नवांशहर: सोचिए एक ऐसा खेल जहां न कोई पंचिंग बैग है, न कोई ग्लव्स और न ही बचने का कोई रास्ता। बस दो खिलाड़ी आमने-सामने खड़े होते हैं और एक-दूसरे के चेहरे पर पूरी ताकत से थप्पड़ जड़ते हैं। सुनने में यह किसी फिल्म के सीन जैसा लग सकता है, लेकिन पंजाब की एक बेटी ने इसी खतरनाक खेल में कदम रखकर इतिहास रच दिया है। नवांशहर की मनजोत कौर रत्तू देश की पहली ऐसी फाइटर बनी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'पावर स्लैप' (Power Slap) के रिंग में उतरकर दुनिया को अपनी हिम्मत दिखाई है।
अबू धाबी में हुए इस मुकाबले में मनजोत का सामना निक्की शेफर से था। मुकाबला इतना कड़ा था कि एक जोरदार थप्पड़ लगते ही मनजोत का चेहरा फट गया और खून बहने लगा।
हालत यह थी कि उनके चेहरे पर 9 टांके लगाने पड़े। लेकिन असली कहानी यहाँ से शुरू होती है।
जब खून बह रहा था और दर्द असहनीय था, तब उनके कोच ने उन्हें मुकाबला छोड़ने की सलाह दी, लेकिन मनजोत ने साफ कह दिया कि वह पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने अपनी चोट की परवाह किए बिना तीनों राउंड पूरे किए और 30 में से 23 अंक बटोरे।
हालांकि वह इस क्लोज फाइट में हार गईं, लेकिन उनके जज्बे ने सबको हैरान कर दिया।
मनजोत का यह सफर आसान नहीं रहा। पटियाला फिजिकल कॉलेज से बीपीएड (BPEd) की पढ़ाई करने वाली मनजोत बचपन से ही पढ़ाई के मुकाबले खेल के मैदान में ज्यादा सहज थीं।
उन्हें गणित (Maths) से डर लगता था, इसलिए उन्होंने स्कूल के दिनों से ही खेलों को अपना साथी बना लिया। साल 2015 में उन्होंने किक बॉक्सिंग और कबड्डी से अपने करियर की शुरुआत की।
बॉक्सिंग से पावर स्लैप तक का सफर
मनजोत ने साल 2021 में प्रोफेशनल बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते अपनी पहचान बनानी शुरू की। साल 2022 में थाईलैंड में अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय फाइट जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह किसी से कम नहीं हैं।
इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन और न्यूजीलैंड में भी मुकाबले लड़े। न्यूजीलैंड में जब उन्होंने दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी मिया मोटू को कड़ी टक्कर दी, तब से ही खेल जगत की नजरें उन पर टिक गईं।
पावर स्लैप के बारे में उन्हें अपने कोच जसकरण सिंह ने बताया। कोच दुबई में इस खेल से जुड़े रहे थे और उन्होंने मनजोत को बताया कि भारत की कोई भी लड़की अभी तक इस खेल में नहीं उतरी है।
बस यही बात मनजोत के दिल को छू गई और उन्होंने देश की पहली महिला पावर स्लैप फाइटर बनने का लक्ष्य तय कर लिया।
चोटों का डर और परिवार की चिंता
पावर स्लैप कोई मामूली खेल नहीं है; इसमें चेहरे पर गंभीर चोट लगने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। मनजोत खुद मानती हैं कि शुरुआत में उन्हें इस खेल के नियमों की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन चुनौती को स्वीकार करना उनकी फितरत है।
अबू धाबी के मुकाबले में जब उनके गाल और होंठ अंदर से बुरी तरह फट गए और माउथगार्ड बाहर निकल गया, तब भी उन्होंने हार नहीं मानी।
इस खौफनाक चोट के बाद मनजोत का परिवार काफी घबरा गया। घर वालों ने उनसे विनती की कि वह इस खतरनाक खेल को छोड़ दें, क्योंकि चेहरे पर इतनी गंभीर चोट लगना किसी के लिए भी डरावना हो सकता है।
लेकिन मनजोत के इरादे चट्टान की तरह मजबूत हैं। उनके लिए हार या चोट से ज्यादा जरूरी वह चुनौती थी, जिसे उन्होंने स्वीकार किया था।
अब मनजोत की नजरें अपने अगले मुकाबले पर हैं। वह 18 जुलाई को सिडनी में होने वाली फाइट के लिए तैयारी कर रही हैं।
एक प्रोफेशनल बॉक्सर से लेकर देश की पहली पावर स्लैप फाइटर बनने तक का उनका यह सफर आज दुनिया भर की लड़कियों के लिए एक मिसाल बन गया है कि अगर जुनून हो, तो डर को मात दी जा सकती है।




































