हजारीबाग: रात का तीसरा पहर था, हजारीबाग का अन्नदा चौक, जो दिनभर की भागदौड़ के बाद थोड़ी शांति की सांस ले रहा था. देर रात तक जगमगाती स्ट्रीट फूड की गुमटियां भी अपने ग्राहकों को विदा कर रही थीं. लेकिन बीती रात, इस शांत माहौल में अचानक चीख-पुकार मच गई. देखते ही देखते एक गुमटी से आग की लपटें उठने लगीं और पलक झपकते ही आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि उसकी ऊंची-ऊंची लपटें आसमान को छूने लगीं. जिसने भी यह मंजर देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए और इलाके में हड़कंप मच गया.
यह कोई सामान्य आग नहीं थी; अन्नदा चौक जैसे व्यस्त इलाके में, जहां एक के बाद एक दुकानें और गुमटियां सटी हुई हैं, वहां ऐसी आग किसी बड़े खतरे का संकेत थी. आसपास मौजूद दुकानदार और राहगीर जो रात के खाने या घूमने के लिए निकले थे, सब दहशत में आ गए.
आनन-फानन में लोग अपनी-अपनी दुकानें खाली करने लगे, क्योंकि डर था कि कहीं आग एक से दूसरी दुकान तक न पहुंच जाए. कुछ जांबाज लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश भी की, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उनकी सारी कोशिशें धरी की धरी रह गईं.
इस अफरा-तफरी के बीच, इलाके में कुछ देर के लिए तो जाम की स्थिति भी बन गई और चारों तरफ बस डर और धुएं का गुबार था.
आग बुझाने में दमकल की घंटों मशक्कत
जैसे ही इस भीषण आग की खबर दमकल विभाग तक पहुंची, उनकी टीमें तुरंत एक्शन में आ गईं. सायरन बजाती हुई दमकल की गाड़ियां तेजी से अन्नदा चौक की तरफ भागीं.
मौके पर पहुंचते ही फायर ब्रिगेड की टीम ने मोर्चा संभाला और आग बुझाने का अभियान शुरू कर दिया. लेकिन, आग इतनी भयानक थी और गुमटी में गैस सिलेंडर तथा अन्य ज्वलनशील सामग्री होने की वजह से इसे नियंत्रित करना आसान नहीं था.
फायरफाइटर्स ने अपनी जान हथेली पर रखकर घंटों तक कड़ी मशक्कत की, तब कहीं जाकर आग को फैलने से रोका जा सका और उस पर काबू पाया जा सका.
जब तक आग बुझाई गई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. स्ट्रीट फूड गुमटी में रखा सारा सामान पूरी तरह से जलकर खाक हो चुका था.
लकड़ी, प्लास्टिक, खाद्य सामग्री, गैस चूल्हे, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स के उपकरण, सब कुछ बस राख के ढेर में बदल चुका था. गुमटी के मालिक के लिए यह एक बड़ा सदमा था, क्योंकि यह दुकान उनकी रोजी-रोटी का इकलौता जरिया थी.
स्थानीय लोगों ने भी दमकल की टीम का काफी सहयोग किया, और गनीमत रही कि आग आसपास की अन्य दुकानों तक नहीं फैली, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया.
लाखों का नुकसान और मालिक की आपबीती
इस अग्निकांड में गुमटी के मालिक को लाखों रुपए का भारी नुकसान हुआ है. उनकी आँखों में आंसू थे और आवाज़ में दर्द.
उन्होंने बताया कि यह गुमटी उनके परिवार के पालन-पोषण का एकमात्र साधन थी और अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे अपनी जिंदगी की गाड़ी कैसे आगे बढ़ाएंगे. आग ने सिर्फ सामान ही नहीं जलाया, बल्कि उनके सपनों और भविष्य को भी राख कर दिया.
जिस जगह शाम को गरमा गरम पकवानों की खुशबू फैलती थी, वहां अब सिर्फ जले हुए मलबे की बदबू बाकी थी.
घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया और स्थानीय लोगों से पूछताछ की.
अग्निशमन विभाग के अधिकारी भी आग लगने के कारणों की गहनता से जांच कर रहे हैं. शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन शॉर्ट सर्किट या गैस रिसाव जैसी संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
जांचकर्ताओं की टीमें हर पहलू को खंगाल रही हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके.
प्रशासन की अपील
इस दुखद घटना के बाद, स्थानीय प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों और अपनी दुकानों में अग्नि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करें. गैस सिलेंडरों और बिजली के उपकरणों के सही रखरखाव पर ध्यान दें, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके.
अन्नदा चौक पर लगी यह आग एक चेतावनी है, जो हमें सुरक्षा नियमों के प्रति सतर्क रहने की याद दिलाती है. अब सवाल यह है कि इस गरीब दुकानदार का क्या होगा, और उसे इस भारी नुकसान से उबरने में कौन मदद करेगा?




































