तकनीकी जगत: आजकल गेमिंग की दुनिया में जो माहौल बना हुआ है, उसे देखकर लगता है कि बड़े-बड़े खिलाड़ियों के लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं। सोचिए, दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग डिविजन एक्सबॉक्स के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि कंपनी उसे बेच सकती है! अब आप कहेंगे, "अरे ये क्या बात हुई? एक्सबॉक्स और बिकेगा?" लेकिन सच ये है कि इन दिनों एक्सबॉक्स भारी उथल-पुथल से गुजर रहा है, और खबरें कुछ ऐसी ही आ रही हैं.
दरअसल, एक्सबॉक्स में एक बड़ा 'रिस्ट्रक्चरिंग' चल रहा है, जिसे कंपनी के सीईओ आशा शर्मा ने खुद 'रीसेट' का नाम दिया है. इस रीसेट के तहत हजारों कर्मचारियों की नौकरियां चली गई हैं.
ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, बल्कि एक बड़ा संकट है जो एक्सबॉक्स के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रहा है.
तो क्या माइक्रोसॉफ्ट वाकई एक्सबॉक्स को बेचने के मूड में है? या फिर ये सिर्फ मार्केट की बातें हैं? चलिए, इस पूरे मामले को थोड़ा करीब से समझते हैं.
क्यों हो रही है एक्सबॉक्स को बेचने की बात?
बाजार के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स और एनालिस्ट्स की मानें तो एक्सबॉक्स को पूरा का पूरा बेचना इतना आसान नहीं है. उनकी राय है कि ये इतना महंगा सौदा होगा कि शायद बड़े से बड़े खरीदार भी इसे खरीदने की हिम्मत न जुटा पाएं.
एक पूरा गेमिंग प्लेटफॉर्म, जिसका अपना हार्डवेयर है, गेम पास जैसी सब्सक्रिप्शन सर्विस है और दुनिया भर में करोड़ों फैंस हैं, उसकी कीमत अरबों-खरबों डॉलर में होगी. क्या कोई इतना बड़ा रिस्क लेने को तैयार होगा?
हालांकि, इन एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि अगर पूरा एक्सबॉक्स नहीं बिका, तो इसके 'खास हिस्सों' को जरूर खरीदा जा सकता है. मतलब, गेमिंग कंपनी को टुकड़ों-टुकड़ों में बेचने की बात चल रही है.
ये ठीक वैसा ही है जैसे किसी बड़े बिज़नेस के कुछ खास सेक्शंस को अलग करके बेच दिया जाए. ऐसे में सवाल उठता है कि एक्सबॉक्स के वो कौन से हिस्से हो सकते हैं, जिन पर खरीदारों की नज़र हो सकती है?
रीसेट का मतलब क्या है, और कितने लोग प्रभावित हुए?
जैसा कि हमने बताया, एक्सबॉक्स के सीईओ आशा शर्मा ने इस पूरी कवायद को "रीसेट" कहा है. इस रीसेट के तहत हजारों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है.
कंपनी ने सीधे-सीधे 1,600 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है, और फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले 1,600 और नौकरियां जाने की आशंका है. ये आंकड़े वाकई परेशान करने वाले हैं और कंपनी के भीतर के तनाव को साफ दिखाते हैं.
सिर्फ नौकरियां ही नहीं, एक्सबॉक्स ने चार गेमिंग स्टूडियो को भी छोड़ दिया है. इनमें से कुछ स्टूडियो तो अपनी आजादी का जश्न मना रहे हैं, तो कुछ नए मालिक की तलाश में हैं.
Compulsion Games और Double Fine Productions अब फिर से इंडिपेंडेंट हो गए हैं. वहीं, Senua बनाने वाले Ninja Theory और State of Decay 3 बनाने वाले Undead Labs को नए ओनर्स की तलाश है.
सोचिए, जिन स्टूडियोज ने शानदार गेम्स बनाए हैं, उन्हें भी इस मुश्किल दौर से गुजरना पड़ रहा है.
एक्सबॉक्स के 'हेल्थ' को लेकर क्या कहा गया?
एक्सबॉक्स के लिए पिछला साल काफी मुश्किल भरा रहा है. कंपनी ने अपने कंसोल्स की कीमतें बढ़ाईं, कई गेम्स और स्टूडियोज को बंद कर दिया.
और अब तो खुद आशा शर्मा ने भी मान लिया है कि कंपनी फिलहाल 'हेल्दी' नहीं है. उन्होंने एक्सबॉक्स कर्मचारियों को भेजे एक ईमेल में साफ-साफ लिखा है, "हमारा बिज़नेस आज हेल्दी नहीं है.
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शर्मा ने अपनी बात को और साफ करते हुए बताया कि कंपनी के 'मार्जिन' बाकी प्लेटफॉर्म और पब्लिशिंग बिज़नेस के मुकाबले 3 से 10 गुना कम हैं. इसका सीधा मतलब है कि एक्सबॉक्स जितना पैसा कमा रहा है, उतना खर्च भी हो रहा है, या शायद उससे भी ज़्यादा.
और इस 'खराब सेहत' का एक बड़ा कारण गेम पास को बताया गया है. अब गेम पास, जो एक्सबॉक्स की एक बड़ी खासियत माना जाता था, वही उसकी कमजोरी बनकर उभरा है.
ये सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगता है, लेकिन ये कंपनी के टॉप लीडर्स का स्टेटमेंट है.
गेम पास ही आखिर क्यों बना मुसीबत?
गेम पास ने गेमर्स को एक सब्सक्रिप्शन पर ढेर सारे गेम्स खेलने का मौका दिया है, और यह काफी पॉपुलर भी रहा है. लेकिन अगर कंपनी के सीईओ कह रही हैं कि यह एक 'की फॉल्ट' है, तो इसके पीछे जरूर कोई बड़ी वजह होगी.
शायद इसका मतलब ये है कि गेम पास के सब्सक्रिप्शन से कंपनी को उतना प्रॉफिट नहीं मिल रहा, जितना सोचा गया था. हो सकता है कि सब्सक्रिप्शन की कीमतें कम हों या फिर गेम्स पर जो खर्च हो रहा है, उसे वसूल करना मुश्किल हो रहा हो.
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात तो साफ है कि माइक्रोसॉफ्ट एक्सबॉक्स को लेकर काफी सीरियस है. उन्हें इस प्लेटफॉर्म को प्रॉफिटेबल बनाना है, और इसके लिए वे बड़े से बड़े फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे.
चाहे वो छंटनी हो, स्टूडियो को छोड़ना हो, या फिर गेम पास की स्ट्रेटेजी को रिव्यू करना हो. आने वाले दिनों में एक्सबॉक्स किस दिशा में जाता है, ये देखना दिलचस्प होगा.
क्या ये 'रीसेट' एक्सबॉक्स को फिर से ट्रैक पर ला पाएगा, या फिर हमें वाकई टुकड़ों-टुकड़ों में बिकने वाले एक्सबॉक्स की खबरें सुनने को मिलेंगी?



































