दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र... नाम से तो लगता है ठंडी-ठंडी बयार लाएगा, लेकिन इस बार तो मानो आग लगी हुई है। चौथे दिन भी मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा। बाहर जंतर-मंतर पर हजारों छात्र NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, और अंदर संसद में नेता एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष ऐसा अड़ा है कि सदन चलने ही नहीं दे रहा। वहीं सरकार कहती है, हम तो चर्चा के लिए तैयार हैं, आप ही बहाना बना रहे हो। ये सियासी खींचतान ऐसी है कि सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही और दिन भर "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" के नारे गूंजते रहे। आखिर क्या हुआ आज संसद के अंदर और बाहर, जिससे एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया?
पेपर लीक पर क्यों मचा है इतना बवाल?
देखिए, पूरा बवाल NEET UG परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक को लेकर है। छात्र गुस्से में हैं, भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
उनकी मांग है कि दोषियों को सजा मिले और व्यवस्था में सुधार हो। इसी मांग को लेकर कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल सरकार को घेर रहे हैं।
उनकी पहली शर्त है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक किसी भी बातचीत का कोई फायदा नहीं। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे साफ कह चुके हैं कि शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना होगा तभी बात आगे बढ़ेगी।
सदन में आज क्या-क्या ड्रामा हुआ?
आज मॉनसून सत्र का चौथा दिन था। सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, माहौल गरमा गया।
विपक्षी सांसदों ने 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' के नारे लगाने शुरू कर दिए। स्पीकर ने बार-बार अपील की कि सदन चलने दें, चर्चा करें, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
नतीजा ये हुआ कि कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
12 बजे सदन फिर से शुरू हुआ। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला।
उन्होंने विपक्ष से हाथ जोड़कर अपील की कि वे NEET पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करें। रिजजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बहाने बना रहे हैं और चर्चा से भाग रहे हैं।
हम विपक्ष से फिर से हाथ जोड़ के हम अनुरोध करना चाहते हैं कि आप भी तय कीजिए कब चर्चा शुरू करना है। हम तैयार हैं।
लेकिन आप कंडीशन लगा के बहाना मत बनाइए क्योंकि अगर आप कंडीशन लगाता है। आप एक्सक्यूज देते हैं।
इसका मतलब सब समझ जाते हैं कि आप चर्चा से भागना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि जितना लंबा हो जितना बोलना चाहता है एक दिन दो दिन ही पेपर देश भर में जितने राज्यों में आज तक पेपर लीक हुए हैं सबके सबका सब चर्चा हो जाए और सरकार ने क्या कदम उठाया है उसको लेकर के भी पूरा देश के सामने में हम बताना चाहते हैं।
किरेन रिजिजू के इस आग्रह के बाद भी विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लगातार उठती रही और सदन में हंगामा जारी रहा।
इस शोरशराबे के बीच लोकसभा को एक बार फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। जब 2 बजे कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो हालात वही थे।
अंत में, लोकसभा को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया और अब यह शुक्रवार, 26 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे फिर बैठेगी।
राज्यसभा में क्या तस्वीर थी?
लोकसभा जैसी ही स्थिति राज्यसभा में भी थी। कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वहां भी NEET पेपर लीक पर चर्चा की बात दोहराई और विपक्ष पर हमला बोला।
इस पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भड़क उठे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान को "इन्वेस्टिगेटिव" और "भड़काऊ" बताया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग फिर से दोहरा दी।
जो आज प्राइम मिनिस्टर का बयान हुआ है ये इन्वेस्टिगेटिव बयान है। और जो है का एजुकेशन मिनिस्टर का इस्तीफा होना चाहिए।
राज्यसभा में भी हंगामा जारी रहा और सदन को पहले 12 बजे तक के लिए स्थगित किया गया। 12 बजे जब सदन फिर से चला, तो मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्रों के आंदोलन और उन पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक कोई चर्चा नहीं होगी।
जो इस्तीफा हम पूछ रहे हैं और एजुकेशन मिनिस्टर इस्तीफा देना चाहिए और लाखों हजारों लोग आज रास्ते पे गिरे हुए हैं। लाठी चार्ज हो गई है और बहुत से हॉस्पिटल्स में हैं और उनके मां-बाप परेशान हैं।
इसीलिए मैं आपसे विनती करता हूं। उनका एजुकेटेशन फैला लीजिए।
डिस्कशन शुरू कीजिए। हम तैयार है डिस्कशन के लिए।
इस्तीफा जरूर होना चाहिए।
खड़गे के इस बयान पर नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विपक्ष पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने का आरोप लगाया और कहा कि वे न तो चर्चा चाहते हैं और न ही सदन को चलने देना चाहते हैं।
अपोजिशन विपक्ष का व्यवहार बहुत ही गैर जिम्मेदाराना है। बहुत ही गैर जिम्मेदाराना है।
ये ना चर्चा चाहते हैं ना ही हाउस को चलने देना चाहते हैं। पहले इन्होंने कहा कि आप पेपर लीक पर चर्चा करो और सरकार ने कहा कि हम नीट पर चर्चा करेंगे।
हर विषयों पर चर्चा करेंगे। उसके लिए हम तैयार हैं।
नड्डा के बयान के बाद राज्यसभा में फिर से हंगामा शुरू हो गया और सदन को 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। जब 3 बजे राज्यसभा फिर से बैठी, तो माहौल में कोई सुधार नहीं हुआ।
आखिरकार, राज्यसभा को भी शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसद के बाहर किसका कैसा प्रदर्शन?
सिर्फ सदन के भीतर ही नहीं, संसद के बाहर भी खूब सियासी ड्रामा देखने को मिला। सोचिए, एक तरफ विपक्ष सरकार को घेर रहा था तो दूसरी तरफ सत्ताधारी NDA के सांसद भी प्रदर्शन कर रहे थे! संसद के मकर द्वार पर NDA के नेताओं ने प्रदर्शन किया और विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे NEET पेपर लीक पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं।
ये एक अनोखी तस्वीर थी, जब सत्ता में बैठी पार्टी को भी प्रदर्शन करना पड़ रहा था।
वहीं, दूसरी ओर सोनिया गांधी सहित विपक्षी दलों के सांसद भी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। दोनों पक्ष आमने-सामने थे, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे।
इस बीच, कल सस्पेंड किए गए TMC सांसद कल्याण बनर्जी भी एक अलग ही अंदाज में प्रदर्शन कर रहे थे। वे अपनी पार्टी के उन 20 सांसदों के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, जिन्होंने TMC छोड़कर दूसरे दलों का दामन थाम लिया है।
तो आखिर कब सुलझेगा ये गतिरोध?
कुल मिलाकर, मॉनसून सत्र का चौथा दिन भी किसी समाधान तक नहीं पहुंच सका। विपक्ष अपनी इस्तीफे की मांग पर कायम है और सरकार चर्चा की पेशकश करती रही।
संसद में गतिरोध बरकरार है। अब सबकी निगाहें शुक्रवार पर टिकी हैं कि क्या पांचवें दिन सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाएगी या फिर हंगामे और स्थगन का सिलसिला जारी रहेगा? छात्रों को न्याय मिलेगा या ये मुद्दा सिर्फ सियासी दांव-पेच का हिस्सा बनकर रह जाएगा, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।



































