बठिंडा: पंजाब के बठिंडा शहर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जिसने बाबा फरीद नगर की गलियों में सन्नाटा पसरा दिया है। एक नौजवान, जो बिहार से अपना पेट पालने आया था, ने फांसी लगाकर अपनी जान ले ली। सुबह-सुबह उसकी भाभी के साथ कुछ अनबन हुई थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद उसकी जिंदगी का दुखद अंत हो गया। यह घटना न सिर्फ उस परिवार के लिए सदमे वाली है, बल्कि उन प्रवासी मजदूरों की जिंदगी की मुश्किलों की तरफ भी इशारा करती है, जो दूर दराज के इलाकों में रोजी-रोटी कमाने आते हैं। जिसने भी सुना, बस यही कहा कि आखिर ऐसा क्या हो गया जो हंसती-खेलती जिंदगी यूं अचानक खत्म हो गई?
मामला बठिंडा के बाबा फरीद नगर स्थित गली नंबर 1/5 का है, जहां एक किराए के क्वार्टर में ये दिल दहला देने वाली घटना घटी। मृतक की पहचान बिहार के भवानीपुर के रहने वाले अमरजीत पुत्र विजय कुमार के तौर पर हुई है।
अमरजीत पंजाब आया था, ताकि कुछ पैसे कमाकर अपने परिवार को भेज सके, एक बेहतर जिंदगी की उम्मीद में। लेकिन किसे पता था कि एक सुबह का झगड़ा उसकी जिंदगी की डोर ही काट देगा।
उसकी मौत की खबर जैसे ही इलाके में फैली, हर कोई सकते में आ गया।
सुबह का विवाद और फिर अनहोनी
पुलिस की शुरुआती जांच और पड़ोसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमरजीत अपनी भाभी के साथ इसी किराए के क्वार्टर में रह रहा था। बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन, यानी आज सुबह-सुबह, अमरजीत का अपनी भाभी के साथ किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई थी।
विवाद किस मुद्दे पर था, यह अभी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है, लेकिन ये साफ है कि इस बहस ने अमरजीत को अंदर तक झकझोर दिया था। ऐसे छोटे-मोटे विवाद अक्सर घरों में होते रहते हैं, पर कभी-कभी इनका असर इतना गहरा हो जाता है कि कोई शख्स अपनी जिंदगी खत्म करने जैसा कदम उठा लेता है।
इस घटना ने एक बार फिर से इस बात पर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मानसिक तनाव और घरेलू कलह का किस कदर गंभीर परिणाम हो सकता है।
यह बात अभी भी पहेली बनी हुई है कि सुबह हुई यह अनबन इतनी बड़ी थी या अमरजीत पहले से ही किसी और तनाव से जूझ रहा था, जिसका असर इस झगड़े के बाद सामने आया। पड़ोसियों ने बताया कि अमरजीत काफी मेहनती था और दिहाड़ी मजदूरी करके अपना गुजारा करता था।
वह अक्सर काम पर सुबह ही निकल जाता था, लेकिन उस दिन वह घर पर ही था, और सुबह का यह विवाद शायद उसकी निराशा का आखिरी पड़ाव बन गया।
सूचना और बचाव दल की मौके पर मौजूदगी
घटना की खबर मिलते ही, सबसे पहले समाजसेवी संस्था 'नौजवान वेलफेयर सोसाइटी बठिंडा' के स्वयंसेवक हरकत में आए। अंश मेहता, साहिब सिंह, अतुल जैन और भाविश गोयल जैसे मेहनती स्वयंसेवक बिना देरी किए मौके पर पहुंचे।
उनके साथ थाना कैंट की पुलिस टीम भी पहुंच गई। किसी अनहोनी की आशंका पहले ही जताई जा रही थी, लेकिन जब अंदर जाकर देखा तो नजारा दिल दहला देने वाला था।
अमरजीत अपने ही कमरे में फंदे से झूल रहा था।
पुलिस और संस्था के सदस्यों ने मिलकर शुरुआती कार्रवाई की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति का जायजा लिया और उसके बाद संस्था के सदस्यों की मदद से शव को फंदे से नीचे उतारा गया।
यह एक भावुक और मुश्किल घड़ी थी, जब हर कोई खामोश था और बस यही सोच रहा था कि काश इसे रोका जा सकता। शव को तत्काल पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल पहुंचाया गया ताकि मौत की सही वजह का पता चल सके और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई
थाना कैंट के एसएचओ रघबीर सिंह ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने कहा, "हमने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया है।
शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला ही प्रतीत होता है।" एसएचओ ने आगे बताया कि मृतक अमरजीत यहां अकेला ही रहता था और मजदूरी करके अपना गुजारा चलाता था।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अभी मृतक के परिवार वालों को इस दुखद घटना की जानकारी दे दी गई है और उन्हें बठिंडा बुलाया गया है।
एसएचओ रघबीर सिंह ने स्पष्ट किया, "परिवार वालों के बठिंडा पहुंचने के बाद उनसे बातचीत की जाएगी और उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद ही मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
" फिलहाल पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है और परिवार के आने का इंतजार कर रही है। यह देखना होगा कि अमरजीत के परिवार वाले इस घटना पर क्या कहते हैं और क्या किसी और पहलू पर रोशनी पड़ती है।
एक जवान जिंदगी का यूं अचानक खत्म हो जाना कई सवाल छोड़ गया है, जिनके जवाब शायद अमरजीत के परिवार वालों के आने के बाद ही मिल पाएंगे। यह घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि जिंदगी कितनी नाजुक है और कैसे एक पल का गुस्सा या निराशा किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।




































