पटना: सोचिए, जिस बायोमेट्रिक सिस्टम को सरकार ने नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षा की सबसे मजबूत ढाल बनाया था, उसे महज 400 रुपये दिहाड़ी पर काम करने वाले कुछ लड़कों ने मिलकर ध्वस्त कर दिया। यह कोई फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि बिहार से सामने आया एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा है जिसने पूरी परीक्षा सुरक्षा प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। परीक्षा माफियाओं ने पेपर लीक का पुराना रास्ता छोड़कर एक ऐसा 'जुगाड़' निकाला, जिससे असली छात्र की जगह सॉल्वर (Dummy Candidate) को परीक्षा हॉल तक पहुंचाना आसान हो गया।
पूरा खेल बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को क्रैक करने का था। जब सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए, तो माफियाओं ने अपना रास्ता बदल लिया।
उन्होंने सीधे उस कंपनी पर वार किया जिसे बायोमेट्रिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। खबर यह है कि 'इनोवेटिव व्यू' नाम की कंपनी में करीब 200 लड़कों को नौकरी पर रखवा दिया गया।
ये लड़के किसी काबिलियत की वजह से नहीं, बल्कि सिस्टम की रेकी करने और सुरक्षा चक्र को तोड़ने के लिए भर्ती किए गए थे।
इन लड़कों का काम बहुत सीधा और खतरनाक था। जब कोई असली कैंडिडेट अपने सॉल्वर के साथ सेंटर पहुंचता, तो ये अंदर बैठे कंपनी के कर्मचारी असली कैंडिडेट का बायोमेट्रिक स्कैन कर लेते थे।
सिस्टम को लगता था कि असली छात्र ने एंट्री ली है, जबकि असल में सॉल्वर को एग्जाम हॉल के अंदर भेज दिया जाता था और असली कैंडिडेट चुपचाप बाहर निकल जाता था। यानी सुरक्षा की सबसे बड़ी दीवार को अंदर से ही ढहा दिया गया।
बायोमेट्रिक सुरक्षा तोड़ने की साजिश
इस पूरे सिंडिकेट के पीछे अर्पित सिंह, रविशंकर और रंजीत कुमार जैसे नाम सामने आए हैं। जांच में पता चला कि माफियाओं ने पहले कोशिश की कि कंपनी के बड़े अधिकारियों के साथ डील की जाए, ताकि ऊपर से ही सब मैनेज हो जाए।
उन्होंने नोएडा में बैठे कंपनी के बड़े अधिकारियों से संपर्क करने की भी कोशिश की, लेकिन वहां उनकी दाल नहीं गली। जब बड़े स्तर पर सेटिंग नहीं हुई, तो माफियाओं ने 'ग्रासरूट लेवल' पर हमला करने का प्लान बनाया।
उन्होंने स्टेट लेवल पर सेटिंग की और कंपनी में बायोमेट्रिक जांच के लिए लगाए जाने वाले निचले स्तर के कर्मचारियों की भर्ती करवा दी। ये वही लड़के थे जिन्हें प्रतिदिन महज 400 रुपये का वेतन मिल रहा था, लेकिन इनके जरिए लाखों के सौदे किए गए।
इन कर्मचारियों ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया और डमी कैंडिडेट्स की एंट्री को मुमकिन बना दिया।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा
इस बड़े घोटाले का खुलासा तब हुआ जब राज्य सरकार की खुफिया जांच एजेंसी को कुछ इनपुट मिले। जब इनपुट को क्रॉस चेक किया गया, तो लखीसराय पुलिस ने परीक्षा के दौरान 18 लड़कों को गिरफ्तार किया।
ये सभी लड़के उसी 'इनोवेटिव व्यू' कंपनी में हाल ही में भर्ती हुए थे। जांच अधिकारियों का मानना है कि बिहार के अलग-अलग जिलों में ऐसे 200 से ज्यादा कर्मचारी भर्ती किए गए थे, जो इस पूरे खेल का हिस्सा थे।
हैरानी की बात यह है कि यह नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं था। जांच में संकेत मिले हैं कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान के परीक्षा माफियाओं ने भी केंद्र सरकार की सुरक्षा लेयर को तोड़ने के लिए इसी तरह के 'डमी कर्मचारियों' की चेन बनाने की प्लानिंग कर रखी थी।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि कितने सेंटरों पर इस तरीके से सॉल्वर बैठाए गए और इस सिंडिकेट में और कौन-कौन शामिल है।

