मॉस्को: क्या आपको कुछ घंटों का ट्रेन सफर लंबा और उबाऊ लगता है? जरा सोचिए उस सफर के बारे में जहां आपको एक हफ्ते तक ट्रेन के अंदर ही रहना पड़े। सुनने में यह किसी चुनौती जैसा लग सकता है, लेकिन दुनिया में एक ऐसी रेल यात्रा है जहां ट्रेन का सफर ही असल मंजिल बन जाता है। हम बात कर रहे हैं ट्रांस-साइबेरियन रेलवे की, जो सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट का जरिया नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसे लोग अपनी पूरी जिंदगी में एक बार जरूर जीना चाहते हैं।
यह सफर आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां खिड़की के बाहर हर पल नजारे बदलते रहते हैं। कभी घने जंगल, कभी बर्फ से ढके पहाड़, तो कभी विशाल झीलें।
यह रेल लाइन यूरोप और एशिया जैसे दो बड़े महाद्वीपों को आपस में जोड़ती है। यानी आप बिना ट्रेन बदले एक कॉन्टिनेंट से दूसरे कॉन्टिनेंट तक का सफर तय कर सकते हैं।
आखिर कितनी लंबी है यह जर्नी?
अगर हम आंकड़ों की बात करें तो यह सफर वाकई हैरान करने वाला है। यह ट्रेन रूस की राजधानी मॉस्को से शुरू होकर सुदूर पूर्व के व्लादिवोस्तोक शहर तक जाती है।
इसकी कुल लंबाई लगभग 9,289 किलोमीटर है। मोटा-मोटी हिसाब लगाएं तो इस पूरी जर्नी को पूरा करने में करीब 6 से 7 दिन का समय लगता है।
सबसे मजेदार बात यह है कि इस सफर के दौरान आप आठ अलग-अलग टाइम ज़ोन पार करते हैं। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ती है, आपकी घड़ी का समय और सूरज के उगने-डूबने का अंदाज बदलता रहता है।
एक ही ट्रेन में बैठकर समय के साथ यह लुका-छिपी वाला खेल इस ट्रिप को बेहद रोमांचक बना देता है।
इस रेलवे का इतिहास क्या है?
यह रेल लाइन कोई नई नहीं है, बल्कि इसकी हिस्ट्री 130 साल से भी ज्यादा पुरानी है। इसका कंस्ट्रक्शन साल 1891 में शुरू हुआ था, जब रूस में ज़ार अलेक्जेंडर तृतीय का शासन था।
उस दौर में इसे बनाना किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं था।
हजारों मजदूरों ने कड़ाके की ठंड, घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और उफनती नदियों के बीच दिन-रात मेहनत की। आखिरकार साल 1916 में इसका मुख्य रूट पूरा हुआ।
तब से यह रूस के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन बन गई।
सफर के दौरान क्या-क्या देखने को मिलता है?
इस जर्नी की असली जान इसके बदलते हुए नजारों में है। सफर के दौरान आप बड़े शहरों की चमक-धमक से लेकर छोटे-छोटे गांवों की सादगी को करीब से देख सकते हैं।
जब यह ट्रेन यूराल पहाड़ों से गुजरती है, तो आपको अहसास होता है कि आप यूरोप छोड़कर एशिया में दाखिल हो रहे हैं।
साइबेरिया के खुले मैदान और वहां के रहस्यमयी जंगल इस सफर को और भी जादुई बना देते हैं। ऐसा लगता है जैसे आप किसी फिल्म के सीन में सफर कर रहे हों।
बैकाल झील का क्या खास कनेक्शन है?
इस पूरी यात्रा का सबसे बड़ा अट्रैक्शन है बैकाल झील। यह दुनिया की सबसे गहरी मीठे पानी की झीलों में से एक है।
जब ट्रेन इस झील के किनारे से गुजरती है, तो वहां का साफ नीला पानी और आसपास के पहाड़ी नजारे पैसेंजर्स को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
ज्यादातर यात्री इस हिस्से का इंतजार बेसब्री से करते हैं क्योंकि यहां की नेचुरल ब्यूटी किसी जन्नत से कम नहीं लगती। यह अनुभव किसी भी ट्रैवलर के लिए सबसे यादगार पल बन जाता है।
इतनी लंबी जर्नी होने के बावजूद पैसेंजर्स की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाता है। ट्रेन के अंदर अलग-अलग तरह के कोच और आरामदायक सुविधाएं दी गई हैं ताकि एक हफ्ते का यह सफर तनावपूर्ण न होकर सुकून भरा रहे।






































