सहारनपुर: सोमवार की रात थी, सहारनपुर के कोर्ट रोड पर स्थित होटल 'खातिरदारी' में सब कुछ सामान्य लग रहा था। दिन भर की भागदौड़ के बाद, होटल के मालिक हर्ष खुराना अपने काम पर ध्यान दे रहे थे। 58 साल के हर्ष खुराना, जो तिलक नगर कॉलोनी के रहने वाले थे, अपने होटल को सिर्फ एक व्यापार नहीं, बल्कि अपना घर मानते थे। उनकी आदत थी कि हर चीज़ पर खुद नज़र रखें, खासकर जब बात स्टाफ और सामान की हो। लेकिन उस रात, यही आदत उनकी जान ले लेगी, किसी ने सोचा भी नहीं था। यह कोई फिल्मी सीन नहीं था, बल्कि एक भयावह हकीकत थी जो लिफ्ट के दरवाजों के पीछे छिपी थी। एक ऐसी कहानी जिसमें एक पल में सब कुछ बदल गया, और होटल की जगमगाहट एक पल में मातम में बदल गई।
होटल 'खातिरदारी' का रेस्टोरेंट ऊपरी मंजिल पर था, जहाँ कारीगर रात भर काम करते रहते थे। इन कारीगरों द्वारा तैयार किया गया सामान, जैसे कि खाने-पीने का सामान या अन्य ज़रूरी चीज़ें, नीचे भेजने के लिए होटल में एक छोटी लिफ्ट लगाई गई थी।
यह लिफ्ट होटल के रोज़मर्रा के कामों का एक अभिन्न हिस्सा थी, जो बिना किसी परेशानी के सालों से इस्तेमाल हो रही थी। हर्ष खुराना अक्सर खुद यह सुनिश्चित करते थे कि सारा काम सुचारू रूप से चले, और शायद यही वजह थी कि उस रात जब सामान आने में देर हुई, तो वो बेचैन हो उठे।
असामान्य देरी और एक बेचैन मालिक
रात के खाने का समय बीत चुका था, और ऊपरी मंजिल से नीचे सामान आने में सामान्य से ज़्यादा देर हो रही थी। हर्ष खुराना ने कारीगरों को ऊपर से सामान नीचे भेजने के लिए कहा था, लेकिन इंतज़ार बढ़ता जा रहा था।
एक अनुभवी होटल व्यवसायी के तौर पर, उन्हें पता था कि छोटी सी भी देरी ग्राहकों के अनुभव को खराब कर सकती है और होटल की प्रतिष्ठा पर असर डाल सकती है। शायद यही सोचकर, या शायद अपनी जिम्मेदारियों के बोझ तले, उन्होंने खुद जाकर देखने का फैसला किया कि आखिर माजरा क्या है।
हर्ष खुराना लिफ्ट वाले हिस्से की तरफ बढ़े। लिफ्ट का दरवाजा खुला था या बंद, और किस मंज़िल पर था, यह फिलहाल जांच का विषय है।
लेकिन जो हुआ, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था। जैसे ही वे लिफ्ट के पास पहुँचे, अचानक लिफ्ट नीचे की तरफ आने लगी।
पलक झपकते ही, हर्ष खुराना का सिर लिफ्ट और दीवार के बीच की जगह में फंस गया। यह इतनी तेज़ी से हुआ कि उन्हें संभलने या चीखने का भी मौका नहीं मिला।
आसपास मौजूद होटल स्टाफ के लिए यह नज़ारा किसी सदमे से कम नहीं था। उनकी आँखों के सामने उनके मालिक एक भयानक हादसे का शिकार हो गए थे।
अफरा-तफरी और अस्पताल की दौड़
लिफ्ट में गर्दन फंसने की आवाज़ और फिर एक डरावनी खामोशी। होटल स्टाफ के होश उड़ गए।
जो लोग पल भर पहले अपनी दिनचर्या में लगे थे, वो अब अपने मालिक को बचाने के लिए बेताब थे। चीख-पुकार मच गई।
कई कर्मचारी तुरंत हर्ष खुराना की तरफ भागे। उन्हें लिफ्ट से निकालने की कोशिश की गई, लेकिन लिफ्ट की बनावट और उसके वज़न के सामने उनके सारे प्रयास बेकार लग रहे थे।
जैसे-तैसे लिफ्ट को रोका गया और उन्हें बाहर निकाला गया।
कर्मचारियों ने बिना एक पल गंवाए, अपने गंभीर रूप से घायल मालिक को तुरंत सहारा देकर उठाया और पास के जिला अस्पताल की तरफ भागे। अस्पताल पहुँचते ही, डॉक्टरों की टीम ने तुरंत जांच शुरू की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
हर्ष खुराना ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया, और यह खबर पूरे होटल स्टाफ और उनके जानने वालों के लिए वज्रपात से कम नहीं थी।
जिस होटल को उन्होंने अपनी मेहनत से खड़ा किया था, उसी की लिफ्ट ने उनकी जान ले ली।
पुलिस की जांच और सवालों के घेरे में लिफ्ट
हादसे की खबर जैसे ही सदर बाजार थाना पुलिस को मिली, महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस टीम तुरंत कोर्ट रोड स्थित होटल खातिरदारी पहुँची।
घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। लिफ्ट को देखा गया, उसके आसपास के क्षेत्र की जांच की गई, और कर्मचारियों से शुरुआती पूछताछ भी की गई।
पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की तह तक जाएंगे कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ।
पुलिस अब कई पहलुओं से जांच कर रही है। क्या लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी थी? क्या उसका रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा था? क्या यह किसी तरह की मानवीय भूल थी? या फिर यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी? इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिए पुलिस जरूरत पड़ने पर लिफ्ट की तकनीकी जांच भी कराएगी।
एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी ताकि लिफ्ट के मैकेनिज्म और उसकी सुरक्षा प्रणालियों की जांच की जा सके। हर्ष खुराना के परिवार और उनके जानने वालों को इस बात का इंतज़ार है कि पुलिस जल्द से जल्द सच्चाई का पता लगाए ताकि उन्हें कुछ तो संतोष मिल सके।
सहारनपुर का एक जाना-माना चेहरा अब नहीं रहा, और पीछे छोड़ गया है कई अनसुलझे सवाल और एक भयानक त्रासदी की दास्तान।



































