मुंबई: शेयर बाज़ार की दुनिया भी अजीब है जी! कभी खुशी, कभी गम वाला माहौल रहता है. अब देखिए न, भारतीय शेयर बाज़ार के लिए मंगलवार की सुबह एक मिली-जुली तस्वीर लेकर आई है. एक तरफ़ GIFT Nifty की चमक बता रही है कि अपने घरेलू बाज़ार ज़बरदस्त शुरुआत कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ़ एशियाई बाज़ारों में हल्की सुस्ती छाई हुई है. सवाल ये है कि इस पूरे खिचड़ी में क्या पक रहा है? आइए, ज़रा समझते हैं इस पेचीदा खेल को, क्योंकि दाँव पर आपका और हमारा पैसा लगा है.
अगर आप सोच रहे हैं कि ये GIFT Nifty क्या बला है, तो सुनिए. ये दरअसल सिंगापुर एक्सचेंज पर भारतीय निफ्टी का एक फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट है, जो हमारे मार्केट खुलने से पहले ही मूड बता देता है.
मंगलवार की सुबह करीब 8:31 बजे GIFT Nifty ने कमाल दिखाया, 44.50 पॉइंट या 0.18 फ़ीसदी की बढ़त के साथ 24,536.50 पर ट्रेड कर रहा था. ये तो एक तरह का 'पॉज़िटिव वाइब्स' सिग्नल था, और क्यों न हो? अपना घरेलू बाज़ार तो 6 जुलाई को लगातार चौथे दिन जीत का झंडा गाड़कर बंद हुआ था.
पिछला हफ़्ता और सोमवार का धमाल
सोमवार यानी 6 जुलाई को क्या हुआ था? सेंसेक्स भैया 521.16 पॉइंट यानी 0.67 फ़ीसदी उछलकर 78,285.07 पर पहुंच गए थे. और निफ्टी भी पीछे नहीं रहा, 159.50 पॉइंट यानी 0.66 फ़ीसदी की छलांग लगाकर 24,430.35 पर जा पहुंचा था.
मतलब, ज़बरदस्त माहौल था भाई! घरेलू इक्विटी बाज़ार ने लगातार चौथे सेशन में अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा था. इस तेज़ी के पीछे कई वजहें थीं, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होने वाली कमाई को लेकर उम्मीदें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का लगातार निवेश.
अब ऐसे में GIFT Nifty की ये पॉज़िटिव चाल तो बनती थी, जो मंगलवार को बाज़ार खुलने से पहले ही एक अच्छी ख़बर लेकर आई है.
वॉल स्ट्रीट में AI का जलवा और एशियाई बाज़ारों की सतर्कता
अब ज़रा दुनिया घूम आते हैं. ग्लोबल मार्केट में क्या हो रहा है? मंगलवार को संकेत मिले-जुले थे.
एक तरफ़ अमेरिका का वॉल स्ट्रीट रातोंरात उछाल के साथ बंद हुआ, खासकर टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर तो ऐसे भागे जैसे उन्हें पंख लग गए हों. इसकी बड़ी वजह थी 'आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस' (AI) की बढ़ती डिमांड और इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की कमाई को लेकर ज़बरदस्त उम्मीदें.
बाज़ार को लग रहा है कि AI से जुड़े खर्च की वजह से दूसरी तिमाही में कंपनियों की कमाई धमाकेदार रहेगी. नैस्डैक कंपोजिट 1.12 फ़ीसदी चढ़कर 26,121.16 पर बंद हुआ, S&P 500 भी 0.72 फ़ीसदी ऊपर 7,537.43 पर रहा, और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.29 फ़ीसदी बढ़कर 53,055.91 पर ख़त्म हुआ.
इस उछाल में सबसे आगे रहे चिप बनाने वाली कंपनियां, जिनमें ब्रॉडकॉम जैसे दिग्गज शामिल थे. उन्हें लग रहा है कि AI से जुड़ा खर्चा अभी और बढ़ेगा, और इससे उनकी कमाई भी बढ़ेगी.
इस भरोसे ने टेक सेक्टर में एक नई जान फूंक दी है, जो हाल ही में थोड़ी सुस्ती में था. ये सब मिलकर वॉल स्ट्रीट को एक मज़बूत आधार दे रहे हैं.
लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं आता है. एक तरफ़ अमेरिका मौज कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ़ एशिया के बाज़ार मंगलवार को थोड़ा सुस्त पड़ गए.
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपनी दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट का अनुमान लगाया था, फिर भी एशियाई बाज़ारों में गिरावट दिखी. विश्लेषक इसे 'प्रॉफ़िट बुकिंग' बता रहे हैं, यानी निवेशकों ने पिछले मुनाफ़े को भुनाया.
जापान के बाहर एशिया-पैसिफ़िक शेयरों का MSCI का सबसे बड़ा इंडेक्स 0.73 फ़ीसदी लुढ़का. जापान का निक्केई 1.08 फ़ीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.1 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ.
यहां तक कि अमेरिकी इक्विटी फ़्यूचर्स भी शुरुआती एशियाई ट्रेड में नीचे आए, नैस्डैक 100 फ़्यूचर्स 0.7 फ़ीसदी गिरा. यह दिखाता है कि बाज़ार के खिलाड़ी थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं, और ग्लोबल स्तर पर हर जगह एक जैसी तेज़ी नहीं दिख रही.
कच्चे तेल की चाल और भारत पर असर
अब ज़रा तेल की बात करें. कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ीं ज़रूर, लेकिन ये अभी भी ईरान में लड़ाई शुरू होने से पहले वाले लेवल के आसपास ही बनी हुई हैं.
ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स 0.39 फ़ीसदी बढ़कर लगभग $72.3 प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 0.26 फ़ीसदी बढ़कर लगभग $68.8 प्रति बैरल पर पहुंच गया. यह अच्छी बात है, क्योंकि इससे महंगाई की चिंता थोड़ी कम होती है, और भारत जैसे देश जो तेल आयात करते हैं, उन्हें लगातार सपोर्ट मिलता रहता है.
अगर कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ जातीं, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा और नकारात्मक असर पड़ता, जिससे महंगाई और बढ़ सकती थी.
FII का विश्वास और कंस्ट्रक्टिव आउटलुक
इन सबके बीच एक और अच्छी ख़बर है. विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार पैसा लगा रहे हैं.
6 जुलाई को भी उन्होंने भारतीय इक्विटीज़ को सपोर्ट देना जारी रखा, जिससे बाज़ार को एक मज़बूत सहारा मिला. FII का ये लगातार निवेश और कच्चे तेल की कम कीमतें, भारतीय इक्विटी के लिए एक अच्छा और 'कंस्ट्रक्टिव आउटलुक' तैयार कर रही हैं.
मतलब, भले ही ग्लोबल मार्केट में थोड़ी उथल-पुथल हो, लेकिन भारतीय बाज़ार के लिए कई पॉज़िटिव संकेत दिख रहे हैं. इन सभी संकेतों के बीच, भारतीय बाज़ार के खुलने का इंतज़ार है ताकि पता चल सके कि मंगलवार का दिन निवेशकों के लिए कितनी सौगात लेकर आता है.






































