पटना: चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी में जब आप अपने घर में एसी या कूलर की ठंडी हवा का लुत्फ़ उठा रहे होते हैं, तब शहर के डिलीवरी बॉयज़ और कूरियर वाले भैया अपनी स्कूटी पर सामान ढोते हुए पसीने से तरबतर होते हैं। इनकी मुश्किलों को थोड़ा आसान करने के लिए पटना नगर निगम ने एक अनोखी पहल की थी – शहर में दो एयर कंडीशनर लाउंज बनाए थे, ख़ास तौर पर गिग वर्कर्स के लिए। अब खबर है कि इन ठंडी-ठंडी जगहों के रखरखाव की ज़िम्मेदारी एक नई एजेंसी को सौंपी जाएगी, जिसके लिए पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बाकायदा टेंडर भी जारी कर दिया है।
ज़रा सोचिए, जब पारा 40 पार कर जाए और आपकी बाइक तप रही हो, ऐसे में अगर कोई ठंडा-ठंडा कमरा मिल जाए जहाँ आप दो पल सुस्ता सकें, मोबाइल चार्ज कर सकें और थोड़ा पानी पी सकें, तो कितनी राहत मिलेगी! इन्हीं गिग वर्कर्स, यानी डिलीवरी बॉयज़, कूरियर वालों, और ऐसे ही मेहनती लोगों के लिए पटना में ऐसे दो लाउंज तैयार किए गए हैं। पहला लाउंज गांधी मैदान के गेट नंबर-4 पर है, और दूसरा इनकम टैक्स गोलंबर के पास।
अब तक तो ये नगर निगम के अधीन थे, लेकिन अब इनका पूरा ऑपरेशन और मेंटेनेंस एक प्राइवेट एजेंसी संभालेगी।
गर्मी से जंग; राहत की ठंडी छाँव
पटना की सड़कों पर अक्सर आपने देखा होगा कि डिलीवरी बॉयज़ दोपहर की तपती धूप में खाना या सामान लेकर भाग रहे होते हैं। कई बार तो घंटों इंतज़ार भी करना पड़ता है।
ऐसे में उन्हें किसी रेस्टोरेंट या दुकान के बाहर खड़े होकर या धूप में ही बैठे देखा जा सकता है। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए चेन्नई मॉडल से प्रेरणा लेकर ये प्री-फैब्रिकेटेड एसी लाउंज तैयार किए गए थे।
इनका मक़सद सिर्फ गिग वर्कर्स को राहत देना नहीं था, बल्कि आम लोग भी अगर थक जाएं या गर्मी से बेहाल हों, तो यहाँ आकर थोड़ा आराम कर सकें।
हर लाउंज में एक साथ क़रीब 15 लोग आराम से बैठ सकते हैं, यानी दोनों लाउंज में कुल 30 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। लाउंज के अंदर मोबाइल चार्जिंग के लिए पॉइंट भी लगे हैं, ताकि मोबाइल की बैटरी खत्म होने पर चार्ज किया जा सके, जो कि उनके काम के लिए बेहद ज़रूरी है।
साथ ही, ठंडे पीने के पानी की भी मुकम्मल व्यवस्था की गई है। यह सब कुछ गिग वर्कर्स के लिए बिल्कुल मुफ़्त है।
उन्हें यहाँ बैठकर एक पैसा भी नहीं देना है। यह उनके लिए एक बड़ी सुविधा है।
आम जनता के लिए मामूली चार्ज, जीविका दीदियों का ख़ास स्टॉल
हाँ, लेकिन अगर आप गिग वर्कर नहीं हैं और इन लाउंज में आराम करना चाहते हैं, तो आपको एक मामूली चार्ज चुकाना होगा। पटना नगर निगम ने यहाँ अनावश्यक भीड़ या अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रति घंटे 4 रुपये का शुल्क तय किया है।
यह चार्ज इतना कम है कि कोई भी आम नागरिक आसानी से इसे देकर गर्मी से थोड़ी राहत पा सकता है। इस पहल का एक और ख़ास पहलू है – जीविका दीदियाँ।
इन लाउंज के बाहर जीविका दीदियों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहाँ वे ताज़ा और किफायती दाम पर रिफ्रेशमेंट उपलब्ध कराएंगी। गर्मियों में छाछ, आम पन्ना जैसे पारंपरिक पेय यहाँ बेहद कम कीमत पर मिलेंगे, जिससे न सिर्फ़ लोगों को ताज़गी मिलेगी, बल्कि जीविका दीदियों को भी रोज़गार का एक नया ज़रिया मिलेगा।
स्मार्ट सिटी का टेंडर; एजेंसी की ज़िम्मेदारियाँ
अब जो नया अपडेट है वो यह कि पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इन दोनों लाउंज के संचालन और रखरखाव के लिए एक एजेंसी के चयन हेतु टेंडर जारी कर दिया है। इस एजेंसी की ज़िम्मेदारियाँ महज़ साफ़-सफाई तक सीमित नहीं होंगी, बल्कि इसमें सुरक्षा व्यवस्था भी शामिल होगी।
एजेंसी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि लाउंज में बिजली और पानी की आपूर्ति लगातार बनी रहे, यानी कोई कटौती न हो। एयर कंडीशनर और अन्य सुविधाओं का नियमित रखरखाव भी इसी एजेंसी के माथे होगा, ताकि लाउंज हमेशा अच्छी हालत में रहें और लोगों को पूरी सुविधा मिल सके।
टेंडर के दस्तावेज़ों के अनुसार, एजेंसी को इन सभी कार्यों को पूरी ज़िम्मेदारी और दक्षता के साथ निभाना होगा। इससे लाउंज की गुणवत्ता और संचालन में और भी सुधार आने की उम्मीद है।
सफलता की कहानी; भविष्य की योजना
पटना नगर निगम का यह प्रोजेक्ट अगर सफल होता है और लोगों को इससे वाकई फ़ायदा पहुँचता है, तो आने वाले दिनों में शहर में और भी कई जगहों पर ऐसे एसी लाउंज बनाए जा सकते हैं। यह सिर्फ गिग वर्कर्स के लिए ही नहीं, बल्कि एक स्मार्ट सिटी के तौर पर पटना की पहचान भी मजबूत करेगा, जहाँ नागरिकों की सुविधा और आराम को प्राथमिकता दी जा रही है।
ऐसे लाउंज शहरों में उन लोगों के लिए जीवनरेखा बन सकते हैं, जिन्हें धूप और गर्मी में घंटों काम करना पड़ता है। यह पहल दिखाती है कि कैसे छोटे-छोटे क़दमों से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं और आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
उम्मीद है कि नई एजेंसी के आने से इन लाउंज का संचालन और भी सुचारू होगा और ये शहर के मेहनतकश लोगों के लिए सचमुच राहत की जगह बन पाएंगे।

