मुंबई: आज मार्केट में जो हुआ, उसे देखकर कई लोगों के चेहरे खिल गए होंगे और कुछ ऐसे भी होंगे, जो बस देख ही रहे होंगे. शेयर बाजार में आज लगातार पाँचवें दिन रौनक बनी रही. सेंसेक्स और निफ्टी ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सब भौचक्के रह गए. सेंसेक्स तो 300 अंकों से ज्यादा उछल गया और निफ्टी ने 24500 का लेवल पार कर लिया. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि बड़े इंडेक्स में तेजी के बावजूद, मार्केट के छोटे खिलाड़ियों यानी मिडकैप और स्मॉलकैप में थोड़ा दबाव दिखा. तो आखिर ये कमाल हुआ कैसे? क्या वजह थी इस धमाकेदार शुरुआत की?
बता दें, निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में सुबह से ही जोश हाई था. ऐसा लगा मानो किसी ने स्टॉक मार्केट को डबल एनर्जी का इंजेक्शन दे दिया हो.
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, रुपये का मजबूत होना और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में खरीदारी, ये कुछ ऐसे फैक्टर थे जिन्होंने घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी को शुरुआती कारोबार में ही रॉकेट बना दिया.
सुबह के वक्त सेंसेक्स ने इंट्रा-डे में 300 प्वाइंट्स की जबरदस्त उछाल भरी, वहीं निफ्टी 50 भी चढ़कर 24500 के पार निकल गया. हालांकि, यहां एक ट्विस्ट था.
ब्रोडर लेवल पर यानी मार्केट में बड़े-बड़े शेयरों के बाहर की दुनिया में थोड़ा दबाव दिख रहा था. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो दिखाता है कि आज की तेजी कुछ चुनिंदा सेक्टरों तक ही सीमित थी.
मार्केट में ये रौनक क्यों आई, आखिर हुआ क्या?
अब बात करते हैं उन खास वजहों की, जिन्होंने आज बाजार में जान फूंक दी. मार्केट के एक्सपर्ट्स इन पांच बड़ी बातों पर गौर कर रहे हैं, जिन्होंने सेंसेक्स और निफ्टी को उड़ान भरने में मदद की.
एक-एक करके इन्हें समझते हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक कटौती ने कैसे दिया मार्केट को सहारा?
सबसे पहली और शायद सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट. भैया, सोचिए जरा, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने अगस्त महीने के लिए अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले अरब लाइट क्रूड का दाम प्रति बैरल 11 डॉलर कम कर दिया.
ये पिछले कम से कम 26 सालों में हुई सबसे बड़ी कटौती है! ये खबर मार्केट में आते ही निवेशकों के चेहरे खिल गए.
आप पूछेंगे कि कच्चे तेल के दाम कम होने से मार्केट को क्या फायदा? दरअसल, भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से इम्पोर्ट करता है. जब तेल सस्ता होता है, तो हमारी इम्पोर्ट बिल कम हो जाती है.
इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होता है, महंगाई पर कंट्रोल पाने में मदद मिलती है और कंपनियों की लागत भी घटती है, जिसका सीधा फायदा उनके मुनाफे और शेयर की कीमतों को होता है.
विदेशी निवेशकों की वापसी, क्या ये कोई बड़ा संकेत है?
दूसरी बड़ी वजह रही विदेशी निवेशकों की खरीदारी. जिन फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) को पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार में बिकवाली करते देखा जा रहा था, उन्होंने सोमवार को लगातार दूसरे दिन बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की.
सोमवार को उन्होंने 243.03 करोड़ रुपये की नेट बाइंग की थी. इससे पहले शुक्रवार को तो उन्होंने 1,355.33 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की थी.
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने इस बारे में बड़ी दिलचस्प बात कही. उनके मुताबिक, "विदेशी निवेशकों की खरीदारी अभी बहुत मजबूत नहीं है, लेकिन वे अब बेचने से अधिक खरीद रहे हैं तो यह बड़ा बदलाव है और इससे मार्केट को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.
" साफ है, FIIs का मूड बदल रहा है, और ये बाजार के लिए अच्छा संकेत है.
रुपये की मजबूती ने कैसे बढ़ाई देश की इकोनॉमी की चमक?
तीसरी वजह है भारतीय रुपये का मजबूत होना. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे मजबूत होकर 95.28 पर पहुंच गया.
रुपये की मजबूती में वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कमजोरी ने अहम भूमिका निभाई.
सऊदी अरब के अगस्त क्रूड ऑयल प्राइस में कटौती और जियो-पॉलिटिकल टेंशन में नरमी ने भी रुपये को सपोर्ट दिया. फॉरेक्स ट्रेडर्स की मानें तो पश्चिमी एशिया में रिस्क प्रीमियम कम होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जहाजों की आवाजाही बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों पर नियंत्रण बना रहा, जिससे रुपये को सहारा मिला.
रुपये का मजबूत होना मतलब विदेश से सामान मंगाना सस्ता होना और देश की अर्थव्यवस्था के लिए पॉजिटिव संकेत.
आईटी सेक्टर में अचानक इतनी जोरदार खरीदारी क्यों दिखी?
और अब बात उस सेक्टर की जिसने आज मार्केट को सबसे तगड़ा सपोर्ट दिया – वो है इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर. निफ्टी आईटी इंडेक्स ढाई फीसदी तक मजबूत हुआ है! इस तेजी के पीछे एक बड़ी वजह है देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस (TCS) के जल्द आने वाले कारोबारी नतीजे.
निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि टीसीएस के नतीजे अच्छे आएंगे, और इसका असर पूरे आईटी सेक्टर पर दिख रहा है. बता दें, पिछले दो महीनों में निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 10.5% कमजोर हुआ था.
ऐसे में, अब इस सेक्टर में जोरदार खरीदारी दिखना बताता है कि निवेशक इसे कम दाम पर खरीदकर फायदा उठाना चाहते हैं. ये एक तरह से 'बॉटम फिशिंग' है, जब सस्ते में शेयर खरीदकर भविष्य के लिए दांव लगाया जाता है.
कुल मिलाकर, आज का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी एक्शन से भरा रहा. सेंसेक्स और निफ्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों पर निवेशकों का भरोसा बरकरार है.
सुबह 11:15 बजे, सेंसेक्स 294.47 प्वाइंट्स की बढ़त के साथ 78,579.54 पर और निफ्टी 50 भी 78.35 प्वाइंट्स की बढ़त के साथ 24,508.70 पर ट्रेड कर रहा था. इंट्रा-डे में सेंसेक्स 299.80 प्वाइंट्स चढ़कर 78,584.87 और निफ्टी 84.50 प्वाइंट्स उछलकर 24,514.85 तक पहुंचा था.






































