मुंबई: शेयर बाजार की दुनिया में आज एक खबर ने ऐसी हलचल मचाई कि कई बड़े खिलाड़ियों के शेयर धड़ाम हो गए। माहौल ऐसा बन गया, जैसे किसी धाकड़ खिलाड़ी के आने की खबर से बाकी खिलाड़ियों की सांसें अटक गई हों। बात हो रही है देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की। एनएसई अपने अब तक के सबसे बड़े आईपीओ की तैयारी में जुटा है और इसकी आहट भर से बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के शेयरों को तगड़ा झटका लगा है।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने एनएसई को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट जारी की, जिसने मार्केट में खलबली मचा दी। इस रिपोर्ट के आने के बाद आज बीएसई और एमसीएक्स के शेयर 4% तक टूट गए।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस रिपोर्ट में ऐसा क्या था, जिसने इन दो बड़े एक्सचेंजों को इतना परेशान कर दिया? चलिए, पूरा माजरा समझते हैं।
बता दें, एनएसई करीब ₹30 हजार करोड़ का रिकॉर्डतोड़ आईपीओ लाने की तैयारी में है। ये आईपीओ पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) का होगा, यानी इसमें मौजूदा शेयरहोल्डर अपने शेयर बेचेंगे।
अगर ये आईपीओ आता है, तो ये अब तक का देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पहले साल 2024 में हुंडई मोटर इंडिया ₹27,858 करोड़ का आईपीओ लाई थी, जिसने रिकॉर्ड बनाया था।
लेकिन अब एनएसई की एंट्री से ये रिकॉर्ड भी टूटता दिख रहा है।
तो आखिर जेफरीज ने NSE में ऐसा क्या देख लिया?
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में सीधा-सीधा कह दिया है कि एनएसई का प्रोडक्ट मिक्स बीएसई और एमसीएक्स के मुकाबले कहीं ज्यादा 'डाईवर्सिफाइड' यानी विविधतापूर्ण है। आसान भाषा में समझें तो एनएसई सिर्फ एक-दो सेगमेंट में नहीं, बल्कि कई अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज में अपना पैर जमाए बैठा है, और उसमें भी उसका जलवा अलग ही है।
रिपोर्ट बताती है कि इंडेक्स ऑप्शंस और कमोडिटी एफएंडओ (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) को छोड़ दें, तो बाकी लगभग सभी सेगमेंट्स में एनएसई की हिस्सेदारी 90% से भी ज्यादा है। सोचिए, एक एक्सचेंज की इतनी जबरदस्त पकड़! यही नहीं, जेफरीज ने ये भी कहा है कि एनएसई ने बाकी इंटरनेशनल प्लेयर्स के मुकाबले अपना खुद का एक धांसू 'टेक प्रोडक्ट सुईट' तैयार किया है।
मतलब, टेक्नोलॉजी के मामले में भी एनएसई किसी से कम नहीं।
एनएसई सिर्फ इक्विटी मार्केट तक ही सीमित नहीं है। वो कमोडिटीज बिजनेस में भी तेजी से अपने पंख फैला रहा है।
इसके क्लियरिंग कॉरपोरेशन की बात करें तो कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 88% है और एफएंडओ मार्केट में तो ये 91% पर काबिज है। इसके अलावा, एनएसई के पास टेक्नोलॉजी और डेटा ऑफरिंग्स का एक पूरा पैकेज है, जिससे वित्त वर्ष 2026 में इसके कुल रेवेन्यू का 13% हिस्सा आने की उम्मीद है।
जेफरीज के अनुमान के मुताबिक, पूरे इंडियन एक्सचेंज मार्केट के रेवेन्यू का 70% हिस्सा अकेले एनएसई का है। इसके पोर्टफोलियो में इक्विटी कैश, इंडेक्स ऑप्शंस, सिंगल स्टॉक ऑप्शंस, इक्विटी फ्यूचर्स, कमोडिटी एफएंडओ, बॉन्ड्स और करेंसी डेरिवेटिव्स जैसे कई प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
मतलब, एक छत के नीचे सबकुछ!
क्या NSE की सेहत हमेशा से इतनी शानदार रही है?
जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में एनएसई की पिछली कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया है। आपको याद होगा, कोलोकेशन और डार्क फाइबर केस से जुड़े प्रोविजंस में ₹1390 करोड़ और टीएपी (ट्रेड एलायंस पार्टनरशिप) मामले में ₹670 करोड़ के पेमेंट्स ने एनएसई के वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के ऑपरेशनल ईबीआईटीडीए (अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्सेज, डेप्रिसिएशन एंड अमोर्टाइजेशन) पर थोड़ा दबाव डाला था।
लेकिन जेफरीज का कहना है कि ये सभी सेबी सेटलमेंट फीस 'वन-टाइम' होती हैं, यानी एक बार के खर्चे। अगर इन खर्चों को हटाकर देखा जाए, तो एनएसई का 'नॉर्मलाइज्ड ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए मार्जिन' 76-77% पर काफी हद तक स्थिर है।
इसका मतलब है कि कंपनी की बुनियादी सेहत काफी मजबूत है और वो इन एकमुश्त झटकों से उबरने में सक्षम है। कुल मिलाकर, इसकी आर्थिक गाड़ी मजबूत पटरियों पर दौड़ रही है।
ऑप्शंस ट्रेडिंग से इतनी कमाई क्यों हो रही है, क्या है इसका राज़?
रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात सामने आई है, जो एनएसई जैसी कंपनियों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है: ऑप्शंस मार्केट की बंपर ग्रोथ। जेफरीज ने बताया कि वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 के बीच इक्विटी ऑप्शंस सालाना 56% की धमाकेदार रफ्तार से बढ़े हैं।
वहीं, इसी दौरान कैश मार्केट का टर्नओवर सिर्फ 19% की रफ्तार से ही बढ़ पाया।
आप सोच सकते हैं कि ऑप्शंस ट्रेडिंग कितनी तेजी से निवेशकों के बीच पॉपुलर हुई है। वित्त वर्ष 2026 में ऑप्शंस प्रीमियम का एवरेज डेली टर्नओवर (ADTO) डेली कैश मार्केट टर्नओवर का 70% रहा।
ये आंकड़े साफ बताते हैं कि डेरिवेटिव्स, खासकर ऑप्शंस, एक्सचेंजों के लिए एक बड़ा रेवेन्यू सोर्स बन चुके हैं। एनएसई की ऑप्शंस मार्केट में मजबूत पकड़ उसे बाकी एक्सचेंजों से कहीं आगे खड़ा करती है।
तो, कुल मिलाकर बात यही है कि एनएसई का दबदबा बढ़ता जा रहा है। एक तरफ वो अपना रिकॉर्डतोड़ आईपीओ लाने को तैयार है, तो दूसरी तरफ उसकी दमदार परफॉर्मेंस और मार्केट पर मजबूत पकड़ ने बीएसई और एमसीएक्स जैसे एक्सचेंजों के लिए थोड़ी टेंशन बढ़ा दी है।
अब देखना ये है कि आने वाले समय में ये तीनों बड़े खिलाड़ी कैसे अपनी चालें चलते हैं और बाजार में क्या नया रंग देखने को मिलता है।






































