सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आपके होश उड़ सकते हैं। सोचिए, एक माँ अपनी ही बेटी के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराती है, और बेटी भी कोई साधारण शख्स नहीं, बल्कि एक सरकारी अफसर है, जो हापुड़ जिले में जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के पद पर तैनात है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं सीमा चौधरी की, जिनके ऊपर उनकी अपनी माँ ने ही धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और जान से मारने की धमकी जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। माँ का आरोप है कि उनकी बेटी ने अपनी 'काली कमाई' को छिपाने के लिए न केवल उनके बैंक खाते का गलत इस्तेमाल किया, बल्कि भूमाफियाओं के साथ मिलकर उनकी पुश्तैनी जमीन हड़पने की भी पूरी साजिश रची। यह सिर्फ एक पारिवारिक झगड़ा नहीं, बल्कि एक अफसर पर लगे भ्रष्टाचार और जमीन हड़पने के गंभीर आरोपों का मामला है, जिसकी परतें अब एक-एक करके खुल रही हैं।
यह पूरा मामला 30 जून का है, जब सहारनपुर पुलिस ने सीमा चौधरी समेत पांच लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया। यह एफआईआर खुद सीमा चौधरी की माँ, श्रीमती मुनेश रानी की तहरीर पर दर्ज की गई है।
सरसावा थाना क्षेत्र में दर्ज हुए इस मामले ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि एक बेटी के खिलाफ उसकी माँ का ही पुलिस के दरवाजे तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी बात है, खासकर तब जब बेटी एक जिम्मेदार सरकारी पद पर हो।
माँ ने लगाए बेटी पर 'काली कमाई' छिपाने के आरोप
ग्राम मीरपुर सीतापुर की रहने वाली श्रीमती मुनेश रानी ने अपनी तहरीर में जो आरोप लगाए हैं, वो बेहद गंभीर हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी सीमा चौधरी, जो इस वक्त हापुड़ में DSO के पद पर तैनात हैं, ने गाजियाबाद के आईसीआईसीआई बैंक में उनके नाम पर एक खाता खुलवाया था।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस खाते को सीमा चौधरी ही ऑपरेट करती थीं और इसमें हुए किसी भी लेनदेन की जानकारी उन्होंने कभी अपनी माँ को नहीं दी। मुनेश रानी के मुताबिक, उन्हें तब पता चला जब उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें खाते में 15 लाख रुपए जमा होने की जानकारी थी।
उन्होंने तुरंत बैंक जाकर इसकी पुष्टि की और पाया कि यह जानकारी सही थी।
मुनेश रानी का आरोप है कि उनकी बेटी सीमा चौधरी ने यह 15 लाख रुपए उनकी अनुमति और जानकारी के बिना उनके खाते में डलवाए थे। उन्हें पूरा यकीन है कि उनकी बेटी ने अपनी 'काली कमाई' को छिपाने के लिए उनके बैंक खाते का इस्तेमाल किया।
यह सिर्फ पैसे के लेनदेन का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे भूमाफियाओं से संबंध और जमीन हड़पने की एक बड़ी साजिश भी बताई जा रही है।
भूमाफिया गिरोह का हिस्सा होने का दावा और जमीन हड़पने की साजिश
माँ मुनेश रानी ने अपनी शिकायत में यह भी बताया है कि उनकी बेटी सीमा चौधरी एक भूमाफिया गिरोह का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा ने सरसावा के मीरपुर सीतापुर गांव निवासी संजीव चौधरी और गंभीर, बागपत के गांव मीरपुरा निवासी राजेंद्र राणा और सरसावा के गांव पहलवानपुर निवासी नरेश कुमार के साथ मिलकर उनकी जमीन पर कब्जा करने की साजिश रची।
यह आरोप बेहद सनसनीखेज है, क्योंकि इसमें एक सरकारी अधिकारी पर सीधे तौर पर भूमाफियाओं के साथ गठजोड़ करने का आरोप लगा है।
मुनेश रानी ने बताया कि इस साजिश के तहत 16 सितंबर 2023 की एक फर्जी रसीद तैयार की गई। इस रसीद पर उनके जाली हस्ताक्षर करके उनकी जमीन हड़पने की कोशिश की गई।
उन्हें इस बात की जानकारी तहसील प्रशासन से मिली। जब मुनेश रानी ने इस पर विरोध जताया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
इन धमकियों से डरकर और दबाव में आकर मुनेश रानी को अपनी जमीन देहरादून निवासी नैंसी को बेचनी पड़ी, जबकि वह अपनी जमीन बेचना नहीं चाहती थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने मुनेश रानी को गहरा सदमा पहुँचाया और उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया।
पुलिस की शुरुआती निष्क्रियता और डीआईजी के आदेश पर कार्रवाई
अपनी आपबीती लेकर मुनेश रानी ने सबसे पहले 13 मई को सरसावा थाने में तहरीर दी थी। लेकिन, आरोप है कि उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जब स्थानीय पुलिस से उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी शिकायत लेकर एसएसपी के पास पहुंचीं। एसएसपी को दिए गए आवेदन के बाद ही इस मामले में तेजी आई।
आखिरकार, 30 जून को शाम साढ़े 4 बजे, सीमा चौधरी समेत पांच लोगों पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
इस मामले पर सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया, “मेरे पास एप्लीकेशन आई होगी, इसके बाद मैंने उसे फॉरवर्ड एसएसपी को किया था।
जांच के बाद यह मुकदमा हुआ है।” पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि एक माँ और बेटी के बीच जमीन और 'काली कमाई' के इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे क्या निकलकर आता है और कानून की पड़ताल में कौन सही साबित होता है।



































