झांसी में पेड़ पर लटका मिला युवक का शव; हत्या का आरोप; पुलिस बोली- सुसाइड
सारांश
झांसी में पेड़ पर लटकी मिली भैया साहब की लाश से हड़कंप। चाचा ने हत्या का आरोप लगाते हुए कहा- पैर जमीन पर थे। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया है। जानें पूरी खबर।

झांसी में पेड़ पर लटकी मिली भैया साहब की लाश से हड़कंप। चाचा ने हत्या का आरोप लगाते हुए कहा- पैर जमीन पर थे। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया है। जानें पूरी खबर।

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक खौफनाक वारदात ने सबको चौंका दिया है। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में एक युवक की लाश पेड़ से लटकी मिली, लेकिन मामला सिर्फ आत्महत्या का नहीं लग रहा। मरने वाले के चाचा ने जो खुलासे किए हैं, उसने इस केस में एक नया मोड़ ला दिया है। उनका साफ कहना है कि ये आत्महत्या नहीं, बल्कि उनके भतीजे की हत्या है, क्योंकि उसके पैर ज़मीन पर टिके हुए थे। पुलिस ने अभी तक इसे आत्महत्या का मामला बताया है, लेकिन आरोपों की वजह से जांच अब और गहरे तक जाएगी। ये पूरा मामला प्रेमनगर इलाके के आजादपुरा मोहल्ले का है, जहां एक परिवार के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं और कई सवाल खड़े हो गए हैं।
बुधवार का दिन था, जब सुबह-सुबह एक ऐसी खबर फैली जिसने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी। प्रेमनगर थाना क्षेत्र के आजादपुरा मोहल्ले में रहने वाले लोग तब सन्न रह गए, जब उन्होंने एक कब्रिस्तान के पास लगे एक पेड़ से एक लाश को झूलते देखा।
ये लाश किसी और की नहीं, बल्कि भैया साहब (उम्र 40 साल) की थी, जो यहीं किराए के कमरे में रहते थे। खबर फैलते ही हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों के साथ-साथ पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
भैया साहब का शव उनके किराए के कमरे से करीब 500 मीटर दूर मिला, जिससे ये सवाल उठने लगे कि आखिर वो वहां कैसे पहुंचे और उनकी मौत का असली कारण क्या है?
भैया साहब मूल रूप से मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा थाना क्षेत्र के दबरा गांव के रहने वाले थे। उनके पिता का नाम भंवर सिंह राजपूत है।
भैया साहब एक साधारण मजदूर थे, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। उनकी शादी कौशल्या से हुई थी और उनके तीन बच्चे भी हैं — दो बेटियां खुशबू और दीक्षा, और एक बेटा अंशुल।
उनकी बड़ी बेटी खुशबू की शादी हो चुकी है। भैया साहब कुछ समय से अपने परिवार के साथ झांसी के प्रेमनगर इलाके के आजादपुरा मोहल्ले में किराए पर रह रहे थे, ताकि उन्हें काम मिल सके और वो अपने परिवार को बेहतर ज़िंदगी दे सकें।
लेकिन, मौत ने उनके सारे सपने छीन लिए।
परिजनों के मुताबिक, भैया साहब की ज़िंदगी में शराब की लत एक बड़ी समस्या थी। कुछ समय पहले वो अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर अपने पैतृक गांव शिवपुरी चले गए थे।
लेकिन, झांसी में काम की तलाश उन्हें फिर से खींच लाई। 18 जून को भैया साहब अकेले ही झांसी वापस आ गए थे, जबकि उनकी पत्नी और बच्चे गांव पर ही थे।
भैया साहब ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि ये झांसी की उनकी आखिरी यात्रा होगी। उनके परिवार को क्या पता था कि जिस उम्मीद के साथ वो झांसी लौट रहे हैं, वो उम्मीद उनके जीवन का अंत बन जाएगी?
बुधवार को जब भैया साहब के परिवार को उनकी मौत की खबर मिली, तो उन पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। भैया साहब के चाचा धूपसिंह राजपूत ने इस घटना के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि उनके भतीजे का शव किराए के कमरे से करीब 500 मीटर दूर कब्रिस्तान के पास एक पेड़ से लटका हुआ है, तो वो तुरंत मौके पर पहुंचे। लेकिन मौके पर जो मंजर दिखा, उसे देखकर धूपसिंह राजपूत को ये मामला आत्महत्या का नहीं लगा।
धूपसिंह राजपूत ने सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, "जब हम मौके पर पहुंचे, तो देखा कि भैया साहब के पैर जमीन पर रखे थे।
आत्महत्या करने वाला शख्स ऐसे नहीं लटकता कि उसके पैर ज़मीन को छू रहे हों।" उन्होंने आगे बताया कि पेड़ पर रस्सी बांधने का तरीका भी बेहद संदिग्ध लग रहा था, जो किसी आत्महत्या के सामान्य तरीके से मेल नहीं खा रहा था।
चाचा धूपसिंह राजपूत का दावा है कि ये साफ तौर पर हत्या का मामला है और किसी ने उनके भतीजे को मारकर पेड़ पर लटकाया है, ताकि इसे आत्महत्या का रूप दिया जा सके। उनके इन आरोपों ने पुलिस की जांच को और भी जटिल बना दिया है।
वहीं, इस मामले पर प्रेमनगर थाना प्रभारी तुलसीराम पांडेय का बयान आया है। उन्होंने भैया साहब की मौत को आत्महत्या बताया है।
थाना प्रभारी पांडेय ने कहा, "भैया साहब ने पेड़ पर फंदा लगाकर खुदकुशी की है।" उन्होंने यह भी बताया कि घटना स्थल पर फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया था, जिसने मौके से सबूत इकट्ठा किए हैं।
पुलिस का कहना है कि वे अभी आत्महत्या के कारणों की जांच कर रहे हैं। यानी, पुलिस अभी भी इस बात की पड़ताल कर रही है कि आखिर भैया साहब ने ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाया।
हालांकि, चाचा के गंभीर आरोपों के बाद, पुलिस के लिए सिर्फ आत्महत्या के एंगल से जांच करना मुश्किल होगा और उन्हें हत्या की आशंका को भी गंभीरता से देखना होगा।
पुलिस के अनुसार, फोरेंसिक टीम ने सभी आवश्यक साक्ष्य जुटा लिए हैं, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद ही कई बातें स्पष्ट हो पाएंगी। लेकिन, धूपसिंह राजपूत के आरोपों ने इस मामले में एक गहरी खाई खोद दी है।
एक तरफ पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, तो दूसरी तरफ परिवार के सदस्य इसे हत्या करार दे रहे हैं। भैया साहब की अचानक मौत ने उनके परिवार को सदमे में डाल दिया है।
उनकी पत्नी कौशल्या और बच्चे अब बेसहारा महसूस कर रहे हैं। इस दुखद घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तबाह कर दिया है, बल्कि झांसी के प्रेमनगर इलाके में भी डर और सवालों का माहौल बना दिया है।
सच क्या है, क्या भैया साहब ने खुद अपनी जान ली या किसी ने उनकी जान ली, ये अब पुलिस की गहन जांच के बाद ही पता चल पाएगा। जांच अभी जारी है और सभी की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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