जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में एक ऐसी वारदात ने सबको हिलाकर रख दिया है, जहां पुलिस की मौजूदगी में एक युवा नेता को चाकुओं से गोदकर मौत के घाट उतार दिया गया। अरे भाई साहब, जब पुलिस खुद मौके पर मौजूद थी, फिर भी बदमाश इतने बेखौफ होकर हत्या को अंजाम दे गए, तो सोचिए आम आदमी का क्या होगा? इसी हत्याकांड को लेकर अब मृतक के पिता ने सीधा झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उन्हें स्थानीय पुलिस की जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है, क्योंकि उनके इकलौते बेटे की हत्या उन्हीं पुलिसवालों के सामने हुई है। वो अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी, यानी CBI से करवाने की मांग को लेकर जनहित याचिका (PIL) दायर करने जा रहे हैं।
यह मामला करणी सेना के युवा नेता हिमांशु सिंह के कत्ल का है, जिसने शहर में सनसनी मचा दी थी। हिमांशु के पिता अरविंद सिंह का दुख और गुस्सा जायज है।
उनका साफ कहना है, "मेरा इकलौता बेटा था। पुलिस के सामने उसे मार डाला गया।
ऐसे में भला मुझे स्थानीय पुलिस की जांच पर कैसे भरोसा हो सकता है?" इसी भरोसे की कमी के चलते उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की मांग की है और उम्मीद है कि हाईकोर्ट उन्हें न्याय दिलाएगा। इस हत्याकांड के बाद से ही सियासी गलियारों में भी खूब हलचल मची हुई है।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका की तैयारी
हिमांशु सिंह के पिता अरविंद सिंह ने इस बात पर जोर दिया है कि वह जल्द से जल्द झारखंड हाईकोर्ट में PIL फाइल करेंगे। उनकी मुख्य मांग यही है कि इस संवेदनशील मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए।
उनका तर्क साफ है कि जब घटना पुलिस की नाक के नीचे हुई है, तो स्थानीय पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है। वे अपने बेटे के लिए न्याय चाहते हैं और उन्हें लगता है कि एक केंद्रीय एजेंसी ही इस पूरे मामले की परतें खोल सकती है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब पुलिस अपनी तरफ से जांच में जुटी होने का दावा कर रही है, लेकिन परिवार को इस पर भरोसा नहीं है।
सियासी गलियारों में गरमाया मामला: भाजपा की चेतावनी
हिमांशु सिंह हत्याकांड ने झारखंड की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। बीजेपी ने इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी, विधायक भानु प्रताप शाही और अभय सिंह जैसे कई बड़े नेता जमशेदपुर में हिमांशु सिंह के घर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।
इस दौरान भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े किए। आदित्य साहू ने तो यहां तक कह दिया कि यह घटना बेहद गंभीर है।
उन्होंने बताया कि 'पहले अपराधियों ने पुलिस की मौजूदगी में दो युवकों पर चापड़ से हमला किया और फिर पुलिस वाहन में घुसकर हिमांशु सिंह को बाहर खींचा और चाकू मारकर हत्या कर दी।' उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
भाजपा नेताओं ने खुलेआम चेतावनी दी है कि अगर पीड़ित परिवार को जल्द न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन पूरे झारखंड में फैल जाएगा। उनका आरोप है कि प्रदेश में कानून का राज नहीं, बल्कि अपराधियों का बोलबाला है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का मोर्चा
पुलिस अपनी तरफ से लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन अब तक उसे खास सफलता नहीं मिली है, जिसकी उम्मीद परिवार और जनता कर रही है। इस मामले में पुलिस ने सोनू मंडल और राज लोहार नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
इन दोनों को रिमांड पर लेकर 72 घंटे तक गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद दोनों को वापस जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने इन दोनों के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा, इस मामले में पहले से जेल में बंद कुछ नाबालिग आरोपियों के भी बयान लिए गए हैं और उनकी भी जांच की गई है।
पुलिस के मुताबिक, सभी आरोपियों के बयान लगभग एक जैसे ही हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि यह वारदात किसी पुरानी रंजिश का नतीजा नहीं थी, बल्कि अचानक हुए किसी विवाद के बाद ही यह खूनी खेल खेला गया।
हालांकि, पुलिस की यह थ्योरी परिवार और भाजपा नेताओं को हजम नहीं हो रही है, जो पुलिस की भूमिका पर ही सवाल उठा रहे हैं।
फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी, लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी
हिमांशु हत्याकांड में कई बड़े आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। फरार चल रहे आरोपियों में बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के संचालक नीरज सिंह, मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल, विजय कुमार, राहुल दुबे और अमित लोहार शामिल हैं।
पुलिस की पांच अलग-अलग टीमें इन फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। ये टीमें सिर्फ झारखंड में ही नहीं, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे कई राज्यों में लगातार दबिश दे रही हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 'लुकआउट नोटिस' जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मतलब है कि अगर विश्वनाथ मंडल किसी दूसरे राज्य में भागने की कोशिश करता है, तो वहां की पुलिस भी उसे पकड़ने में मदद करेगी।
पुलिस हर मुमकिन कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक ये शातिर अपराधी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
इस मामले में एक और जानकारी सामने आई है। जिस 'डीडी डाडा बार' से जुड़े नीरज सिंह का नाम आरोपियों की सूची में है, उस बार के लाइसेंस की जांच भी पुलिस ने की थी।
जांच में पाया गया है कि डीडी डाडा बार का लाइसेंस वैध था। हालांकि, यह जानकारी अपराध में नीरज सिंह की संभावित भूमिका से अलग है।
अब देखना यह है कि हिमांशु सिंह के पिता की PIL पर हाईकोर्ट क्या रुख अपनाता है और क्या इस मामले की जांच CBI को सौंपी जाती है। परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है, और पूरे राज्य की निगाहें इस पर टिकी हैं।




































