बेग मस्जिद पर कार्रवाई
जब सुबह प्रशासन की टीम दालमंडी पहुंची, तो सबसे पहले चौक थाने के पीछे स्थित मस्जिद मिर्जा करीमुल्लाह बेग की बाउंड्री तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। इस मस्जिद का वह हिस्सा जो चौड़ीकरण की जद में आ रहा था, उसे ही सबसे पहले हटाया जा रहा था।
यह एक प्रतीकात्मक शुरुआत थी, जिसके बाद बाकी सहमत मस्जिदों के चिह्नित हिस्सों को हटाने का काम भी गति पकड़ता गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की कि कार्रवाई केवल उन हिस्सों पर हो, जिन पर सहमति बनी थी और जो सीधे तौर पर परियोजना से प्रभावित हो रहे थे।
सुरक्षा बलों की मौजूदगी और मीडिया प्रतिबंध के बीच दालमंडी में यह ऐतिहासिक बदलाव जारी है। 200 मजदूर अपने काम में लगे हैं, और शहर की एक महत्वपूर्ण सड़क को नया स्वरूप देने की कवायद चल रही है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह परियोजना अपने अंतिम चरण तक कैसे पहुंचती है और दालमंडी का यह नया रूप शहर के लिए क्या मायने रखता है।

