पटना: बिहार की माटी हमेशा से कहानियों का खजाना रही है। कभी राजनीति के दाँव-पेंच तो कभी अपराध की वो परतें, जो इंसान की लालच और मजबूरियों को उजागर करती हैं। ऐसी ही एक कहानी अब पटना से निकलकर सामने आई है, जहाँ एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को पहले अगवा किया गया, फिर पुलिस ने फिल्मी स्टाइल में उसे छुड़ाया और चार आरोपियों को धर दबोचा। लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है। इस अपहरण के पीछे बालू के ठेके का वो काला खेल छुपा है, जिसमें 13 लाख रुपये की हेराफेरी का इल्जाम है और अब शिक्षक महोदय की अपनी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पता चला है कि जिस शिक्षक को अगवा किया गया था, वो खुद बालू के धंधे में भी हाथ आजमाते रहे हैं!
मामला औरंगाबाद के नबीनगर में एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक उपेंद्र कुमार सिंह का है। उपेंद्र झारखंड के जपला के रहने वाले हैं, लेकिन परिवार के साथ पटना के शास्त्रीनगर की एजी कॉलोनी में रहते हैं।
उनकी ज़िंदगी ठीक-ठाक चल रही थी, लेकिन चार साल पहले उन्होंने एक ऐसा दांव खेला, जो आज उनकी जान का दुश्मन बन गया। उन्होंने सोनू कुमार नाम के शख्स से बालू घाट का ठेका दिलाने के नाम पर पूरे 13 लाख रुपये लिए थे।
ठेका मिला नहीं, और सोनू कुमार बेचैन होकर अपने पैसे वापस मांगने लगा। जब काफी दबाव के बाद भी पैसा वापस नहीं मिला, तो सोनू ने अपहरण का खतरनाक रास्ता चुन लिया।
बालू के ठेके का विवाद और अपहरण की साजिश
पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार अपने पैसे वापस पाने के लिए लगातार उपेंद्र पर दबाव बना रहा था। जब सारे पैंतरे फेल हो गए, तो उसने एक शातिर प्लान बनाया।
सोनू ने पहले एक महिला का सहारा लिया। उस महिला ने उपेंद्र को फोन किया और मिलने के लिए आरा बुलाया।
उपेंद्र उस वक्त पटना की एजी कॉलोनी में थे। उन्होंने महिला से कहा कि वह आरा में उनका इंतजार करें, वो आ रहे हैं।
अपनी पत्नी को उन्होंने बताया कि उन्हें दानापुर में कोई ज़रूरी काम आ गया है और वो वहीं जा रहे हैं। लेकिन हकीकत में उपेंद्र आरा की तरफ निकल गए, जहाँ उनकी किस्मत का एक नया पन्ना खुलने वाला था।
जैसे ही उपेंद्र आरा पहुँचे, वह महिला गायब थी। उसकी जगह उन्हें सोनू कुमार और उसके तीन साथी मिले, जिनके नाम मोहम्मद इरशाद आलम, राकेश कुमार और दिवाकर कुमार सिंह हैं।
ये सभी रोहतास के कोचस के रहने वाले हैं। सोनू और उसके साथियों ने उपेंद्र को देखते ही जबरन गाड़ी में बिठाना शुरू कर दिया।
उपेंद्र ने विरोध किया, तो उन्होंने मारपीट भी की। इसके बाद उसे अगवा कर वहाँ से चंपत हो गए।
इस अपहरण की जानकारी जब पुलिस को लगी, तो हड़कंप मच गया।
फिरौती की मांग और पत्नी की शिकायत
अपहरण करने के बाद, सोनू कुमार ने उपेंद्र के मोबाइल फोन से ही उनकी पत्नी को कॉल किया। उसने सिर्फ 13 लाख रुपये ही नहीं माँगे, बल्कि सूद समेत पूरे 20 लाख रुपये की डिमांड रख दी।
जैसे ही उपेंद्र की पत्नी को यह पता चला कि उनके पति का अपहरण हो गया है और फिरौती मांगी जा रही है, उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उन्होंने बिना देर किए शास्त्रीनगर थाने में सोमवार को इस पूरे मामले की एफआईआर दर्ज करा दी।
पुलिस तुरंत हरकत में आ गई, क्योंकि मामला एक सरकारी शिक्षक के अपहरण का था और फिरौती की भारी-भरकम रकम माँगी जा रही थी।
पुलिस की धरपकड़ और नए खुलासे
पटना के सचिवालय एसडीपीओ-2 साकेत कुमार ने इस ऑपरेशन की बागडोर संभाली। पुलिस टीम ने तुरंत उपेंद्र के मोबाइल लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया।
आधुनिक तकनीक और सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए, पुलिस ने अपहरणकर्ताओं की हर हरकत पर नज़र रखी। सोमवार की देर रात पुलिस को कामयाबी मिली।
मोबाइल लोकेशन के आधार पर कैमूर जिले के कुदरा इलाके से अपहृत शिक्षक उपेंद्र कुमार सिंह को सकुशल बरामद कर लिया गया।
शिक्षक उपेंद्र को छुड़ाने के साथ ही पुलिस ने मौके से मुख्य आरोपी सोनू कुमार और उसके तीनों साथियों, मोहम्मद इरशाद आलम, राकेश कुमार और दिवाकर कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। ये चारों रोहतास के कोचस के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने इन सभी को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि इस पूरे अपहरण की साज़िश और इसमें शामिल हर पहलू को समझा जा सके।
लेकिन, इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जो इस कहानी को और दिलचस्प बना देता है। पुलिस की शुरुआती जाँच में पता चला है कि शिक्षक उपेंद्र कुमार सिंह के पास सिर्फ सरकारी नौकरी ही नहीं है, बल्कि वो एक हाइवा, एक क्रेटा, एक आई10 और एक बोलेरो जैसी कई गाड़ियों के मालिक भी हैं।
इससे भी बड़ा खुलासा यह हुआ है कि उपेंद्र कुमार सिंह खुद भी बालू के कारोबार से जुड़े हुए हैं। अब पुलिस इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रही है कि बालू के कारोबार में उपेंद्र की क्या भूमिका थी।
क्या वह सिर्फ एक मध्यस्थ थे, या खुद भी इस धंधे में गहराई से लिप्त थे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में और भी कई रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं। फ़िलहाल, पुलिस सभी पहलुओं से जाँच कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ़ हो जाएगी।


