जालंधर: पंजाब के जालंधर शहर से एक ऐसी ख़बर आई है, जिसे सुनकर आपका दिल 'हार्ट अटैक पराठे वाले' के लिए धड़क उठेगा. जी हां, हम बात कर रहे हैं जालंधर के मॉडल टाउन इलाके के मशहूर 'हार्ट अटैक पराठे वाले' वीर दविंदर सिंह वडाला की. ये वही वीर दविंदर हैं, जिनके पराठों का स्वाद एक बार कॉमेडियन कपिल शर्मा और उनके परिवार ने भी चखा था, और उसके बाद से ये ‘सेलिब्रिटी’ पराठे वाले बन गए. लेकिन अब ये सेलिब्रिटी पराठे वाला मुश्किल में है. उनके पराठे का ठेला बंद करा दिया गया है और आरोप सीधे पुलिस पर लग रहे हैं. वीर दविंदर सिंह का कहना है कि पुलिस उन्हें काम नहीं करने दे रही और उन पर एफआईआर दर्ज करने की धमकी दे रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर अपनी परेशानी बताई है और तो और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मदद की गुहार लगाई है.
मामला रात 12 बजे के बाद का है. वीर दविंदर का कहना है कि मॉडल टाउन पुलिस ने उनका पराठा कार्ट बंद करवा दिया.
उन्होंने अपने वीडियो में सीधे-सीधे पुलिस पर धमकाने का आरोप लगाया. उनका दावा है कि पुलिस ने कहा कि अगर रात 12 बजे के बाद उनका ठेला खुला मिला, तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी जाएगी.
दविंदर सिंह यहीं नहीं रुके. उन्होंने बताया कि उन पर पहले भी दो बार 'पर्चे' (FIR) दर्ज किए जा चुके हैं और अब तीसरी की तैयारी हो रही है.
जबकि उनका दावा है कि उनके पराठे सेलिब्रिटी पराठे हैं और शहर के कई नामी-गिरामी लोग उनके यहां पराठे खाने आते हैं.
रात 12 बजे के बाद के एक और वीडियो में, वीर दविंदर ने फिर दावा किया कि उनके कार्ट को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. उनका तर्क ये है कि मॉडल टाउन में रात 12 बजे के बाद खाने-पीने के कई और भी ठेले खुले रहते हैं, तो फिर सिर्फ उनके साथ ही ये ज्यादती क्यों?
CM मान से 'मौत या कारोबार' की भावुक अपील
वीर दविंदर सिंह वडाला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सीधे मुख्यमंत्री भगवंत मान से गुहार लगाई है. उन्होंने कहा, "या तो आप हमें मरवा ही दो, या फिर हमें कारोबार करने की इजाज़त दो.
" उनकी इस भावुक अपील में एक युवा कारोबारी की हताशा साफ झलक रही है, जो अपनी मेहनत से रोटी कमाना चाहता है, लेकिन उसे कथित तौर पर ऐसा करने से रोका जा रहा है. दविंदर ने सवाल उठाया, "एक कामयाब हो रहे युवा को कारोबार क्यों नहीं करने दिया जा रहा है?" उनकी बातों से लग रहा है कि वो अपनी आजीविका चलाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, लेकिन मेहनत करना नहीं छोड़ेंगे.
कैसे बने 'सेलिब्रिटी पराठे वाले'?
वीर दविंदर सिंह वडाला का नाम पहली बार तब चर्चा में आया, जब मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा अपने परिवार के साथ उनके पराठा कार्ट पर पहुंचे और जमकर पराठों का लुत्फ उठाया. कपिल शर्मा के आने के बाद तो उनका ठेला सचमुच एक 'सेलिब्रिटी स्पॉट' बन गया.
नूरां सिस्टर्स सहित पंजाब की कई और जानी-मानी हस्तियां भी उनके यहां पराठे खाने आ चुकी हैं. उनके 'हार्ट अटैक पराठे' सिर्फ उनके नाम की वजह से नहीं, बल्कि स्वाद की वजह से भी मशहूर हैं.
उनकी यह प्रसिद्धि ही उन्हें जालंधर शहर में एक अलग पहचान देती है, और शायद यही वजह है कि जब उन पर मुसीबत आती है, तो यह खबर आग की तरह फैल जाती है.
तीन सालों से चली आ रही परेशानी का सिलसिला
दविंदर सिंह का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें ऐसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों से, जब से उन्होंने यह काम शुरू किया है, उनकी कार्ट को कई बार बंद करवाने की कोशिश की जा चुकी है.
मॉडल टाउन पुलिस उन्हें बार-बार ठेला लगाने से रोकती है. दविंदर के मुताबिक, यह एक अजीबोगरीब चक्र है – "मैं महीना भर काम करता हूं, फिर चार महीने मेरा काम बंद करवा देते हैं.
महीना-डेढ़ महीना काम करता हूं, फिर चार-पांच महीने मेरा काम बंद करवा देते हैं." यह सिलसिला उनकी कमाई और आजीविका पर सीधा असर डाल रहा है.
पुलिस के अधिकार पर सीधे सवाल
वीर दविंदर सिंह ने पुलिस के रवैये पर सीधा सवाल उठाया है. उन्होंने पूछा, "पुलिस वालों को किसने राइट (अधिकार) दिया कि एक मेहनत-मजदूरी करने वाले पर आवारगी के पर्चे (केस) दर्ज करो, नाजायज अत्याचार करो, मारपीट करो, उसे गालियां निकालो?" उन्होंने पुलिस अफसरों के अधिकारों पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि उन्हें ये अधिकार किसने दिए और इसके पीछे किसकी 'शह' है? उनके ये सवाल एक आम आदमी के उन सवालों की तरह हैं, जो सरकारी तंत्र के गलत इस्तेमाल पर अक्सर उठते हैं.
'क्या सिर्फ मुझ पर ही क्यों अत्याचार?'
दविंदर सिंह का सबसे बड़ा तर्क ये है कि अगर नियम हैं, तो वह सब पर लागू होने चाहिए. उन्होंने कहा कि रात 12 बजे के बाद 40 फीसदी शहर खुला होता है, लोग अपना काम करते हैं, दुकानें खुली रहती हैं, तो फिर 'हार्ट अटैक पराठे वाले' के साथ ही क्यों भेदभाव किया जा रहा है? उन्होंने अपनी आवाज में आक्रोश भरते हुए कहा, "यह धक्का मेरे साथ ही क्यों हैं? क्या बात है, तुम्हारा धक्का और कहीं चलता नहीं? सिर्फ हार्ट अटैक परांठे वाले पर चलता है?" उन्होंने तो यहां तक आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां तक दी जा रही हैं.
उनके इस बयान से पता चलता है कि वह कितने दबाव में हैं और किस तरह की मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहे हैं. इस पूरे मामले में अब देखना होगा कि प्रशासन क्या कदम उठाता है और 'हार्ट अटैक पराठे वाले' को इंसाफ मिल पाता है या नहीं.


