दिल्ली: भैया, आजकल एक नाम खूब सुनने को मिल रहा है – अल नीनो। ये कोई मामूली चीज़ नहीं है, बल्कि मौसम का एक ऐसा चक्र है जो जब-जब आता है, दुनिया भर में तापमान को बढ़ा देता है और हमारे मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल देता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए तो ये एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसका सीधा असर हमारी खेती-किसानी पर पड़ता है, खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें ऊपर-नीचे होती हैं, और तो और, देश के एनर्जी सिस्टम पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ने का अनुमान है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक एनालिसिस में भी यही बात सामने आई है। अल नीनो के इन्हीं संभावित खतरों को देखते हुए हमारी सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई, ताकि समय रहते हर चुनौती से निपटने की तैयारी की जा सके।
पीएमओ में क्यों बुलाई गई थी ये खास बैठक? जी हां, देश में खरीफ सीजन और इकॉनमी के दूसरे सेक्टर्स पर अल नीनो के खतरे को भांपते हुए PMO पूरी तरह चौकन्ना हो गया है। 7 जुलाई को पीएम के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा की अध्यक्षता में एक बेहद अहम बैठक हुई। इस मीटिंग में एक-दो नहीं, बल्कि 15 से भी ज़्यादा मंत्रालयों के सचिव और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। आप खुद सोचिए, इसमें कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों जैसे तमाम ज़रूरी विभाग एक साथ बैठे थे। इस बैठक का सीधा-सा मकसद ये था कि अल नीनो की वजह से भविष्य में जो भी हालात पैदा हो सकते हैं, उनका डिटेल में एनालिसिस किया जाए और हर मंत्रालय की तैयारियों को ठीक से परखा जाए। तो चलिए, आपको बताते हैं कि इस हाई लेवल मीटिंग से कौन सी 3 बड़ी और खास बातें निकलकर सामने आई हैं।
मानसून का क्या हाल है और अल नीनो का अनुमान क्या कहता है?
मीटिंग की शुरुआत भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की एक प्रेजेंटेशन से हुई। IMD ने जून से लेकर 7 जुलाई तक देश में हुई बारिश का पूरा ब्यौरा पेश किया। मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि इस साल गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून आने में करीब 10 दिनों की देरी देखने को मिली है। हालांकि, एक राहत की खबर भी है। जुलाई के पहले सप्ताह में पूरे देश में सामान्य से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई है, जिसकी बदौलत पूरे भारत में बारिश की कमी अब घटकर सिर्फ -12% रह गई है, जो कि पहले ज़्यादा थी। IMD का अनुमान है कि जुलाई और अगस्त के महीनों में कमजोर से मध्यम अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है। बता दें कि मानसून सीजन की 30% से ज़्यादा बारिश तो सिर्फ जुलाई महीने में ही होती है, इसलिए इस महीने की बारिश पर लगातार पैनी नज़र रखी जा रही है। यहां मौसम विभाग ने एक बहुत ज़रूरी बात भी साफ की है। उन्होंने कहा कि अल नीनो वर्ष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उस साल सामान्य से कम या बहुत कम बारिश होगी। इसका मतलब ये है कि हालात पर लगातार नजर रखने की ज़रूरत है, क्योंकि अनिश्चितता बढ़ जाती है। खेती-किसानी और फसलों को लेकर सरकार की क्या तैयारी है?
जब बात अल नीनो की आती है, तो खेती-किसानी सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाला सेक्टर होता है। कृषि सचिव ने बैठक में खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के किसी भी संभावित प्रभाव से निपटने की सरकार की तैयारियों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि देश के 262 ऐसे ज़िले हैं जो अल नीनो से सबसे ज़्यादा संवेदनशील हैं। इन सभी जिलों के लिए 'डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर कंटिंजेंसी प्लान' को अपडेट कर दिया गया है। यानी, हर ज़िले के हिसाब से अलग और ठोस तैयारी। इसके अलावा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भारतीय कृषि में अल नीनो के जोखिमों के प्रबंधन पर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है। ये SOP जिलों में मौजूद कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के लिए बनाई गई है, ताकि वे किसानों को सही और सटीक जानकारी दे सकें और उन्हें चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकें।
सरकार यहीं नहीं रुक रही है। बारिश की स्थिति, जलाशयों में पानी का स्तर, फसल की बुवाई, बाज़ार के रुझान और फसलों में लगने वाले कीटों/बीमारियों की स्थिति पर लगातार नज़र रखने के लिए राज्यों के साथ 'फसल मौसम निगरानी समूह' की हर हफ्ते मीटिंग बुलाई जा रही हैं। साथ ही, उन राज्यों में 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' और 'किसान क्रेडिट कार्ड' कवरेज को बढ़ाने के लिए खास अभियान भी शुरू किए गए हैं, जहां अल नीनो का असर ज़्यादा होने की आशंका है। कुल मिलाकर, खेती-किसानी पर कोई आंच न आए, इसकी पूरी तैयारी चल रही है। खाने-पीने के सामान और फर्टिलाइजर का क्या होगा? सरकार के पास क्या बफर स्टॉक है?
अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए खाने-पीने की ज़रूरी चीज़ों की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में खूब मंथन हुआ। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने देश में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की खुदरा कीमतों की स्थिति और चावल जैसे मुख्य अनाज की उपलब्धता पर एक डिटेल रिपोर्ट पेश की। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अल नीनो के कारण सप्लाई चेन में कोई दिक्कत न आए और आम जनता को ज़रूरी चीज़ों के लिए परेशान न होना पड़े। सरकार पूरी तरह से तैयार है ताकि किसी भी स्थिति में बफर स्टॉक की मदद से कीमतों को स्थिर रखा जा सके और कमी न हो।





































