रामगढ़: देर रात का सन्नाटा हो और अचानक से एक ज़ोरदार धमाका पूरे इलाके को हिला दे, तो सोचिए क्या मंजर होगा? ऐसा ही कुछ हुआ झारखंड के रामगढ़ जिले में. रात के अंधेरे में रामगढ़-पतरातू मेन रोड पर बरकाकाना बाजार के पास दो बड़े वाहन, आमने-सामने से इतनी तेज़ी से भिड़े कि टक्कर की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक गूँज गई. पलक झपकते ही दोनों गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए और सबसे बुरा हुआ एक ट्रक चालक के साथ, जो अपनी ही गाड़ी के मलबे में बुरी तरह फँस गया. ये कोई मामूली टक्कर नहीं थी, ये टक्कर इतनी भयानक थी कि इसे देखकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए.
हादसा बरकाकाना रेलवे स्टेशन के ठीक नज़दीक हुआ. एक तरफ LG का 12 चक्का ट्रक (जिसका नंबर WB25GB-0535 था) और दूसरी तरफ़ एक टिप-ट्रेलर (नंबर JH02BJ-8478).
दोनों वाहन शायद अपनी-अपनी धुन में चले आ रहे थे, किसी ने नहीं सोचा होगा कि अगला पल उनकी ज़िंदगी में इतना बड़ा तूफ़ान लाएगा. टक्कर इतनी भीषण थी कि LG ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह से पिचक गया और उसका चालक केबिन में बुरी तरह से फंस गया.
चारों तरफ़ चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. हर कोई सकते में था, समझ नहीं आ रहा था कि क्या हुआ और अब आगे क्या होगा.
हादसे का मंजर और बचाव कार्य की चुनौती
हादसे के बाद का मंजर दिल दहला देने वाला था. एलपी ट्रक का चालक राहुल गुप्ता, जिसकी उम्र महज़ 25 साल थी और जो उत्तर प्रदेश के बलिया का रहने वाला था, अपने पिता ददन गुप्ता के साथ शायद इसी ट्रक से अपना और अपने परिवार का पेट पालने की कोशिश कर रहा था.
वह केबिन में इस तरह से फंस गया था कि उसे बाहर निकालना नामुमकिन सा लग रहा था. उसके शरीर का एक बड़ा हिस्सा लोहे के मलबे में दब चुका था और दर्द से उसकी चीखें पूरे माहौल में गूँज रही थीं.
हादसे की सूचना मिलते ही बरकाकाना थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची. पुलिस टीम ने हालात का जायजा लिया और तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया.
लेकिन चालक को बाहर निकालना आसान नहीं था. केबिन इस कदर क्षतिग्रस्त हो गया था कि उसे काटने और मोड़ने के लिए विशेष उपकरणों की ज़रूरत पड़ रही थी.
पुलिस और स्थानीय लोग मिलकर जी-जान से जुटे हुए थे. हर कोई अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर रहा था कि किसी तरह राहुल को बचाया जा सके.
एक घंटे की मशक्कत के बाद मिली कामयाबी
जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था, मौके पर मौजूद हर किसी की धड़कनें तेज होती जा रही थीं. राहुल गुप्ता की साँसें तेज़ हो रही थीं और उसकी आँखों में मदद की उम्मीद साफ दिख रही थी.
उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए आखिरकार क्रेन की मदद लेनी पड़ी. क्रेन के ज़रिए ट्रक के मलबे को हटाया गया, धीरे-धीरे करके केबिन के फंसे हुए हिस्सों को काटा गया और मोड़ा गया.
पुलिसकर्मी और स्थानीय स्वयंसेवक मिलकर लगातार काम कर रहे थे, एक-एक इंच जगह बनाते हुए राहुल तक पहुंचने की कोशिश की जा रही थी.
करीब एक घंटे तक चले इस अथक प्रयास के बाद, आखिरकार वह पल आया जब राहुल गुप्ता को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका. वह बुरी तरह घायल था, उसके शरीर पर कई चोटें थीं और वह बेसुध हालत में था.
उसे तुरंत बिना कोई वक्त गंवाए इलाज के लिए रामगढ़ सदर अस्पताल भेजा गया. अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन समय रहते उसे बाहर निकाल लिए जाने से उसकी जान बच गई है.
पुलिस पदाधिकारियों ने भी इस बात पर जोर दिया कि अगर राहत कार्य में देरी होती, तो शायद परिणाम कुछ और ही होता.
ट्रैफिक जाम और पुलिस की आगे की कार्रवाई
इस भीषण हादसे का असर सिर्फ घायलों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका खामियाजा सड़क पर चल रहे आम लोगों को भी भुगतना पड़ा. दुर्घटना के चलते रामगढ़-पतरातू मेन रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह से ठप रहा.
सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. लोग अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए घंटों फँसे रहे, वहीं कई लोग इस भीषण जाम में अपनी गाड़ी छोड़कर पैदल ही आगे बढ़ गए.
यातायात को सामान्य करने के लिए पुलिस ने फिर से मोर्चा संभाला. क्रेन की मदद से दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को, जो सड़क के बीचों-बीच पड़े थे, हटाया गया और सड़क के किनारे ले जाया गया.
जब सड़क पूरी तरह से साफ हो गई, तब जाकर आवागमन फिर से सामान्य हो सका और लोगों ने राहत की साँस ली. पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक और टिप-ट्रेलर दोनों को जब्त कर लिया है और उन्हें बरकाकाना थाना ले जाया गया है.
पुलिस अब पूरे मामले की गहनता से जाँच कर रही है. प्रारंभिक तौर पर, हादसे का कारण तेज रफ्तार और लापरवाही को माना जा रहा है.
अक्सर ऐसे भीषण सड़क हादसों में यही दो वजहें सबसे ऊपर होती हैं. हालांकि, पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जाँच के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगी.
जब तक पूरी जाँच नहीं हो जाती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि किसकी गलती थी या किसकी लापरवाही ने इस जानलेवा हादसे को अंजाम दिया.




































