भोपाल: देश के कई हिस्सों में मानसून ने दस्तक तो दे दी है, लेकिन अपने साथ कहीं आफत बनकर आया है तो कहीं अभी भी इंतजार बढ़ा रहा है। मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कुदरत का कहर बिजली के रूप में बरसा है, जिसने एक ही दिन में 8 जिंदगियां लील लीं। वहीं, उत्तराखंड में आसमान से बरसती आफत ने नदियों को उफान पर ला दिया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और पर्यटकों के लिए मशहूर राफ्टिंग तक पर रोक लगानी पड़ी है। दूसरी तरफ, मौसम विभाग ने जुलाई महीने के लिए जो अनुमान जारी किया है, वह देश के बड़े हिस्से के लिए कम बारिश की चिंता बढ़ा रहा है, जबकि जून का महीना तो पहले ही 1901 के बाद पांचवीं सबसे कम बारिश वाला दर्ज हो चुका है। कुल मिलाकर, देश का मौसम अभी एक अबूझ पहेली बना हुआ है, कहीं भीषण गर्मी तो कहीं बारिश से तबाही का मंजर दिख रहा है।
मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री के साथ ही आंधी-बारिश का दौर तेज हो गया है। हरदा और खरगोन जिलों में आसमान से गिरी बिजली ने तीन लोगों की जान ले ली, जबकि बैतूल में एक ही परिवार के चार लोग इसकी चपेट में आकर झुलस गए, जो इस बात का सबूत है कि मानसून की शुरुआत कितनी खतरनाक हो सकती है।
इसके अलावा, चंपा नदी के अचानक उफान पर आने से बाइक समेत दो युवक उसमें बह गए, जिनकी तलाश जारी है। ये घटनाएं बताती हैं कि कुदरत का गुस्सा कितना भयानक हो सकता है, जहां कुछ मिनटों की बारिश और बिजली लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।
सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, पड़ोसी राज्य बिहार में भी बिजली गिरने की घटनाओं ने पांच लोगों की जान ले ली। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में भी मंगलवार शाम पिकनिक मनाने गए तीन दोस्त बरसाती नाले के तेज बहाव में बह गए।
इस दर्दनाक हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया और तीसरा लापता बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हम इन मौसमी आपदाओं से निपटने के लिए तैयार हैं? ये आकस्मिक घटनाएं हमें चेतावनी दे रही हैं कि हमें प्रकृति के बदलते मिजाज के प्रति अधिक सतर्क और जिम्मेदार होने की जरूरत है।
मौसम का ताजा हाल: बिजली का कहर और नदियां उफान पर
जैसा कि हमने बताया, मध्य प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ ही आंधी और बारिश ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। हरदा और खरगोन में बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई।
इन इलाकों में अचानक हुई बारिश के साथ बिजली गिरने की घटनाएं इतनी तेज थीं कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। बैतूल जिले में तो बिजली ने एक ही परिवार के चार सदस्यों को अपनी चपेट में ले लिया, गनीमत रही कि वे झुलस कर बच गए, लेकिन घटना ने पूरे परिवार को दहला दिया है।
चंपा नदी में दो युवकों के बाइक समेत बह जाने की खबर ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने लोगों को हैरान कर दिया और ये दिखाता है कि छोटी नदियां और नाले भी बारिश के मौसम में कितने खतरनाक हो सकते हैं।
बिहार में भी आकाशीय बिजली का प्रकोप जारी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत की खबर आई है।
यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि ग्रामीण इलाकों में और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए बिजली गिरना कितना बड़ा खतरा बन जाता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में मंगलवार शाम एक और दुखद घटना हुई।
पिकनिक मनाने गए तीन लोग बरसाती नाले के तेज बहाव में फंस गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल की कोशिशों के बावजूद, इनमें से एक युवक की जान चली गई, एक गंभीर रूप से घायल है, जबकि तीसरे की तलाश अब भी जारी है।
ये घटनाएं मानसून के दौरान नदियों और नालों से दूर रहने की चेतावनी देती हैं।
उत्तराखंड, जो अपनी खूबसूरत वादियों और नदियों के लिए जाना जाता है, वहां भी बारिश ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। देहरादून में रिस्पना नदी अब उफान पर है, जिससे निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है।
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि प्रसिद्ध संगम की सीढ़ियां भी पानी में डूब गई हैं। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ऋषिकेश में तो मंगलवार शाम से ही राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियों पर 31 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी गई है।
यह कदम पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, लेकिन यह भी दिखाता है कि मानसून का असर कितना व्यापक हो सकता है।
मानसून की चाल: कहां पहुंचा, कितनी बारिश और IMD का अनुमान
अच्छी खबर यह है कि मानसून अब देश के बड़े हिस्से को कवर कर चुका है। मंगलवार दोपहर को इसने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अपनी दस्तक दी।
इसी के साथ, मानसून ने अब तक देश के कुल 26 राज्यों को अपनी आगोश में ले लिया है। इससे पहले, 24 जून को इसने मध्य प्रदेश और गुजरात में एंट्री मारी थी, जिसके बाद से ही इन राज्यों में बारिश का दौर जारी है।
हालांकि, मानसून की रफ्तार और उसका वितरण अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।
मौसम विभाग (IMD) ने जुलाई महीने के लिए जो अनुमान जारी किया है, वह देशभर में सामान्य से कम बारिश की संभावना जता रहा है। इसका मतलब है कि कई इलाकों को अभी भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है या खेती-किसानी पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
हालांकि, विभाग ने यह भी कहा है कि उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है, जो इन इलाकों के लिए राहत की बात हो सकती है। यह अनुमान अल नीनो के प्रभाव के चलते मानसूनी बारिश पर पड़ने वाले असर को भी दर्शाता है।
बीते जून महीने में देश में बारिश का आंकड़ा और भी चौंकाने वाला रहा है। इस साल जून में 1901 के बाद पांचवीं सबसे कम बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य रूप से 165.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 99.
5 मिमी ही दर्ज की गई, जो सामान्य से 39.8 प्रतिशत कम है।
देश के कुल 36 मौसम उपखंडों में से 24 में सामान्य से कम बारिश हुई है, जो पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पूरे जम्मू-कश्मीर में पहुंचने की उम्मीद है, जिससे इन इलाकों में गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है।
जलवायु संकट का बच्चों पर असर: यूनिसेफ की चिंताजनक रिपोर्ट
जहां एक तरफ मानसून की बेरुखी और बिजली का कहर है, वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। यूनिसेफ की 'चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026' ने भारत के बच्चों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 8.93 करोड़ बच्चे ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां हीटवेव यानी लू का खतरा सबसे ज्यादा है।
यह आंकड़ा डराने वाला है क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में बच्चे सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहे हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि देश के लगभग 99.7 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी जलवायु संबंधी खतरे का सामना कर रहे हैं।
इनमें से 96.2 प्रतिशत भारतीय बच्चे सूखे के खतरे वाले क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 92 प्रतिशत बच्चे तेज गर्मी से प्रभावित हैं, जहां तापमान अक्सर 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है।
यह रिपोर्ट न केवल बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर बढ़ते जोखिम को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि जलवायु संकट हमारे भविष्य की पीढ़ी को कैसे सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। यह हम सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने होंगे।
आने वाले दो दिन का अनुमान
- 2 जुलाई: छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, केरल, गोवा, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश की संभावना है। इन राज्यों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
- बिहार में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है, जिसके साथ हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। मध्य प्रदेश, ओडिशा, पूर्वी राजस्थान और तमिलनाडु समेत कई अन्य राज्यों में भी तेज हवाएं चलने की उम्मीद है।
- राजस्थान में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है, जिससे धूल भरी आंधी और बिजली गिरने का भी खतरा रहेगा।
कुल मिलाकर, देश में मौसम का मिजाज काफी अप्रत्याशित बना हुआ है। जहां कुछ राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी है, वहीं बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश का अनुमान चिंता बढ़ा रहा है।
लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनियों पर ध्यान देना और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।


