चेयेन: अमेरिका के व्योमिंग राज्य में बसे चेयेन शहर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने बड़े-बड़े टेक दिग्गजों को पानी के इस्तेमाल और उससे जुड़े पर्यावरण नियमों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। हुआ यूं कि दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी 'मेटा' का एक बड़ा डेटा सेंटर शहर की पानी की व्यवस्था के लिए 'सिरदर्द' बन गया। इस डेटा सेंटर से निकला पानी इतना प्रदूषित था कि उसने शहर के दो बड़े जल शोधन संयंत्रों (water reclamation plants) को महीनों के लिए ठप कर दिया। ये कोई मामूली गंदगी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा ख़तरनाक बैक्टीरिया था, जिससे निपटना बेहद मुश्किल और महंगा साबित हो रहा है। सोचिए, एक बड़ी कंपनी की लापरवाही से पूरे शहर की पानी की व्यवस्था पर कितना बुरा असर पड़ सकता है!
चेयेन बोर्ड ऑफ पब्लिक यूटिलिटीज ने हाल ही में बताया कि उन्हें शहर के ‘रीक्लेम्ड वाटर’ प्लांट्स में एक दुर्लभ बैक्टीरिया मिला है। इस खोज के बाद, बोर्ड ने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट जल (industrial wastewater) को स्वीकार करना अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है।
यानी, अब ऐसे पानी को शहर की जल प्रणाली में नहीं छोड़ा जा सकेगा। इस पूरे मामले में, जांच में मेटा के डेटा सेंटर को ही प्रदूषण का मुख्य स्रोत बताया गया है।
यह सारा गड़बड़झाला तब शुरू हुआ जब 'गोट सिस्टम्स एलएलसी' (Goat Systems LLC) नाम की कंपनी, जो चेयेन में मेटा के कैंपस के निर्माण का काम देख रही थी, ने अपने अपशिष्ट जल को चेयेन के सीवर सिस्टम में छोड़ दिया। ये कंपनी डेटा सेंटर के बंद-लूप कूलिंग सिस्टम को 'फिल-एंड-फ्लश' (fill-and-flush) कर रही थी।
आसान भाषा में कहें तो, डेटा सेंटर के अंदरूनी कूलिंग पाइपों को साफ़ करने के लिए पानी का इस्तेमाल किया गया ताकि उसमें जमा कचरा और गंदगी निकल जाए। इसके बाद, इस पानी को कूलिंग लिक्विड से भरकर सिस्टम को सील कर दिया जाना था।
लेकिन साफ़-सफाई के बाद निकले गंदे पानी को सीधे शहर के सीवर में बहा दिया गया।
अचानक आया 'अनचाहा मेहमान' और भारी नुकसान
जब इस अपशिष्ट जल का परीक्षण किया गया, तो पता चला कि पानी में 'कप्रिवियाडस गिलार्डी' (Cupriavidus gilardii) नाम का एक प्रतिरोधी बैक्टीरिया मौजूद था। यह कोई आम बैक्टीरिया नहीं है।
यह काफी जिद्दी होता है और पानी के शुद्धिकरण के लिए चुनौती पेश करता है। इस बैक्टीरिया की वजह से शहर के दो महत्त्वपूर्ण जल शोधन संयंत्रों को बंद करना पड़ा।
इन प्लांट्स को दोबारा चालू करने से पहले, महीनों तक चलने वाले व्यापक सफ़ाई अभियान की योजना बनाई गई है। इसका मतलब है कि शहर की पानी की प्रणाली पर कई महीनों तक अतिरिक्त दबाव रहेगा और सफ़ाई में लाखों डॉलर का खर्च आएगा।
बोर्ड के इंजीनियरिंग और जल संसाधन प्रभाग के प्रबंधक फ्रैंक स्ट्रॉन्ग (Frank Strong) ने बताया कि बैक्टीरिया का मूल स्रोत अभी भी अज्ञात है, लेकिन जिस पानी का उपयोग सिस्टम को फ्लश करने के लिए किया गया था, वह सीधे बोर्ड से खरीदा गया था। इस बयान से स्थिति और भी पेचीदा हो जाती है, क्योंकि अगर पानी बोर्ड से ही खरीदा गया था, तो सवाल उठता है कि बैक्टीरिया उसमें कैसे पहुंचा या यह दूषित पानी फ्लशिंग प्रक्रिया के दौरान ही दूषित हुआ।
शुरुआती जांच में, गोट सिस्टम्स एलएलसी की जल निकासी के विशेषाधिकार मार्च के अंत में ही रद्द कर दिए गए थे, जिसके बाद चेयेन के अन्य डेटा सेंटरों के लिए भी यह व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिया गया।
डेटा सेंटर और पानी का गहरा रिश्ता
आजकल की डिजिटल दुनिया में डेटा सेंटर रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। ये बड़े-बड़े सर्वर फार्म होते हैं जहां दुनिया भर का डेटा स्टोर किया जाता है और प्रोसेस होता है।
इन सर्वरों को ठंडा रखने के लिए बहुत ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है, क्योंकि लगातार चलने से ये बहुत गर्म हो जाते हैं। 'क्लोज्ड-लूप' कूलिंग सिस्टम इन्हीं ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन इनके निर्माण और रखरखाव के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट जल का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इस घटना ने एक बार फिर इस चिंता को उजागर किया है कि पानी शोधन संयंत्र औद्योगिक अपशिष्ट जल को कैसे संभाल सकते हैं, खासकर जब बात डेटा सेंटर निर्माण परियोजनाओं से निकलने वाले पानी की हो।
कई बंद-लूप प्रणालियों में 'प्रोपलीन ग्लाइकोल' (Propylene Glycol) जैसे रसायन एंटीफ़्रीज़ एजेंट के रूप में उपयोग किए जाते हैं। ये रसायन पानी को जमने से रोकते हैं, लेकिन अगर ये अपशिष्ट जल के साथ पर्यावरण में मिल जाएं तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
चेयेन की घटना सिर्फ एक चेतावनी है कि तकनीक के विकास के साथ-साथ हमें उसके पर्यावरणीय प्रभावों को भी गंभीरता से लेना होगा। कंपनियों को न सिर्फ अपने संचालन के दौरान पानी के उपयोग में सावधानी बरतनी होगी, बल्कि अपशिष्ट जल के निपटान के लिए भी सख्त और सुरक्षित प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
यह घटना उन सभी शहरों के लिए एक सबक है जो अपने यहाँ बड़े डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार और कंपनियों दोनों को मिलकर काम करना होगा ताकि हमारी डिजिटल प्रगति हमारे प्राकृतिक संसाधनों की कीमत पर न हो।
चेयेन बोर्ड ऑफ पब्लिक यूटिलिटीज अब इस मामले में आगे की जांच कर रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है कि भविष्य में ऐसी किसी भी प्रकार की दुर्घटना न हो, जिससे शहर के पर्यावरण और जनता के स्वास्थ्य को कोई खतरा पहुंचे। यह एक जटिल मुद्दा है, जिस पर गहन विचार-विमर्श और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है।




































