मुंबई: सिनेमा की दुनिया में इन दिनों अगर कोई कहानी सबसे ज्यादा गूंज रही है, तो वो है हमारी अपनी पौराणिक गाथाएं. सोचिए, जब इन्हीं पुरानी, दमदार कहानियों को आज की तारीख में बड़े परदे पर, हाई-फाई तकनीक और दिल छू लेने वाले विजुअल्स के साथ दिखाया जाए, तो कैसा लगेगा? ऐसा ही कुछ करने की तैयारी में है ‘नागबंधम’. ये कोई छोटी-मोटी फिल्म नहीं, बल्कि एक पूरी पैन-इंडिया फिल्म है, जो रहस्य, रोमांच और सनातन परंपरा की गहराइयों में गोते लगाने का वादा करती है.
ये फिल्म 3 जुलाई को सिनेमाघरों में आने वाली है और अभी से इसकी चर्चा तेज है. फिल्म में विराट कर्ण, नभा नटेश और ऋषभ साहनी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं, और इसे प्रोड्यूस किया है निशिता नागिरेड्डी ने.
हाल ही में ‘दैनिक भास्कर’ ने फिल्म की टीम से बात की, जहां उन्होंने अपनी इस अनोखी कहानी, भारतीय संस्कृति और आजकल चल रहे सिनेमा के रुझानों पर खुलकर बातचीत की. इस बातचीत में कई ऐसे पहलू सामने आए जो बताते हैं कि ‘नागबंधम’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक अनुभव होने वाली है.
‘नागबंधम’ – सिर्फ पौराणिक कहानी से कहीं बढ़कर
जब प्रोड्यूसर निशिता नागिरेड्डी से पूछा गया कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत क्या है, तो उनका जवाब बिल्कुल साफ था. निशिता ने बताया, "ये सिर्फ एक पौराणिक फिल्म नहीं है, बल्कि इसमें इतिहास, हमारी सनातन परंपरा, रहस्य और रोमांच का एक बड़ा संगम है.
हमने इसे बड़े पैमाने पर बनाया है. हमारा मकसद सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी विरासत, अपनी जड़ों से फिर से जोड़ना है.
" उनका कहना था कि भारतीय दर्शकों को अपनी कहानियों से जुड़ना हमेशा पसंद रहा है और यह फिल्म उसी भावना को आगे बढ़ाती है, लेकिन एक बिल्कुल नए और भव्य तरीके से.
फिल्म के हीरो, विराट कर्ण, जो ‘रुद्र’ का किरदार निभा रहे हैं, ने अपने रोल के बारे में बात करते हुए सस्पेंस बनाए रखा. विराट ने कहा, "रुद्र सिर्फ एक ताकतवर किरदार नहीं है, उसके हर फैसले के पीछे एक ठोस वजह है.
वो जो कुछ भी कहता है या करता है, उसका गहरा मतलब होता है. अगर मैं अभी सब कुछ बता दूंगा, तो थिएटर में देखने का मजा किरकिरा हो जाएगा.
" उनकी बातों से लगता है कि रुद्र का किरदार सिर्फ एक्शन हीरो वाला नहीं, बल्कि उसमें भावनात्मक और बौद्धिक गहराई भी है. उन्होंने साफ किया कि असली अनुभव तो परदे पर ही मिलेगा, जब दर्शक खुद रुद्र के सफर का हिस्सा बनेंगे.
पौराणिक दुनिया में कदम रखना – कलाकारों का अनुभव
अभिनेत्री नभा नटेश के लिए इस पौराणिक दुनिया का हिस्सा बनना एक खास अनुभव रहा. नभा ने अपनी बात रखते हुए कहा, "भारतीय सिनेमा में अब तक हमारे कई ऐतिहासिक और पौराणिक पहलुओं को शायद उस तरह से नहीं दिखाया गया, जिस तरह से उन्हें दिखाना चाहिए था.
हमारी फिल्म इसी कमी को पूरा करने की एक ईमानदार कोशिश है." उनका मानना है कि दर्शक इस फिल्म को देखकर सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करेंगे, बल्कि अपनी संस्कृति और इतिहास के बारे में कुछ नया भी सीखेंगे.
यह एक ऐसा मौका है जहां दर्शक एक साथ ज्ञान और मनोरंजन का अनुभव कर सकेंगे.
वहीं, एक्टर ऋषभ साहनी, जो अक्सर नकारात्मक किरदार निभाते नजर आते हैं, उन्होंने इस तरह के रोल्स को लेकर अपने नजरिए को साझा किया. ऋषभ ने बताया, "मुझे ऐसे किरदार निभाने में बहुत मजा आता है.
हर किरदार का अपना एक नजरिया होता है, अपनी सोच होती है. मैं पहले यह समझने की कोशिश करता हूं कि आखिर वह किरदार ऐसा क्यों कर रहा है, उसकी सोच क्या है.
" उनका कहना था कि जब एक बार वह किरदार की सोच को समझ जाते हैं, तो उसे परदे पर जीवंत करना आसान हो जाता है. ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें गहराई से सोचना और किरदार के मन में उतरना पड़ता है.
इतने क्रूर और इंटेंस किरदार निभाने के बाद उनसे बाहर कैसे निकला जाता है, इस सवाल पर ऋषभ ने एक मजेदार बात बताई. उन्होंने कहा, "शूट खत्म होते ही मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताता हूं.
वही मुझे सामान्य जिंदगी में वापस ले आते हैं." उनका कहना है कि वे अपने किरदार को सेट पर ही छोड़ आते हैं और घर पर बिल्कुल सामान्य इंसान की तरह रहते हैं.
यह दिखाता है कि एक कलाकार के लिए अपने काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी होता है.
हमारी कहानियों का दौर – क्या ये सिर्फ एक ट्रेंड है?
आजकल भारतीय इतिहास और सनातन परंपरा पर लगातार फिल्में बन रही हैं. क्या इसे एक ट्रेंड माना जाए? इस सवाल पर निशिता नागिरेड्डी और नभा नटेश दोनों ने अपनी राय रखी.
निशिता ने साफ कहा, "यह कोई नया ट्रेंड नहीं है. हमारी कहानियां हमेशा से हमारे पास थीं.
बस अब फर्क ये आया है कि हमारे पास उन्हें बड़े परदे पर भव्य तरीके से दिखाने के लिए तकनीक है, बजट है और सबसे जरूरी, दर्शकों का भरोसा बढ़ा है." उनका इशारा था कि भारतीय दर्शक अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों को देखने के लिए तैयार हैं और सिनेमा ने इस बात को पहचाना है.
नभा ने इसमें अपनी बात जोड़ते हुए कहा, "कोविड के बाद से लोगों में अपनी जड़ों से फिर जुड़ने की इच्छा और बढ़ गई है. शायद यही वजह है कि ऐसी फिल्मों को दर्शक ज्यादा स्वीकार कर रहे हैं.
" यह एक दिलचस्प अवलोकन है कि महामारी के बाद लोगों की प्राथमिकताएं बदली हैं और वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को अधिक महत्व दे रहे हैं, जिसका असर सिनेमा पर भी दिख रहा है.
बॉलीवुड क्या सीख सकता है दक्षिण भारतीय सिनेमा से?
दक्षिण भारतीय सिनेमा इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर रहा है. ऐसे में ऋषभ साहनी से पूछा गया कि बॉलीवुड दक्षिण भारतीय सिनेमा से क्या सीख सकता है? ऋषभ का जवाब बहुत सीधा और सटीक था.
उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी सीख यही है कि कहानियों और नए कलाकारों पर भरोसा किया जाए. दक्षिण में कंटेंट को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है.
वे कहानी पर पैसा लगाने से नहीं हिचकिचाते, भले ही उसमें बड़े नाम न हों." यह एक महत्वपूर्ण बात है जो बताती है कि दमदार कहानी ही सिनेमा की असली रीढ़ होती है.
विराट कर्ण से जब पूछा गया कि वे हिंदी फिल्मों में किस कलाकार के साथ काम करना चाहेंगे, तो उन्होंने आलिया भट्ट का नाम लिया. विराट ने कहा, "मुझे आलिया भट्ट का काम बहुत पसंद है.
अगर मौका मिला, तो मैं उनके साथ काम करना चाहूंगा." उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें एक्शन और भावनात्मक दोनों तरह की फिल्में करना पसंद है, जो उनकी एक्टिंग रेंज को दर्शाता है.
अपनी प्रेरणा के बारे में बात करते हुए विराट ने विक्की कौशल का नाम लिया. उन्होंने कहा, "विक्की कौशल का अभिनय मुझे बहुत प्रभावित करता है.
खासकर उनकी फिल्म ‘छावा’ देखने के बाद मैंने अपने किरदार पर और मेहनत की." यह दिखाता है कि कैसे एक कलाकार दूसरे से प्रेरणा लेकर अपने काम को बेहतर बनाता है.
तो, कुल मिलाकर ‘नागबंधम - द सीक्रेट ट्रेजर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की उस बदलती धारा का प्रतीक है, जहाँ हमारी सदियों पुरानी कहानियों को आधुनिक चकाचौंध के साथ परोसा जा रहा है. यह फिल्म 3 जुलाई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी, और इसमें कोई शक नहीं कि यह दर्शकों को एक अनोखे और रोमांचक सफर पर ले जाएगी.

