सोनीपत: मंगलवार की सुबह करीब सवा चार बजे का वक्त था। अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 यानी UER-2 पर गांव हलालपुर के पास, जहां आमतौर पर गाड़ियां सरपट भागती हैं, वहां अचानक एक ऐसी चीख गूंजी जिसने सड़क को लहूलुहान कर दिया। यह कोई मामूली टक्कर नहीं थी, बल्कि दो जिंदगियों को एक पल में निगल जाने वाला भीषण हादसा था। दिल्ली से सटा सोनीपत, जो अपनी रफ़्तार के लिए जाना जाता है, उस दिन सुबह-सुबह एक ऐसी खबर का गवाह बना जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। मुर्गों से लदा एक टाटा 407 कैंटर अपने आगे चल रहे प्लाई से भरे आइसर कैंटर से इतनी बुरी तरह टकराया कि मंजर देखकर हर कोई सिहर उठा। टक्कर की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी और जब लोग घटनास्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि दो लोग अपनी जान गंवा चुके थे।
सोनीपत के नागरिक अस्पताल का शवगृह उस सुबह दो अज्ञात शवों का इंतजार कर रहा था, जिनकी पहचान अभी होनी बाकी थी। पुलिस के लिए यह एक मुश्किल चुनौती थी, क्योंकि मृतकों के पास ऐसा कुछ भी नहीं मिला था जिससे उनकी तत्काल पहचान हो सके।
सिर्फ एक कैंटर का रजिस्ट्रेशन नंबर था, जो शायद उन गुमनाम जिंदगियों का पता बता सके।
यह हादसा UER-2 पर, जिसे शहरी विस्तार के लिए बनाया गया था, एक गंभीर सवाल छोड़ गया है। क्या यह तेज रफ़्तार का नतीजा था? या फिर सुबह की नींद और थकान ने किसी चालक की आंखें मूंद दीं? पुलिस फिलहाल इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है, ताकि इस दर्दनाक घटना की परतें खोली जा सकें।
रात के अंधेरे में सड़क बनी मौत का अखाड़ा
दरअसल, यह हादसा मंगलवार सुबह करीब 4 बजकर 10 मिनट पर हुआ। यानी उस वक्त जब रात का अंधेरा छंट रहा होता है और दिन की पहली किरणें आसमान में झांकने की तैयारी में होती हैं।
इसी दौरान, मुर्गों से भरा एक टाटा 407 कैंटर, जिसका नंबर HR 56B-2424 था, गांव हलालपुर की सीमा में सरपट दौड़ रहा था। उसके ठीक आगे, प्लाई से लदा एक दूसरा कैंटर (आइशर कैंटर, नंबर HR 67D-0144) अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा था।
चश्मदीदों के मुताबिक या शुरुआती अनुमान के हिसाब से, शायद टाटा 407 कैंटर की रफ़्तार काफी तेज़ थी या फिर अचानक आगे वाले वाहन ने ब्रेक लगाए होंगे। कुछ भी हो, नतीजा भयावह था।
टाटा 407 कैंटर ने जोरदार टक्कर मारी, और ऐसा लगा मानो लोहे की दो दीवारें आपस में टकरा गई हों।
टक्कर इतनी भीषण थी कि टाटा 407 कैंटर का अगला हिस्सा पूरी तरह से पिचक गया। लोहे का ढांचा मुड़कर एक ढेर में बदल गया था और वाहन के अंदर बैठे लोगों के लिए बचने की कोई गुंजाइश नहीं बची थी।
कैंटर को चला रहा चालक और उसके साथ बैठा एक अन्य व्यक्ति, दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह हादसा इतना भयावह था कि सड़क पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित हो गया और दूर से गुजर रहे लोग भी सहम गए।
पुलिस की पहली प्रतिक्रिया और अज्ञात शव
हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई। कुछ ही देर में सिविल लाइन थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंच चुकी थी।
पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और सबसे पहले क्षतिग्रस्त वाहन से शवों को निकालने का काम शुरू किया। यह एक मुश्किल काम था, क्योंकि वाहन इतनी बुरी तरह से फंसा हुआ था कि शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आखिरकार, दोनों शवों को वाहन से बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए तुरंत नागरिक अस्पताल सोनीपत के शवगृह में भिजवाया गया, ताकि उनका पोस्टमार्टम किया जा सके।
सबसे बड़ी चुनौती थी मृतकों की पहचान करना। पुलिस ने उनके कपड़ों की तलाशी ली, आसपास देखा, लेकिन कोई भी पहचान पत्र या ऐसा दस्तावेज नहीं मिला जिससे उनकी पहचान हो सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि ऐसा कोई सामान नहीं मिला जिससे मृतकों की पहचान तत्काल की जा सके। यह स्थिति हमेशा ही दुखद होती है, जब कोई व्यक्ति ऐसे अचानक चला जाता है और उसके अपने भी उससे अनजान रह जाते हैं।
पहचान की जद्दोजहद और आगे की कार्रवाई
पुलिस अब मृतकों की पहचान के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उनका पहला कदम टाटा 407 कैंटर के रजिस्ट्रेशन नंबर (HR 56B-2424) के आधार पर उसके मालिक से संपर्क स्थापित करना है।
उम्मीद है कि वाहन मालिक से बात करने के बाद ही मृतकों की पहचान हो पाएगी। पुलिस को लगता है कि मालिक ही इन दोनों लोगों के बारे में जानकारी दे पाएगा, चाहे वो चालक हो या उसका हेल्पर, या कोई और व्यक्ति जो उस वक्त कैंटर में सवार था।
सिविल लाइन थाना प्रभारी ने बताया कि "हमारी प्राथमिकता फिलहाल मृतकों की पहचान करना है। एक बार पहचान होने के बाद, उनके परिवारजनों को सूचित किया जाएगा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव उन्हें सौंप दिए जाएंगे।
" उन्होंने आगे कहा कि "इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हम हादसे के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं, जिसमें तेज रफ्तार, लापरवाही या किसी और संभावित कारण की जांच शामिल है।
दोनों कैंटरों के ड्राइवरों की फिटनेस, गाड़ी की मेंटेनेंस और उस वक्त की सड़की स्थिति को भी परखा जाएगा।" पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या घटनास्थल पर कोई सीसीटीवी कैमरा था जिसकी फुटेज से हादसे की असल वजह सामने आ सके।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर से सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

