जालंधर: कनाडा की एक जेल से एक ऐसा फिल्मी किस्सा सामने आया है, जिसे सुनकर आप दांतों तले उंगली दबा लेंगे। बात है जालंधर से ताल्लुक रखने वाली एक जेल अधिकारी की, जिस पर आरोप लगे हैं कि उसने कनाडा की जेल में बंद एक पंजाबी कैदी से न सिर्फ प्रेम संबंध बनाए, बल्कि उसके साथ मिलकर एक सीनियर अधिकारी पर जानलेवा हमले की साजिश तक रच डाली। ये कहानी यहीं खत्म नहीं होती, जांच एजेंसियों का दावा है कि कैदी के पैसों से इस महिला अधिकारी ने खुद की कॉस्मेटिक सर्जरी करवाई और कई विदेशी यात्राएं भी कीं। अब आप सोच रहे होंगे कि ये माजरा क्या है, तो चलिए एक-एक करके परतें खोलते हैं।
मामला तब गरमाया, जब एक सीनियर जेल अधिकारी के घर पर हुए जानलेवा हमले की साजिश की जांच शुरू हुई। शुरुआती जांच में ही शक की सुई जालंधर की इस महिला अधिकारी की ओर घूम गई।
आरोप है कि महिला अधिकारी ने ही उस सीनियर अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो कैदी तक पहुंचाई थी। फिर इसी जानकारी के आधार पर उस अधिकारी की पहचान की गई और पूरी साजिश को अंजाम दिया गया।
ये पूरा प्रकरण बाद में कनाडा पुलिस की ‘प्रोजेक्ट साउथ’ नाम की एक बड़ी जांच का अहम हिस्सा बन गया।
पंजाब से कनाडा तक: कौन हैं ये किरदार?
कनाडा पुलिस के मुताबिक, इस कहानी की मुख्य किरदार हैं निशवंत कौर दोसांझ। इनका परिवार पंजाब के जालंधर जिले के दोसांझ कलां गांव से जुड़ा हुआ है।
निशवंत ब्रिटिश कोलंबिया के ऐबट्सफोर्ड में रहती हैं और टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर में कॉर्पोरल के पद पर तैनात थीं। वहीं, दूसरा किरदार है 32 वर्षीय गुरप्रीत सिंह, जो पंजाब से ट्रक ड्राइवर के तौर पर कनाडा गया था।
बाद में जांच एजेंसियों ने उसका नाम अमेरिका के एक वॉन्टेड ड्रग तस्कर, रॉयन वेडिंग, के कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जोड़ दिया। अक्टूबर 2024 से गुरप्रीत टोरंटो जेल में बंद है और इस वक्त अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का सामना कर रहा है।
अधिकारी और कैदी की प्रेम कहानी: ऐसे शुरू हुआ रिश्ता
ITO (इन्फॉर्मेशन टू ऑब्टेन) नाम के एक 563 पन्नों वाले दस्तावेज़ से इस पूरी कहानी का खुलासा हुआ है, जिसे 3 जुलाई को ऑन्टारियो सुपीरियर कोर्ट की अनुमति के बाद सार्वजनिक किया गया। इस दस्तावेज़ के मुताबिक, गुरप्रीत के अक्टूबर 2024 में टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर पहुंचने से पहले से ही निशवंत और उसके बीच लंबे समय से निजी संबंध थे।
जब गुरप्रीत जेल पहुंचा और निशवंत को इस बात का पता चला, तो उनके बीच का ये रिश्ता फिर से सक्रिय हो गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि निशवंत ने जानबूझकर अपनी ड्यूटी उसी टावर और ब्लॉक में लगवा ली, जहां गुरप्रीत बंद था। अक्टूबर 2024 से लेकर 2025 तक, इन दोनों के बीच जेल के अंदर लगातार निजी मुलाकातें होती रहीं, जो नियमों के खिलाफ थीं।
शक की सुई घूमी, फिर खुला राज
पुलिस के अनुसार, निशवंत अक्सर गुरप्रीत की सेल के आसपास जरूरत से ज्यादा समय बिताती थीं। इस असामान्य गतिविधि पर जेल सुपरवाइजरों की नजर पड़ी।
उन्होंने ये भी देखा कि निशवंत गुरप्रीत से मिलने के बाद उसके पूर्व सेलमेट से भी जाकर मिलती थीं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी असामान्य बर्ताव के बाद दोनों पर निगरानी बढ़ा दी गई, और यहीं से पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
ITO दस्तावेज़ों में यह भी दावा किया गया है कि दोनों सिर्फ जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि गुरप्रीत के पास कथित तौर पर एक अवैध मोबाइल फोन भी था, जिसके जरिए वे लगातार संपर्क में रहते थे। जांच के दौरान गुरप्रीत की कई बातचीत इंटरसेप्ट की गईं और उन्हें मॉनिटर भी किया गया, जिनसे उनके संबंधों और साजिशों के बारे में अहम जानकारियां मिलीं।
साजिश का पर्दाफाश और जांच का दायरा
जैसा कि हमने पहले बताया, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक वरिष्ठ जेल अधिकारी पर हमले की साजिश की जांच शुरू हुई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि निशवंत ने ही उस अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की फोटो गुरप्रीत तक पहुंचाई थी।
इस जानकारी का इस्तेमाल कर गुरप्रीत और उसके साथियों ने कथित तौर पर उस अधिकारी की पहचान की और फिर हमला करने की पूरी योजना बनाई। यह घटना कनाडा पुलिस की ‘प्रोजेक्ट साउथ’ जांच का एक केंद्रीय बिंदु बन गई, जिसमें ड्रग तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के तार भी जुड़े होने की आशंका थी।
महंगे शौक और पैसों का खेल
जांच दस्तावेजों में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है। कहा गया है कि निशवंत ने अपने एक सहकर्मी को बताया था कि गुरप्रीत ने उसे 'महंगे गिफ्ट' दिए थे।
लेकिन सिर्फ गिफ्ट तक ही बात नहीं रुकी, बल्कि जांच एजेंसियों का आरोप है कि गुरप्रीत के पैसों से निशवंत ने खुद की कॉस्मेटिक सर्जरी करवाई और कई विदेशी यात्राएं भी कीं। यानी, जेल के भीतर पनपे इस प्रेम प्रसंग में पैसों का भी बड़ा खेल था, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर निशवंत अपने निजी ऐशो-आराम के लिए कर रही थीं।
ड्रग तस्करी से कनेक्शन और अब क्या?
गुरप्रीत सिंह का नाम पहले ही अमेरिका के वांछित ड्रग तस्कर रायन वेडिंग के कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इस नए खुलासे के बाद, निशवंत और गुरप्रीत के बीच के संबंधों की गहराई और उनके आपराधिक नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका और बढ़ गई है।
मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। निशवंत दोसांझ को पेड लीव पर भेज दिया गया है, यानी उन्हें वेतन तो मिल रहा है, लेकिन वे ड्यूटी पर नहीं हैं।
वहीं, गुरप्रीत सिंह अभी भी जेल की सलाखों के पीछे है और अमेरिका प्रत्यर्पण की कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। इस मामले में आगे क्या होगा, यह अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।





































