आगरा: "डॉक्टर साहब, ऑपरेशन करवाना पड़ेगा।" ये शब्द सुनते ही अच्छे-भले इंसान के पसीने छूट जाते हैं। एक तो बीमारी का डर, ऊपर से चीर-फाड़ और उससे होने वाले दर्द का खौफ। लेकिन अब सोचिए, अगर ऑपरेशन करने वाला कोई साधारण सर्जन नहीं, बल्कि एक ऐसा हाईटेक रोबोट हो जिसकी पकड़ में इंसानी हाथ से भी ज़्यादा सटीकता हो? जी हां, ये कोई साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में जल्द हकीकत बनने वाली है। यहां एम्स जैसे बड़े अस्पतालों की तर्ज पर अब रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिलने वाली है, जिससे जटिल से जटिल ऑपरेशन भी आसान हो जाएंगे और मरीजों को दर्द कम झेलना पड़ेगा।
एसएन मेडिकल कॉलेज को अपग्रेड करने का एक बड़ा प्लान चल रहा है, जिसका नाम है 'इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान'। इसके लिए कुल 1200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया गया है।
इसी प्लान के तहत कॉलेज प्रशासन ने रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक, इस प्लान के तहत तीन सर्जिकल रोबोट खरीदे जाएंगे। इनमें से एक रोबोट तो खुद सरकार मुहैया कराएगी और बाकी के दो रोबोट मेडिकल कॉलेज अपने दम पर, अपने संसाधनों से खरीदेगा।
साल 2027 तक इन रोबोटों के एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद यहां आधुनिक इलाज का एक नया दौर शुरू हो जाएगा।
हाईटेक रोबोट और उनकी कीमत
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार कुल छह मेडिकल कॉलेजों को एक-एक रोबोट देने वाली है, और आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज भी उनमें से एक है।
ये रोबोट कोई सस्ते नहीं हैं, बल्कि इनकी अनुमानित कीमत करीब 25 करोड़ रुपये प्रति रोबोट है। सोचिए, 25 करोड़ का एक रोबोट! ये रोबोट अमेरिका और जर्मनी जैसी टॉप क्लास टेक्नोलॉजी पर आधारित होंगे।
इनकी खरीद प्रक्रिया के लिए सरकार ने एक खास 'टास्क फोर्स' भी बना दी है, जिसने कई कंपनियों के प्रेजेंटेशन भी देख लिए हैं। इसका मतलब है कि काम सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी तेज़ी से चल रहा है।
मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा
ये रोबोटिक तकनीक सिर्फ दिखावा नहीं है, बल्कि इससे मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। हड्डी रोग हो, पेट से जुड़ी कोई जटिल बीमारी हो, छोटे बच्चों के ऑपरेशन हों या फिर कान, नाक, गले (ईएनटी) से जुड़ी सर्जरी, इन सभी विभागों में ये हाईटेक रोबोट बड़ी-बड़ी चुनौतियों को चुटकियों में सुलझा देंगे।
सबसे अच्छी बात ये है कि एसएन मेडिकल कॉलेज के सर्जनों को इन रोबोट्स को चलाने के लिए खास ट्रेनिंग भी दी जा रही है। उन्हें दिल्ली के एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है, ताकि जब ये सुविधा शुरू हो, तो मरीजों को किसी भी तरह की कमी न लगे और उन्हें सबसे बेहतरीन इलाज मिल सके।
आसपास के जिलों को भी लाभ
आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज सिर्फ आगरा के लिए नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए भी एक बड़ी उम्मीद का केंद्र है। आंकड़ों की मानें तो हर महीने करीब 90 हजार मरीज ओपीडी में अपनी बीमारी का इलाज कराने पहुंचते हैं।
इसके अलावा, महीने में लगभग 3700 छोटे-बड़े ऑपरेशन होते हैं और साढ़े पांच हजार मरीज अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराते हैं। ऐसे में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा आने के बाद गंभीर और जटिल से जटिल मामलों का इलाज और भी ज़्यादा सटीकता के साथ हो पाएगा।
इसका सीधा फायदा न सिर्फ आगरा शहर के लोगों को मिलेगा, बल्कि मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी जैसे पड़ोसी जिलों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाएंगी।
रेडियो डायग्नोस्टिक विभाग में भी बदलाव
इस इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट प्लान के तहत सिर्फ सर्जरी तक बात नहीं रुकने वाली है। रेडियो डायग्नोस्टिक विभाग के लिए तो एक पूरी 10 मंजिला नई इमारत बनाने का प्रस्ताव है।
और हां, इसमें भी भविष्य की तकनीक का तड़का लगेगा। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनें लगाने का भी प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
इसका मतलब है कि भविष्य में बीमारियों की पहचान और भी ज़्यादा सटीक और तेज़ी से हो पाएगी, जिससे सही समय पर इलाज शुरू करना संभव होगा।
रोबोटिक सर्जरी के खास फायदे
सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने इस तकनीक के फायदों को और विस्तार से समझाया।
उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी में जहां इंसान के हाथों को बड़े चीरे लगाने पड़ते हैं, वहीं रोबोट बहुत छोटे चीरे से काम कर देता है। इससे रक्तस्राव (खून बहना) और दर्द काफी कम होता है।
साथ ही, संक्रमण का खतरा भी घट जाता है। डॉ.
गुप्ता ने आगे बताया कि ये रोबोट थ्री-डी हाई-डेफिनेशन विजुअल दिखाते हैं और इनकी तकनीक ऐसी होती है कि ये 360 डिग्री तक घूम सकते हैं। यानी, शरीर के उन हिस्सों में भी सटीकता से सर्जरी की जा सकेगी जहां सामान्य तरीके से पहुंचना या काम करना बेहद मुश्किल होता है।
कुल मिलाकर, एसएन मेडिकल कॉलेज सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि भविष्य के इलाज की प्रयोगशाला बनने की ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।




































