दिल्ली: जंतर मंतर. 22 जुलाई का दिन है और इस ऐतिहासिक जगह पर फिर से गहमागहमी तेज हो गई है. पिछले कुछ दिनों से जो शांति या कहें कि मायूसी छाई हुई थी, वो अब धीरे-धीरे हट रही है. याद कीजिए, 20 जुलाई को यहां क्या हुआ था? पुलिस ने पूरी ताकत से कार्रवाई की थी. जो स्टेज लगी थी, उसे उखाड़ दिया गया था. सारे टेंट हटा दिए गए थे. एक तरह से पूरा माहौल ही बदल गया था. लेकिन अब, महज दो दिन बाद, आप देखेंगे तो तस्वीर बिल्कुल अलग है. युवा दोबारा जंतर मंतर पर पहुंच रहे हैं, और धीरे-धीरे ही सही, प्रोटेस्ट साइट को फिर से व्यवस्थित किया जा रहा है. जैसे फिल्म का कोई सीन दोबारा से फिल्माया जा रहा हो, वैसे ही पुलिस का सेटअप भी पहले जैसा दिखने लगा है. तो आखिर दो दिनों में ऐसा क्या बदल गया कि जंतर मंतर फिर चर्चा में है?
20 जुलाई और 22 जुलाई में क्या फर्क है?
20 जुलाई को, जब यहां से मार्च निकालने की कोशिश हुई थी, तो पुलिस ने सिर्फ स्टेज और तंबू ही नहीं हटाए थे, बल्कि चेकिंग भी एक तरह से बंद कर दी थी. माहौल ऐसा बन गया था कि आंदोलन ठंडा पड़ गया है.
लेकिन आज की तारीख में, यानी 22 जुलाई को, हालात बिल्कुल उलट हैं. अब आपको फिर से पुलिस का वही पुराना और सख्त वाला सेटअप दिखाई देगा.
अगर आप जंतर मंतर के एंट्री पॉइंट पर जाएंगे, तो पाएंगे कि दिल्ली पुलिस पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी पर है. महिला प्रदर्शनकारियों के लिए अलग काउंटर बना है, जहां महिला पुलिसकर्मी चेकिंग कर रही हैं.
वहीं, पुरुष प्रदर्शनकारियों के लिए अलग व्यवस्था है, जहां उनकी सघन जांच की जा रही है, ठीक वैसे ही जैसे पहले हुआ करती थी.
सिर्फ दिल्ली पुलिस ही नहीं, रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) के जवान भी पीछे की तरफ मुस्तैद दिख रहे हैं. उनकी नजरें लगातार इस बात पर टिकी हैं कि आखिर क्या हो रहा है और कौन आ-जा रहा है.
यह सब देखकर ऐसा लगता है जैसे पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है. लेकिन एक और खास बात है जो ध्यान खींचती है, वो है पुलिसकर्मियों की नेमप्लेट्स.
पुलिस की नेमप्लेट्स और कैमरे का क्या मतलब है?
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब पुलिस या आरएएफ किसी बड़ी या कड़क कार्रवाई की तैयारी में होते हैं, तो वे अपनी नेमप्लेट्स हटा लेते हैं. यह एक तरह से उनकी पहचान छिपाने का तरीका होता है, ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो.
लेकिन आज जंतर मंतर पर जो तस्वीर दिख रही है, वो बिल्कुल अलग है. यहां मौजूद हर पुलिसकर्मी और आरएएफ जवान ने अपनी नेमप्लेट लगा रखी है.
ये एक दिलचस्प एंगल है, जो दिखाता है कि शायद इस वक्त पुलिस किसी बड़े 'एक्शन' के मूड में नहीं है, बल्कि 'व्यवस्था' बनाए रखने पर ज्यादा जोर दे रही है.
इसके साथ ही, जो एक और बदलाव दिख रहा है, वो है कैमरों की वापसी. 20 जुलाई की कार्रवाई के दौरान पुलिस के कैमरे भी हटा दिए गए थे.
लेकिन अब अगर आप जंतर मंतर पर जाएंगे, तो आपको पुलिस के कैमरे भी दोबारा इंस्टॉल किए हुए मिलेंगे. ये कैमरे हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं.
जाहिर है, पुलिस अब हर चीज को डॉक्यूमेंट कर रही है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियात बरत रही है.
आरएएफ अधिकारी सोनिया शरावत का इंस्टाग्राम पोस्ट क्यों वायरल हो रहा है?
जब हम पुलिस और आरएएफ की बात कर ही रहे हैं, तो एक ऐसी खबर है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और जिसने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. यह बात जुड़ी है आरएएफ की एक अधिकारी, असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया शरावत से.
याद है आपको, वही सोनिया शरावत, जिनका इंटरव्यू हमारे द लल्लन टॉप के रिपोर्टर सिद्धार्थ मोहन ने किया था? वो तब काफी वायरल हुई थीं जब उन्होंने नेमप्लेट्स हटाने वाले मुद्दे पर बात की थी. उन्होंने समझाया था कि कैसे आरएएफ के अधिकारी कई बार अपनी नेमप्लेट्स हटा देते हैं.
अब उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी लगाई है, जिसने एक नई बहस छेड़ दी है. इस स्टोरी में सोनिया शरावत ने एक कॉकरोच की तस्वीर शेयर की है और उसके साथ लिखा है,
“Can't fix themselves and they wanna fix the country.”
यानी "जो खुद को ठीक नहीं कर सकते, वो देश को ठीक करना चाहते हैं." इस पोस्ट को लेकर सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) ने सवाल उठाए हैं और अपनी नाराजगी जाहिर की है.
सीजेपी ने इस पर एक पोस्ट भी किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि:
"दिस आरएएफ ऑफिशियल एक्चुअली सीज द पीसफुल प्रोटेस्टर्स एज कॉकरोचेस एंड थिंक्स दैट द ब्रूटैलिटी ऑफ़ द पुलिस वाज जस्टिफाइड।"
मतलब, यह आरएएफ अधिकारी दरअसल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कॉकरोच मानती हैं और उन्हें लगता है कि पुलिस द्वारा की गई बर्बरता जायज थी. सीजेपी ने यह भी आरोप लगाया है कि सोनिया शरावत ने लाठीचार्ज जैसी पुलिसिया कार्रवाई को सही ठहराने वाले कुछ और पोस्ट भी किए हैं, जिसकी सीजेपी टीम कड़ी निंदा कर रही है.
आंदोलनकारी फिर से इकट्ठा हो रहे हैं।
एक तरफ पुलिस अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर रही है, तो दूसरी तरफ आंदोलनकारी भी फिर से एकजुट हो रहे हैं. जंतर मंतर के अंदर फिर से युवाओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई है.
एंट्री गेट से लेकर स्टेज तक, आपको हर जगह युवा ही युवा नजर आएंगे. वो एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए यहां पहुंच रहे हैं.
माहौल में तनाव भले ही हो, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है. दिल्ली पुलिस और आरएएफ की मौजूदगी के बीच, जंतर मंतर पर यह आंदोलन एक बार फिर नई करवट ले रहा है.
लोग लगातार जुड़ रहे हैं और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह स्थिति किस दिशा में जाती है.






































