दिल्ली: क्या हालचाल हैं! आजकल हर हिंदुस्तानी के दिल में बस एक ही ख्वाहिश रहती है – दो पैसे बचाकर सोना-चांदी खरीद लें! शादी-ब्याह हो या बेटी की पढ़ाई, बुरे वक्त का साथी तो यही पीली और सफेद धातु है, है न? तो भाई साहब, अगर आप भी ऐसे ही किसी मौके की तलाश में थे कि कब गोल्ड और सिल्वर के दाम थोड़े गिरें और आप झट से खरीद लें, तो ये खबर आपके लिए है! पिछले कुछ दिनों से सोने-चांदी के भाव में जो गर्मी दिख रही थी, वो अब ठंडी पड़ गई है. जी हां, मंगलवार को घरेलू और इंटरनेशनल मार्केट दोनों में ही सोना और चांदी धड़ाम से गिरे हैं. अब सवाल ये है कि क्या यही सही मौका है इन्वेस्टमेंट का या अभी थोड़ा रुकना चाहिए?
खबर पक्की है कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त महीने की डिलीवरी वाले सोने का कॉन्ट्रैक्ट ₹1,417 सस्ता हो गया है. ये कोई छोटी-मोटी गिरावट नहीं, पूरे 0.96 परसेंट का डिब्बा गुल हुआ है.
अब सोना ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. वहीं, चांदी का भी हाल बेहाल है.
सितंबर डिलीवरी वाली चांदी का कॉन्ट्रैक्ट ₹3,648 नीचे खिसक गया, यानी 1.55 परसेंट का झटका लगा. इसके बाद चांदी ₹2.32 लाख प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है.
सिर्फ अपने यहां ही नहीं, इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने-चांदी के भावों को करंट लगा है. न्यूयॉर्क में सोने का फ्यूचर 1.04 परसेंट गिरकर $4,122.10 प्रति औंस पर आ गया, तो चांदी भी 2.11 परसेंट गिरकर $60.73 प्रति औंस पर लुढ़क गई.
अब इतने बड़े झटके के बाद दिमाग में एक ही सवाल कौंध रहा होगा, कि आखिर ऐसा हुआ क्यों?
आखिर सोने-चांदी के भाव लुढ़के क्यों?
देखिए, मार्केट में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो सोने-चांदी के भाव तय करती हैं. अभी के गिरावट की मुख्य वजहें कुछ ऐसी हैं.
पहला तो अमेरिकी इंटरेस्ट रेट्स को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, वो एक बड़ा फैक्टर है. यूएस फेडरल रिजर्व कब और कितने इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा या घटाएगा, इस पर कोई साफ तस्वीर नहीं है.
दूसरा, दुनिया भर में महंगाई (इंफ्लेशन) का खेल अभी भी जारी है, और ये भी बुलियन मार्केट को कमजोर कर रहा है.
इसके ऊपर से जियोपॉलिटिकल टेंशन ने भी मामला बिगाड़ा है. हॉर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज के टकराने की खबरें आईं, जिससे यूएस डॉलर को सपोर्ट मिला.
सीधी बात है, जब डॉलर मजबूत होता है, तो बाकी करेंसी वालों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, और डिमांड कम होती है. कम डिमांड मतलब कम दाम!
तो क्या ये खरीदारी का सही मौका है या नहीं?
अब असली सवाल पर आते हैं. क्या इन गिरी हुई कीमतों में खरीदने का 'बल्ले-बल्ले' करने का टाइम आ गया है? तो भैया, मार्केट के जानकार अभी थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं.
DSP नेत्रा की जुलाई मार्केट आउटलुक रिपोर्ट बताती है कि अभी कीमती धातुओं में इन्वेस्टमेंट बढ़ाने का सही समय नहीं है. उनकी रिपोर्ट में सोने और चांदी दोनों पर 'न्यूट्रल रुख' अपनाया गया है.
उनका कहना है कि हां, हालिया गिरावट से सोने-चांदी की 'वैल्यूएशन' में थोड़ा सुधार जरूर आया है, लेकिन अभी ये इतना नहीं है कि हम इसमें आँख बंद करके ज्यादा पैसा लगा दें. मतलब, अभी भी 'ओवरवेट एलोकेशन' करने की जरूरत नहीं है.
DSP के वैल्यूएशन फ्रेमवर्क के हिसाब से, सोना अभी अपनी 'थ्योरेटिकल फेयर वैल्यू' से करीब 10.7 परसेंट नीचे ट्रेड कर रहा है. और चांदी तो और भी ज्यादा गिरी हुई है, अपनी थ्योरेटिकल वैल्यू से लगभग 21.8 परसेंट नीचे है.
ये आंकड़े तो बताते हैं कि चीज़ें सस्ती मिल रही हैं, लेकिन DSP के फंड मैनेजर्स कहते हैं कि वो और ज्यादा पॉजिटिव होने से पहले कुछ और चीजें देखना चाहेंगे.
क्या देखना चाहेंगे? तो उनके मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर में एक बड़ा 'डिस्काउंट' और मिलना चाहिए. साथ ही, ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड), सेंट्रल बैंक और ज्वेलरी खरीदने वालों की तरफ से मजबूत डिमांड दिखनी चाहिए.
और सबसे अहम, यूएस डॉलर कमजोर पड़ना चाहिए. जब ये सब होगा, तभी वो सोने-चांदी में खुलकर इन्वेस्टमेंट करने की सलाह देंगे.
तो कुल मिलाकर, अभी तो थोड़ा रुकने का मूड बना हुआ है मार्केट का.
बाजार के जानकार क्या कहते हैं?
अब बात करते हैं एक्सपर्ट्स की. मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह ने एक जरूरी बात कही है.
उनके मुताबिक, मंगलवार को जो गिरावट आई है, उसके बावजूद MCX गोल्ड अभी 'कंसोलिडेशन फेज' में है. कंसोलिडेशन फेज का मतलब ये समझ लीजिए कि कीमतें न बहुत ज्यादा ऊपर जा रही हैं और न ही बहुत ज्यादा नीचे आ रही हैं, बल्कि एक रेंज में घूम रही हैं.
रवि सिंह ने ये भी बताया कि सोने का 'ओवरऑल टेक्निकल स्ट्रक्चर' अभी भी मजबूत बना हुआ है. कीमतें अभी भी ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के 'सपोर्ट ज़ोन' से ऊपर टिकी हुई हैं.
मतलब, ये एक ऐसी लक्ष्मण रेखा है जिसके नीचे जाने पर मामला और बिगड़ सकता है, पर अभी तक सोना उसके ऊपर ही है. उनका कहना है कि तुरंत जो 'रेजिस्टेंस' दिख रहा है, वो 21-दिन के 'एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज' के पास है, जो लगभग ₹1.48 लाख के आसपास है.
अगर सोने की कीमतें इस ₹1.48 लाख के लेवल को पार कर जाती हैं, तो इसे एक 'डिसाइसिव ब्रेकआउट' माना जाएगा. इस ब्रेकआउट के बाद सोने के दाम ₹1.50 लाख से ₹1.51 लाख के जोन में जा सकते हैं.
तो अभी तक तो खेल इस ₹1.48 लाख के रेजिस्टेंस पर अटका हुआ है. अगर ये पार हुआ, तो शायद सोने में फिर से रौनक लौट सकती है.
आगे क्या होने वाला है?
मार्केट में सब लोग अभी एक बड़ी चीज का इंतजार कर रहे हैं – वो है यूएस फेडरल रिजर्व की जून पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स. ये मिनट्स हमें बताएंगे कि फेडरल रिजर्व ने अपनी पिछली मीटिंग में क्या-क्या बातें की थीं, और भविष्य में इंटरेस्ट रेट्स को लेकर उनका क्या रुख रहने वाला है.
ये एक ऐसा सुराग होगा जो बुलियन यानी सोने-चांदी की कीमतों पर सीधा असर डालेगा. तो अभी के लिए तो बस इंतजार और निगरानी का खेल चल रहा है.
अगर आपके पास भी कोई इन्वेस्टमेंट प्लान है, तो एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अभी थोड़ा रुकिए, मार्केट को समझने दीजिए, फिर एक्शन लीजिएगा. जल्दबाजी में कोई ऐसा कदम न उठाएं, जिसका बाद में मलाल हो.






































