जालंधर: शहर में सुबह की शुरुआत एक ऐसे मंज़र से हुई, जिसने सबकी सांसें अटका दीं। पंजाब के जालंधर के भीड़भाड़ वाले कोर्ट रोड पर, जहाँ दिनभर लोगों की चहलकदमी और गाड़ियों की आवाजाही रहती है, वहाँ अचानक एक विशालकाय पेड़ तेज़ आंधी के झोंके के साथ ज़मीन पर आ गिरा। यह कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसा भयावह पल था जिसने दो गाड़ियों को मलबे में बदल दिया और कई लोगों की जान बाल-बाल बचाई। जिस जगह यह हादसा हुआ, वहाँ अमूमन कई गाड़ियाँ खड़ी रहती हैं और लोग आते-जाते रहते हैं। जब पेड़ गिरा, तो आस-पास मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई और हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगा।
यह घटना मंगलवार सुबह की है, जब मौसम में अचानक बदलाव आया और तेज़ हवाएँ चलने लगीं। कोर्ट रोड पर खड़ा एक पुराना सफेदे (यूकेलिप्टस) का पेड़, जो काफी समय से एक तरफ झुका हुआ बताया जा रहा था, आंधी का ज़ोर नहीं सह पाया और धड़ाम से नीचे आ गिरा।
इसकी चपेट में वहाँ खड़ीं दो कारें बुरी तरह से आ गईं। एक पल में लाखों का नुकसान हो गया, गाड़ियाँ पहचानने लायक नहीं रहीं।
लेकिन राहत की बात यह रही कि उस समय गाड़ियों के अंदर कोई सवार नहीं था, वरना मंज़र और भी भयानक हो सकता था।
कोर्ट रोड पर भयावह मंज़र: जब आंधी बनी काल
सुबह का वक्त था, लोग अपने काम पर निकल रहे थे, कुछ अपनी गाड़ियों को पार्क करके आस-पास के बाज़ारों या दफ्तरों में गए थे। अचानक तेज़ हवाओं के साथ धूल का गुबार उठा और फिर एक ज़ोरदार आवाज़ ने पूरे इलाके को थर्रा दिया।
पेड़ इतनी तेज़ी से गिरा कि आस-पास के लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही पेड़ झुका, लोगों ने जान बचाने के लिए सरपट दौड़ना शुरू कर दिया।
कुछ पल पहले तक जहाँ सामान्य चहल-पहल थी, वहाँ अफरा-तफरी और डर का माहौल छा गया। अगर लोग समय रहते अपनी फुर्ती न दिखाते, तो कई लोग इस भारी-भरकम पेड़ के नीचे कुचले जा सकते थे।
यह वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं था कि कोई जनहानि नहीं हुई। पेड़ गिरने के बाद सड़क पर भारी जाम लग गया और घंटों तक यातायात बाधित रहा।
स्थानीय लोग, पुलिस और कुछ प्रशासनिक कर्मी मौके पर पहुँचे, लेकिन पेड़ इतना बड़ा था कि उसे हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
धीरज की कहानी: बाल-बाल बचे, गाड़ी हुई तबाह
इस हादसे में जिन लोगों की गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हुईं, उनमें से एक धीरज नाम के शख्स भी थे। धीरज ने घटना की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि वह अपनी गाड़ी को इसी पेड़ के पास पार्क करके कुछ दूरी पर खड़े थे।
उनकी किस्मत अच्छी थी कि वह अपनी गाड़ी से बाहर थे। धीरज ने बताया, “मैं अभी कुछ दूरी पर ही खड़ा था कि अचानक तेज़ आंधी का एक झोंका आया और देखते ही देखते यह विशालकाय पेड़ सीधा मेरी गाड़ी पर आ गिरा।
मेरी आँखों के सामने मेरी गाड़ी मलबे में तब्दील हो गई।” धीरज ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “यह भगवान का शुक्र था कि मैं उस वक्त गाड़ी के अंदर नहीं था।
अगर मैं गाड़ी के अंदर होता, तो शायद आज मैं यह कहानी सुनाने के लिए ज़िंदा नहीं होता। यह एक बड़ी अनहोनी थी, जिससे मैं बाल-बाल बचा हूँ।
” धीरज जैसे और भी गाड़ी मालिक थे, जो अपनी क्षतिग्रस्त गाड़ियों को देखकर हताश थे। उनकी लाखों रुपये की गाड़ियाँ अब सिर्फ लोहे का ढेर बनकर रह गई थीं, और इसका सीधा नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा था।
प्रशासन की अनदेखी पर सवाल: झुके पेड़ बने खतरा
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा और रोष देखने को मिला। प्रभावित वाहन मालिकों और आस-पास के दुकानदारों का कहना है कि यह सफेदे का पेड़ काफी समय से एक तरफ झुका हुआ था और यह साफ तौर पर दिख रहा था कि यह कभी भी गिर सकता है।
उन्होंने बताया कि इस बारे में कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यह सिर्फ एक पेड़ का मामला नहीं है।
शहर के कई मुख्य मार्गों और रिहायशी इलाकों में ऐसे दर्जनों पेड़ हैं जो या तो पूरी तरह सूख चुके हैं या फिर खतरनाक तरीके से एक तरफ झुके हुए हैं। ये पेड़ हर वक्त राहगीरों और वाहनों के लिए मौत का जाल बने रहते हैं, लेकिन प्रशासन की नींद तब तक नहीं खुलती जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
”
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम अपनी ज़िम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है। पेड़ों की समय-समय पर छँटाई और सूखे या झुके हुए पेड़ों को हटाने का काम ठीक से नहीं होता।
लोगों का कहना है कि ऐसे हादसों में सिर्फ संपत्ति का नुकसान ही नहीं होता, बल्कि लोगों की जान भी जा सकती है। यह घटना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है और शहर की जनता प्रशासन से इस लापरवाह रवैये पर जवाब मांग रही है।
उन्हें डर है कि अगर जल्द ही इन खतरनाक पेड़ों को नहीं हटाया गया, तो ऐसे और भी हादसे हो सकते हैं, जिनमें शायद लोगों की जान बचा पाना मुमकिन न हो। यह मामला सिर्फ कोर्ट रोड का नहीं, बल्कि पूरे जालंधर शहर में एक गंभीर चेतावनी है कि प्रकृति के साथ-साथ प्रशासनिक अनदेखी भी कितनी भारी पड़ सकती है।


