मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार की सुबह एक मां अपनी दस साल की मासूम बेटी के साथ घर के पीछे नहर किनारे जलावन लाने गई थी। उन्हें क्या पता था कि सोमवार रात आई तेज आंधी और बारिश ने उनके लिए मौत का फंदा तैयार कर रखा है। नहर के पानी में छिपा एक टूटा बिजली का तार उनकी जिंदगी का आखिरी पल बन जाएगा। एक पल की चूक और माकीना खातून नाम की 34 वर्षीय महिला ने अपनी जान गंवा दी, जबकि उसकी बच्ची जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।
यह घटना मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड की रहटा पंचायत के हनुमान नगर चकला में हुई है। अक्सर ग्रामीण इलाकों में महिलाएं और बच्चे घर का काम निपटाकर पास के जंगल, खेत या नहर किनारे से सूखी लकड़ियां यानी जलावन इकट्ठा करने जाते हैं।
माकीना खातून भी अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए यही कर रही थीं। मंगलवार की सुबह लगभग आठ बजे का वक्त रहा होगा, जब माकीना खातून अपनी बेटी के साथ निकलीं।
उनके मन में सामान्य दिनचर्या के सिवा और कुछ नहीं था।
हादसे की पूरी कहानी
सोमवार शाम को मधेपुरा और उसके आसपास के इलाकों में तेज आंधी और बारिश ने जमकर तांडव मचाया था। इसी आंधी की वजह से हनुमान नगर चकला में नहर के किनारे से गुजर रहा 33 हजार वोल्ट का एक बिजली का तार टूटकर नहर के पानी में गिर गया था।
पूरी नहर में बिजली का करंट फैल चुका था, लेकिन इस बात की जानकारी किसी को नहीं थी। सुबह के वक्त नहर के किनारे पानी भरा हुआ था और उसमें बिजली का तार अदृश्य रूप से मौत बनकर छिपा था।
माकीना खातून और उनकी 10 वर्षीय बेटी जब जलावन इकट्ठा करते हुए उस जगह पहुंचीं, तो उनकी नजर पानी में गिरे तार पर नहीं पड़ी। शायद पानी का बहाव या गंदा पानी होने की वजह से तार स्पष्ट नहीं दिखा।
जैसे ही मां-बेटी उस करंट वाले पानी के संपर्क में आईं, बिजली ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे।
उन्होंने देखा कि मां-बेटी बिजली के तार की चपेट में आ गई हैं।
मौत और जिंदगी के बीच झूलती बेटी
ग्रामीणों ने फौरन बिजली का कनेक्शन कटवाया और तुरंत मां-बेटी को बचाने की कोशिश की। आनन-फानन में उन्हें मुरलीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
अस्पताल पहुंचते ही ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने माकीना खातून को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में मौजूद लोगों ने बताया कि यह दृश्य बेहद मार्मिक था।
एक मां की जान जा चुकी थी और उसकी मासूम बेटी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी।
बेटी की हालत बेहद गंभीर थी, उसे बिजली का झटका बहुत तेज लगा था, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार करने के बाद बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया।
फिलहाल बच्ची का इलाज चल रहा है, लेकिन उसकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप
इस दुखद घटना से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों और परिजनों में बिजली विभाग के प्रति भारी गुस्सा है।
हनुमान नगर चकला के वार्ड सदस्य मो. अफजल हुसैन ने बताया कि नहर के किनारे बिजली का तार गिरा हुआ था, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी।
उन्होंने सीधे तौर पर बिजली विभाग की लापरवाही को इस हादसे का जिम्मेदार ठहराया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर बिजली विभाग समय रहते गिरे हुए तार को ठीक कर देता या लोगों को इसकी सूचना दे देता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
लोगों ने यह भी कहा कि बिजली विभाग को आंधी-बारिश के बाद ऐसी टूटी हुई लाइनों की तुरंत जांच कर उन्हें ठीक करवाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
अधिकारियों का बयान और कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
मृतका माकीना खातून के शव को पोस्टमार्टम के लिए मधेपुरा सदर अस्पताल भेज दिया गया है, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुरलीगंज के चिकित्सक डॉ.
जितेंद्र कुमार जितेश ने भी बताया कि लगभग 34 वर्षीय महिला को अस्पताल लाए जाने पर जांच के दौरान उनकी मौत की पुष्टि हुई। उन्होंने भी कहा कि मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
वहीं, कुमारखंड के जूनियर इंजीनियर (जेई) शंभू कुमार ने भी इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सोमवार रात आई आंधी-बारिश की वजह से 33 हजार वोल्ट का बिजली का तार टूटकर गिर गया था और उसी की चपेट में आने से महिला की मौत हुई है।
जेई शंभू कुमार ने आश्वासन दिया है कि विभाग की ओर से मृतका के आश्रितों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा। पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है और उम्मीद है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा।

