मुंबई: अगर आप भी शेयर बाजार में अपनी किस्मत आज़माते हैं और सोच रहे हैं कि इस बार मेटल कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाया जाए, तो ज़रा ठहरिए! ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि मार्केट के बड़े जानकारों की राय कुछ और ही है। कमोडिटी मार्केट में इस वक्त खूब उठा-पटक चल रही है, कभी दाम ऊपर तो कभी नीचे, ऐसे में आँख बंद करके निवेश करना घाटे का सौदा साबित हो सकता है। Axis Securities के एक्सपर्ट्स ने इस मेटल सेक्टर को लेकर एक बड़ी बात कही है, जिस पर आपको गौर करना चाहिए।
ब्रोकरेज फर्म Axis Securities का कहना है कि अगर आप मेटल स्टॉक्स में हाथ आज़माने की सोच रहे हैं, तो अभी जल्दबाज़ी बिल्कुल मत कीजिए। आपको निवेश के लिए सही मौके, यानी ‘एंट्री पॉइंट्स’ का इंतज़ार करना चाहिए।
यह सलाह कोई हवा में नहीं दी जा रही, इसके पीछे खास वजहें हैं, जो मार्केट की चाल से जुड़ी हैं।
फर्म में मेटल्स के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट आदित्य वेलेकर का तो साफ कहना है कि मॉनसून के मौसम में स्टील की कीमतें अक्सर नरम पड़ जाती हैं। ऐसे में अगर आप अभी दांव लगाएंगे, तो हो सकता है कि आपको अपेक्षित रिटर्न न मिल पाए।
हालांकि, ब्रोकरेज लंबे समय के लिए इस सेक्टर को लेकर काफी पॉजिटिव है, पर अभी थोड़े समय के लिए करेक्शन की उम्मीद है, और यही करेक्शन निवेशकों के लिए खरीदारी का बेहतर मौका बन सकता है।
तो आखिर क्यों करना चाहिए इंतजार?
आदित्य वेलेकर बताते हैं कि स्टील कंपनियों ने अप्रैल-जून तिमाही में बहुत बढ़िया परफॉर्मेंस दिखाई है। कंपनियों के आंकड़े शानदार आए हैं, लेकिन अब जल्द ही इन कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है।
उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि जब तक शेयरों का वैल्युएशन और ज़्यादा आकर्षक न हो जाए, तब तक नई पोज़िशन बनाने से बचें। इसका सीधा मतलब है कि जब शेयर थोड़े सस्ते हो जाएं, तभी निवेश करना समझदारी होगी।
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "अभी हमने चौथी तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है, और स्टील की कीमतें अब मौसमी रूप से कमज़ोर मॉनसून सीज़न में जा रही हैं। ऐसे में हमें Tata Steel समेत ज़्यादातर स्टील शेयरों में कुछ टेक्निकल शॉर्ट-टर्म करेक्शन दिख सकता है।
" यह करेक्शन अस्थायी हो सकता है, लेकिन यह निवेशकों को सस्ते में अच्छे स्टॉक खरीदने का मौका देगा।
कई बार कंपनियों से जुड़ी खबरें भी शेयर की चाल पर असर डालती हैं। इसी बीच, जिंदल स्टील एंड पावर (Jindal Steel and Power) के ऑपरेशन्स पर कमेंट करते हुए, आदित्य वेलेकर ने बताया कि कंपनी के नीदरलैंड्स प्लांट में प्रदूषण से जुड़ा जो मुद्दा है, वह एक लगातार चलने वाला मामला है।
उनके मुताबिक, इससे कंपनी के लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट केस में कोई खास बदलाव नहीं आता है। यानी अगर आप लंबी अवधि के लिए जिंदल स्टील में निवेश करना चाहते हैं, तो यह बात आपको बहुत ज़्यादा परेशान नहीं करनी चाहिए।
कौन से मेटल स्टॉक हैं Axis Security की टॉप लिस्ट में?
अब बात आती है कि अगर इंतज़ार करना है, तो किन शेयरों पर नज़र रखनी चाहिए? आदित्य वेलेकर ने बड़ी स्टील कंपनियों में JSW Steel को अपनी लिस्ट में सबसे ऊपर रखा है। उनकी लिस्ट में JSW Steel पहले पायदान पर है।
इसके बाद स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (SAIL), हिंदुस्तान कॉपर (Hindustan Copper) और Tata Steel का नंबर आता है। अगर शेयर बाज़ार में और करेक्शन होता है, यानी कीमतें थोड़ी और गिरती हैं, तो उनका मानना है कि SAIL एक 'वैल्यू बाइंग' का शानदार मौका बन सकता है।
'वैल्यू बाइंग' का मतलब है कि जब कोई अच्छा शेयर अपनी असली कीमत से कम दाम पर मिल रहा हो, तो उसे खरीदना।
फेरस स्टॉक्स की बात हो गई, अब नॉन-फेरस स्टॉक्स यानी ऐसे मेटल्स जिनमें लोहा नहीं होता, उनकी तरफ़ भी देख लेते हैं। Axis Security का पसंदीदा नॉन-फेरस स्टॉक Hindalco बना हुआ है।
यानी अगर आप एल्युमीनियम सेक्टर में निवेश का मन बना रहे हैं, तो Hindalco पर खास नज़र रख सकते हैं।
क्या कहते हैं एल्युमीनियम और कॉपर के दाम?
मेटल सेक्टर में सिर्फ स्टील ही नहीं, एल्युमीनियम और कॉपर जैसे मेटल्स के भी अपने मायने हैं। Axis Securities ने एल्युमीनियम की कीमतों को लेकर भी अपना अनुमान जारी किया है।
ब्रोकरेज का आकलन है कि 2026-27 (FY27) के लिए एल्युमीनियम की कीमत लगभग $3,000 प्रति टन रह सकती है। हालांकि, अगले कुछ सालों में इसमें थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि 2028-29 (FY29) तक एल्युमीनियम की कीमतें घटकर $2,800-$2,900 प्रति टन के आसपास आ सकती हैं। अब सवाल उठता है कि क्या ये गिरावट बहुत बड़ी है? तो जवाब है, नहीं।
ब्रोकरेज का मानना है कि एल्युमीनियम को बनाने में आने वाली ज़्यादा लागत इसकी कीमतों को बहुत ज़्यादा गिरने से रोकेगी। भले ही मार्केट में एल्युमीनियम की सप्लाई थोड़ी बढ़ भी जाए, लेकिन उत्पादन की लागत ज़्यादा होने की वजह से कीमतें एक निश्चित स्तर से नीचे नहीं जाएंगी।
वहीं, कॉपर यानी तांबे की कीमतों को लेकर भी एक अच्छी ख़बर है। आदित्य वेलेकर का अनुमान है कि कॉपर की कीमतें बढ़ने वाली हैं।
इसकी वजह बढ़ती डिमांड है। जैसे-जैसे दुनिया भर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर का काम बढ़ रहा है, कॉपर की ज़रूरत भी बढ़ रही है।
इसलिए कॉपर के शेयरों में भी निवेश के अच्छे मौके बन सकते हैं, बशर्ते सही समय पर एंट्री की जाए।
कुल मिलाकर, Axis Securities की सलाह साफ है: मेटल शेयरों में अभी तुरंत कूदने के बजाय सही मौके का इंतज़ार करें। खासकर मॉनसून के दौरान आने वाली गिरावट को एक 'खरीदारी के अवसर' के तौर पर देखें और सोच-समझकर निवेश करें ताकि आपको बेहतर रिटर्न मिल सके।






































