मुंबई: मंगलवार, 7 जुलाई 2026 की सुबह, शेयर बाजार के खुलते ही एक बड़े तूफान ने सबको हिला दिया। टाटा समूह की दिग्गज रिटेल कंपनी ट्रेंट (Trent) के शेयरों में ऐसी सुनामी आई कि देखते ही देखते निवेशक सकते में आ गए। बाजार अभी अंगड़ाई ले ही रहा था कि ट्रेंट के शेयर 11 फीसदी से ज़्यादा लुढ़क गए। सुबह 10 बजकर 17 मिनट हुए थे और कंपनी का शेयर 2,973 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। ये गिरावट इतनी बड़ी थी कि पूरे बाजार में इसकी चर्चा होने लगी, जबकि इसी दिन सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बड़े सूचकांकों में तेजी दिख रही थी।
लेकिन, सवाल ये था कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो मजबूत माने जाने वाली टाटा ग्रुप की कंपनी के साथ ये सब हो गया? वजह थी ट्रेंट का जून तिमाही का बिजनेस अपडेट, जिसे कंपनी ने मार्केट को बताया था। और यहीं पर सारा खेल बिगड़ गया।
विश्लेषकों और बाजार की जो उम्मीदें थीं, कंपनी के आंकड़े उन पर खरे नहीं उतर पाए। कंपनी का परफॉर्मेंस एनालिस्ट्स की भविष्यवाणी से कमजोर रहा, और फिर क्या था, ब्रोकरेज फर्मों ने झट से ट्रेंट की ग्रोथ को लेकर अपने अनुमान बदलने शुरू कर दिए।
ये किसी सदमे से कम नहीं था, खासकर उन निवेशकों के लिए जिन्होंने ट्रेंट में लंबी अवधि के लिए पैसा लगा रखा था।
उम्मीदों पर खरा न उतर पाया जून तिमाही का प्रदर्शन
ट्रेंट ने अपनी जून तिमाही की रिपोर्ट में बताया कि उसका स्टैंडअलोन रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 19 फीसदी बढ़ा है। सुनने में ये आंकड़ा भले ही ठीक-ठाक लगे, लेकिन असली झटका तब लगा जब बाजार को पता चला कि ये ग्रोथ एनालिस्ट्स की उम्मीदों से काफी कम थी।
कंपनी का कुल स्टैंडअलोन रेवेन्यू जून तिमाही में 5,666 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि में 4,781 करोड़ रुपये था। कंपनी के वेस्टसाइड और जूडियो जैसे बड़े और पॉपुलर फॉर्मेट्स में भी इजाफा हुआ, लेकिन ये इजाफा भी बाजार की नजर में नाकाफी साबित हुआ।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कंपनी की ग्रोथ में नए स्टोर का खुलना एक अहम भूमिका निभाता है।
निवेशकों और विश्लेषकों की निगाहें हमेशा इस बात पर रहती हैं कि कंपनी ने कितनी तेजी से अपने स्टोर्स का विस्तार किया है। लेकिन, इस मोर्चे पर भी ट्रेंट ने निराश किया।
जून तिमाही में कंपनी के नए स्टोर्स की संख्या भी उम्मीद से कम रही। दरअसल, ये बीते कुछ समय में नए स्टोर खोलने के लिहाज से ट्रेंट के लिए सबसे कमजोर तिमाही मानी जा रही है।
अगर हम आंकड़ों की बात करें तो इस साल जून तिमाही के आखिर तक कंपनी के कुल 1,312 स्टोर थे। इनमें वेस्टसाइड के 301 आउटलेट्स, जूडियो के 982 आउटलेट्स और दूसरे लाइफस्टाइल फॉर्मेट्स के 29 स्टोर शामिल हैं।
विश्लेषकों का साफ कहना है कि रेवेन्यू ग्रोथ और नए स्टोर्स की संख्या, दोनों ही मोर्चों पर ट्रेंट इस बार चूक गया।
आगे क्या, एनालिस्ट्स की राय बंटी
अब सवाल ये उठता है कि ट्रेंट के भविष्य का क्या होगा? क्या ये गिरावट एक मौका है या खतरे की घंटी? इस सवाल पर भी बाजार में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ट्रेंट अभी भी वेस्टसाइड और जूडियो के स्टोर्स की संख्या बढ़ाने पर फोकस कर रहा है।
उनकी मानें तो लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ अच्छी रह सकती है और मार्जिन में भी सुधार देखने को मिल सकता है। ये वे लोग हैं जो कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और टाटा ग्रुप के बैकअप पर भरोसा कर रहे हैं।
लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू भी है। कुछ दूसरे विश्लेषकों का तर्क है कि वैल्यू-फैशन सेगमेंट में प्रतियोगिता लगातार बढ़ती जा रही है।
छोटे-बड़े कई खिलाड़ी इस बाजार में उतर रहे हैं, जिससे ट्रेंट जैसी कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ रही है। उनका ये भी कहना है कि कंपनी के मौजूदा स्टोर्स की प्रोडक्टिविटी भी कम है, जिसका सीधा असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ सकता है।
यानी, अगर स्टोर हैं भी तो वे उतना धंधा नहीं कर पा रहे जितनी उम्मीद है।
पिछली तिमाही और उम्मीदों का लेखा-जोखा
अगर हम पिछली तिमाही यानी मार्च तिमाही के आंकड़ों पर गौर करें तो ट्रेंट का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 26 फीसदी बढ़ा था। ये आंकड़ा निवेशकों को राहत देने वाला था।
लेकिन जून तिमाही के अपडेट्स ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी (HSBC) ने तो जून तिमाही में ट्रेंट की रेवेन्यू ग्रोथ करीब 21 फीसदी रहने का अनुमान जताया था, जबकि असल में ये 19 फीसदी ही रही।
वहीं, बर्नस्टीन (Bernstein) जैसी फर्म का मानना था कि वेस्टसाइड स्टोर्स की संख्या बढ़ाने से कंपनी की ग्रोथ पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
बीते एक साल में ट्रेंट के शेयर करीब 19 फीसदी फिसले हैं। ये आंकड़ा उन निवेशकों के लिए चिंताजनक है जो कंपनी के भविष्य को लेकर आशावादी थे।
हालांकि, 7 जुलाई को जब ट्रेंट के शेयर धड़ाम हुए, तब भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों, जैसे निफ्टी और सेंसेक्स, में तेजी देखने को मिल रही थी। यह दिखाता है कि ट्रेंट का यह प्रदर्शन कंपनी-विशिष्ट कारणों से था, न कि पूरे बाजार की कमजोरी के कारण।
अब देखना होगा कि आने वाले समय में ट्रेंट अपने प्रदर्शन को कैसे सुधारता है और निवेशकों का विश्वास फिर से कैसे जीत पाता है।






































