दुनियाभर के बाज़ार: अरे भाई साहब! सुबह-सुबह जब मार्केट खुला तो दक्षिण कोरिया से ऐसी खबरें आईं कि ट्रेडर्स के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं. कोस्पी इंडेक्स, जो उनके बाजार का बैरोमीटर है, धड़ाम से 8 फीसदी से ज्यादा गिर गया. सिर्फ़ दक्षिण कोरिया ही नहीं, जापान से लेकर चीन तक, एशिया के बड़े-बड़े बाजारों में भी हड़कंप मच गया. ऐसा लग रहा था मानो किसी ने मार्केट की बिजली ही काट दी हो, और चारों तरफ अंधेर ही अंधेर!
ये गिरावट कोई मामूली बात नहीं थी. भारतीय समय के मुताबिक, 7 जुलाई 2026 को सुबह 10:45 बजे कोस्पी इंडेक्स सीधे 8.03 फीसदी लुढ़ककर 7,404 अंक पर आ गया.
बता दें, पिछले कुछ हफ्तों से दक्षिण कोरिया के बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और बड़े झटके दिख रहे थे. आज तो सुबह से ही बाजार कमजोर खुला और फिर उस पर इतना दबाव बना कि उसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, गिरावट का एक नया लेवल सेट कर दिया.
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर हुआ क्या, जो इतना बड़ा कोहराम मच गया? तो भई, इस सारी गड़बड़ी की जड़ में हैं चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियां. साउथ कोरिया के बाजार में जिन कंपनियों का सबसे ज़्यादा दबदबा है, उन्हीं के शेयरों में ऐसी तेज गिरावट आई कि पूरा बाजार हिल गया.
चिप बनाने वाली कंपनियों पर ऐसा क्या पहाड़ टूट पड़ा?
देखिए, दक्षिण कोरिया के मार्केट क्रैश की सबसे बड़ी वजह बनीं चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियां - Samsung Electronics और SK Hynix. ये दोनों कंपनियां इतनी बड़ी हैं कि अगर इनकी सेहत बिगड़ जाए, तो पूरे मार्केट को बुखार आ जाता है.
इन दोनों कंपनियों के शेयरों में भयानक गिरावट देखने को मिली.
आपको बता दें, कोस्पी इंडेक्स में सिर्फ इन दो कंपनियों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से भी ज़्यादा है. मतलब, मार्केट का आधा से ज़्यादा दारोमदार इन्हीं के कंधों पर है.
और जब यही कंधे झुक जाएं, तो बाकी मार्केट की क्या बिसात! सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर 9.75 फीसदी तक गिर गया, वहीं SK Hynix का शेयर 10.58 फीसदी नीचे चल रहा था. सोचिए, जिन कंपनियों के भरोसे पूरा बाजार चलता है, वो खुद ही इतनी बुरी तरह टूट रही हों तो क्या हाल होगा!
अब आप कहेंगे कि ये सब अचानक क्यों हुआ? तो इसकी एक बड़ी कहानी है. पिछले एक-दो सालों में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के शेयरों में ऐसी धूम मची थी कि पूछो मत.
AI के नाम पर हर कंपनी का शेयर रॉकेट की तरह ऊपर जा रहा था. आलम ये था कि दक्षिण कोरिया का बाजार तो इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले बाजारों में से एक बन गया था.
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने तो हाल ही में अपने तिमाही नतीजों को लेकर एक अच्छी खबर दी थी कि उनके नतीजे उम्मीद से बेहतर रह सकते हैं. लेकिन, जैसे ही ये खबर आई, लोगों को लगा कि अब मुनाफा बुक कर लेना चाहिए.
बस, यहीं से शुरू हुई मुनाफावसूली (profit-booking). बड़े-बड़े निवेशकों ने अपने शेयर बेचना शुरू कर दिए और इसका असर पूरे शेयर बाजार पर पड़ा.
हालात इतने बिगड़ गए कि एक समय तो ट्रेडिंग को पांच मिनट के लिए रोक भी दिया गया, ताकि बाजार को थोड़ा संभलने का मौका मिल जाए. लेकिन इसका कोई खास फायदा दिखा नहीं.
चिप कंपनियों के अलावा, Hyundai Motor जैसी बड़ी कंपनी का शेयर भी 8 फीसदी तक क्रैश कर गया. वहीं, Hanwha Aerospace भी 6.56 फीसदी फिसल गया.
कुल मिलाकर, बड़े-बड़े नाम भी इस सुनामी की चपेट में आ गए.
विदेशी निवेशकों ने क्यों मुंह मोड़ लिया?
इस पूरे खेल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भूमिका भी अहम रही. उन्होंने दक्षिण कोरिया के बाजार से भारी-भरकम बिकवाली की.
आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों ने करीब 1.74 लाख करोड़ वोन (दक्षिण कोरिया की मुद्रा) मूल्य के शेयर बेच डाले. इनके अलावा, दूसरे संस्थागत निवेशकों ने भी बड़े पैमाने पर बिकवाली की.
हालांकि, इस बीच एक दिलचस्प बात यह रही कि रिटेल इन्वेस्टर्स, यानी हम और आप जैसे छोटे निवेशक, खरीदारी करते दिखे. एक तरफ जहां बड़े-बड़े इन्वेस्टर माल बेचकर निकल रहे थे, वहीं अपने रिटेल भाईसाब खरीदारी में लगे थे.
अब ये देखना होगा कि उनकी ये हिम्मत रंग लाती है या उन्हें भी झटका लगता है.
विदेशी निवेशकों ने पिछले एक-दो साल में दक्षिण कोरिया की AI कंपनियों के शेयरों में जमकर पैसा लगाया था. यही वजह थी कि AI की बंपर कमाई की उम्मीद में बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला.
लेकिन, अब AI शेयरों को लेकर मार्केट का सेंटीमेंट थोड़ा बदल गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि शायद अब निवेशक AI शेयरों को लेकर पहले जितना उत्साहित नहीं हैं, या फिर उन्हें लग रहा है कि अब इन शेयरों में वो ग्रोथ नहीं रही.
इस बदले हुए सेंटिमेंट का सीधा असर बाजार पर दिखा है.
क्या सिर्फ़ दक्षिण कोरिया ही घिरा है, या दूसरों पर भी असर है?
अफसोस की बात ये है कि यह गिरावट सिर्फ दक्षिण कोरिया तक ही सीमित नहीं रही. इसका असर एशिया के दूसरे बाजारों में भी देखने को मिला.
7 जुलाई को जापान का निक्केई इंडेक्स भी 2.33 फीसदी गिर गया. हांगकांग के हैंगसेंग में भी 0.68 फीसदी की कमजोरी दिखी.
ताइवान के शेयर बाजार भी दबाव में थे और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी 1.36 फीसदी नीचे चल रहा था.
मोटा-मोटी कहें तो, दक्षिण कोरिया के चिप बाजार में आई इस गिरावट ने पूरे एशियाई बाजार में एक डर का माहौल बना दिया है. अब आगे क्या होगा, ये देखने वाली बात होगी.
क्या बाजार संभलेगा या गिरावट का ये सिलसिला अभी और जारी रहेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं.






































